NEET लीक: सिस्टम में सेंध या बड़ी चूक? 5 चार्जशीट और 50 गिरफ्तारियों के बाद भी क्यों नहीं थमा धांधली का दौर?

हाल ही में हुए NEET-UG परीक्षा के पेपर लीक ने 2024 के पेपर लीक मामले में CBI की जांच पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं और एक मुश्किल सवाल को फिर से हवा दे दी है. पांच आरोपपत्र, लगभग 50 गिरफ्तारियों और कई राज्यों में फैली जांच के बावजूद, क्या जांचकर्ताओं ने भारत के सबसे बड़े परीक्षा घोटालों में से एक के पीछे के व्यापक तंत्र को सचमुच ध्वस्त कर दिया है  या केवल निचले स्तर के लोगों को ही गिरफ्तार किया है?

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NEET Paper Leak 2026 (Photo-PTI) NEET Paper Leak 2026 (Photo-PTI)

मुनीष पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

NEET-UG 2024 पेपर लीक मामले ने देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा हिला दिया था. अब हाल ही में सामने आए नए विवादों के बाद एक बार फिर वही सवाल उठ रहा है कि क्या CBI इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंच पाई है या सिर्फ छोटे खिलाड़ियों को पकड़कर मामला सीमित रह गया? इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से जारी कई आरोपपत्रों और आधिकारिक बयानों के अनुसार, एजेंसी ने स्कूल अधिकारियों, बिचौलियों, MBBS छात्रों के सॉल्वर, ट्रांसपोर्टरों और लाभार्थियों से जुड़े एक विस्तृत षड्यंत्र का पर्दाफाश किया है.

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मामले में हुए कई खुलासे...

CBI की जांच में अब तक कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. एजेंसी के मुताबिक 5 मई 2024 की सुबह हजारीबाग के ओएसिस स्कूल से NEET का प्रश्नपत्र लीक किया गया था. आरोप है कि कुछ लोगों ने सीलबंद बॉक्स के साथ छेड़छाड़ की तस्वीरें निकालीं, फिर उसे हल करवा कर उन छात्रों तक पहुंचाया जिन्होंने इसके लिए बड़ी रकम दी थी. जांच के दौरान CBI ने स्कूल से जुड़े लोगों, बिचौलियों, MBBS छात्रों, ट्रांसपोर्टरों और कथित लाभार्थियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया. अब तक कई आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं और करीब 50 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एजेंसी ने 144 ऐसे छात्रों की भी पहचान की जिन्हें इस लीक का फायदा मिलने का शक है.

बड़ा है नीट का नेटवर्क  

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लेकिन इतने बड़े ऑपरेशन को देखकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या इतना संगठित नेटवर्क सिर्फ कुछ लोगों के दम पर चल सकता था? या इसके पीछे कोई बड़ा सिस्टम, मजबूत फाइनेंसिंग और प्रभावशाली लोग भी थे? परीक्षा घोटालों पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तरह के पेपर लीक रैकेट अकेले काम नहीं करते. इनमें नीचे से लेकर ऊपर तक कई चरणों में लोग जुड़े रहते हैं. फील्ड में काम करने वाले बिचौलिए और छोटे ऑपरेटर आसानी से बदले जा सकते हैं, लेकिन असली चुनौती उन लोगों तक पहुंचने की होती है जो पूरे नेटवर्क को खड़ा करते हैं, पैसा लगाते हैं और इसे लगातार चलाते रहते हैं. 

रोका जा सकता था NEET UG 2026 का पेपर लीक 

यही वजह है कि अब यह बहस इस बात को लेकर तेज हो गई है कि अगर जांच और गहराई से की जाती तो, NEET UG 2026 के पेपर लीक को रोका जा सकता था. अगर कथित मास्टरमाइंड या बड़े नेटवर्क का पूरी तरह खुलासा होता, तो क्या भविष्य में होने वाले ऐसे विवाद रोके जा सकते थे? हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जो हाल की किसी भी कथित गड़बड़ी को सीधे NEET-UG 2024 केस से जोड़ता हो. लेकिन जनता के बीच यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि क्या जांच कहीं न कहीं अधूरी रह गई?

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अब भी हो रही है जांच

CBI का कहना है कि जांच अभी भी जारी है और जैसे-जैसे नए सबूत मिलेंगे, आगे भी आरोपपत्र दाखिल किए जा सकते हैं. एजेंसी ने लोगों से अफवाहों और अटकलों से बचने की अपील भी की है. फिर भी बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने देश की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. लाखों मेहनती छात्रों के मन में अब यही चिंता है कि क्या सिर्फ गिरफ्तारियां काफी हैं या फिर इस पूरे रैकेट के असली चेहरों को सामने लाकर सिस्टम को जड़ से साफ करने की जरूरत है.

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