पैरा-SF और MARCOS कमांडो ने सिक्किम में 17000 फीट की ऊंचाई पर किया युद्ध डाइविंग प्रशिक्षण

भारतीय सेना के PARA (SF) और नौसेना के MARCOS ने सिक्किम में 17000 फीट की ऊंचाई पर 30 अगस्त से 5 सितंबर 2025 तक युद्ध डाइविंग प्रशिक्षण किया. ठंडे पानी में 17 मीटर गहरी डाइविंग, रात में युद्ध अभ्यास और कठिन इलाकों में ट्रेनिंग हुई. यह अभ्यास सेनाओं की एकजुटता, हिम्मत और हर चुनौती के लिए तैयारियों को दर्शाता है.

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सिक्किम में किसी बर्फीली पहाड़ी झील में डाइव मारते कमांडो. (File Photo: ADGPI) सिक्किम में किसी बर्फीली पहाड़ी झील में डाइव मारते कमांडो. (File Photo: ADGPI)

मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 4:49 PM IST

भारतीय सेना के PARA (स्पेशल फोर्सेस) और नौसेना के मरीन कमांडो (MARCOS) ने 30 अगस्त से 5 सितंबर 2025 तक सिक्किम में 17000 फीट की ऊंचाई पर एक संयुक्त स्कूबा और युद्ध डाइविंग प्रशिक्षण आयोजित किया. यह प्रशिक्षण ठंडे पानी और मुश्किल इलाकों में हुआ, जिसने हमारे सैनिकों की हिम्मत, कौशल और एकजुटता को दिखाया. 

प्रशिक्षण का उद्देश्य और खासियतें

यह संयुक्त प्रशिक्षण सिक्किम के ऊंचे पहाड़ों में हुआ, जहां हवा पतली और पानी बर्फ जैसा ठंडा था. PARA (SF) और MARCOS ने 17 मीटर गहरे पानी में कई तरह की डाइविंग की...

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  • ओपन सर्किट एयर डाइविंग: सामान्य ऑक्सीजन टैंक के साथ डाइविंग.
  • क्लोज्ड सर्किट प्योर ऑक्सीजन डाइविंग: विशेष उपकरणों से बिना बुलबुले बनाए डाइविंग.
  • रात में युद्ध डाइविंग: अंधेरे में युद्ध के लिए डाइविंग.
  • ठंडे पानी में डाइविंग: बर्फीले पानी में मिशन करने की प्रैक्टिस.

यह प्रशिक्षण कठिन था क्योंकि ऊंचाई और ठंड ने सैनिकों की शारीरिक और मानसिक ताकत की परीक्षा ली. फिर भी दोनों बलों ने शानदार प्रदर्शन किया  जिससे उनकी पेशेवर क्षमता सामने आई.

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क्यों जरूरी है यह प्रशिक्षण?

आज के युद्ध बदल रहे हैं. भविष्य में कोई नहीं जानता कि चुनौतियां कहां से आएंगी. ऊंचे पहाड़ों और ठंडे पानी में प्रशिक्षण सैनिकों को हर स्थिति के लिए तैयार करता है. यह अभ्यास न सिर्फ डाइविंग कौशल को बेहतर करता है, बल्कि सेना और नौसेना के बीच एकजुटता को भी बढ़ाता है. इससे भारत की विशेष बलों की ताकत और मिशन के लिए तैयारियां मजबूत होती हैं.

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PARA (SF) भारतीय सेना की सबसे खास इकाई है, जो ऊंचाई वाले युद्ध और आतंकवाद विरोधी मिशनों में माहिर है. वहीं, MARCOS नौसेना की कुलीन इकाई है, जो समुद्र, हवा और जमीन पर मिशन करती है. दोनों का यह संयुक्त प्रशिक्षण दिखाता है कि भारत की सेनाएं हर तरह के इलाके में लड़ने के लिए तैयार हैं.

सैनिकों की हिम्मत और एकजुटता

टीम कमांडर ने कहा कि ऐसी कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षण सैनिकों की हिम्मत, कौशल और मानसिक ताकत की पूरी परीक्षा लेता है. यह सुनिश्चित करता है कि हमारे जवान किसी भी मुश्किल माहौल में प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं. यह अभ्यास हमारी सेनाओं की एकजुटता और हर चुनौती के लिए तैयार रहने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. MARCOS जिन्हें समंदर का भूत भी कहा जाता है. PARA (SF) ने मिलकर दिखाया कि वे हिमालय की ऊंचाइयों से लेकर गहरे समुद्र तक हर जगह मिशन को अंजाम दे सकते हैं.

भारत की सैन्य ताकत को नई दिशा

यह संयुक्त प्रशिक्षण भारत की सैन्य रणनीति को और मजबूत करता है. सिक्किम जैसे ऊंचे इलाकों में जहां भारत-चीन सीमा (LAC) पर तनाव रहता है, ऐसी ट्रेनिंग बहुत जरूरी है. यह न सिर्फ सैनिकों को नई तकनीकों और रणनीतियों से लैस करता है, बल्कि सेना और नौसेना के बीच सहयोग को भी बढ़ाता है. इससे भारत की विशेष बल इकाइयां दुनिया के सबसे खतरनाक मिशनों के लिए तैयार रहती हैं.
 

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