राजस्थान हाईकोर्ट ने जीरो नंबर पर नियुक्त देने और माइनस पर नियुक्ति से इनकार करते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की सबसे बड़ी 53 हजार 749 पदों पर जारी चपरासी भर्ती के रिजल्ट को रद्द कर दिया है. राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य कर्मचारी बोर्ड परीक्षा में सफल होने के लिए कोई न्यूनतम अंक तय करें. ये फैसला कैसे होगा कि शून्य वाला ज्यादा काबिल अभ्यर्थी है या गलत उत्तर देकर निगेटिव अंक लाने वाला काबिल उम्मीदवार है.
दरअसल, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की फोर्थ ग्रेड की भर्ती परीक्षा में दिव्यांग, विधवा-परित्यक्ता, एक्स आर्मी मैन, सहरिया जैसे कोटे के अंदर कई लोग सफल अभ्यर्थी घोषित हुए हैं जिनके जीरो नंबर आए हैं. बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ एक्स आर्मी मैन ओबीसी कोटे में माइनस 0.6 नंबर लाने वाले विनोद कुमार ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की.
क्या है याचिका की मांग?
विनोद ने याचिका में कहा कि एक्स आर्मी मैन, ओबीसी कोटे में पद खाली होने के बावजूद मुझे माइनस अंक लाने के आधार पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है जबकि जीरो नंबर लाए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा रही है. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता हरेंद्र नील ने कोर्ट ने कहा कि राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड का यह नियम युक्तिसंगत और न्यायसंगत नहीं माना जा सकता है. परीक्षा में सफल होने के लिए न्यूनतम अंक के साथ कोई नियम तय करें और रिजल्ट का निर्धारण फिर से करें. मामले की सुनवाई राजस्थान हाईकोर्ट के जज आनंद शर्मा के कोर्ट में हुई.
कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले को लेकर कोर्ट ने कहा कि भर्ती में न्यूनतम अंक निर्धारित करना जरूरी है. बिना न्यूनतम अंक के भर्ती करना गैर-संविधानिक माना जाएगा. कोर्ट ने आगे कहा कि चाहे पद ग्रेज फोर्थ ही क्यों न हो, लेकिन एक बेसित स्टैंडर्ड का तय होना अनिवार्य है.
कब हुई थी परीक्षा?
नियुक्ति के लिए इंतजार कर रहे अभ्यर्थी राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज पर गुस्सा निकालते हुए कहा कि आलोक राज के मनमाने फैसले से बेरोजगार परेशान हो रहे है. कई सालों के इंतजार के बाद राजस्थान में फोर्थ ग्रेड की भर्ती निकली थी. 53 हजार 749 पदों पर सितंबर 2025 में परीक्षा हुई थी और 16 जनवरी 2026 को रिजल्ट जारी हुआ था.
शरत कुमार