'वायु अस्त्र-1' की मार से नहीं बच पाएंगे दुश्मन, हवा में टारगेट बदलने वाले स्वदेशी ड्रोन का सफल परीक्षण

नाइब लिमिटेड ने स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन वायु अस्त्र-1 का राजस्थान और उत्तराखंड में सफल तकनीकी परीक्षण किया है. इस ड्रोन ने 100 किलोमीटर की दूरी पर सटीक निशाना लगाया और 10 किलोग्राम वॉरहेड के साथ एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर स्ट्राइक क्षमता का प्रदर्शन किया.

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ये परीक्षण राजस्थान और उत्तराखंड में हुआ. (Photo- ITGD) ये परीक्षण राजस्थान और उत्तराखंड में हुआ. (Photo- ITGD)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 8:03 AM IST

भारतीय रक्षा तकनीक के क्षेत्र में देश को एक और बड़ी सफलता मिली है. भारत की डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी 'नाइब लिमिटेड' (NIBE Limited) ने अपने स्वदेशी लोइटरिंग म्यूनिशन 'वायु अस्त्र-1' का तकनीकी परीक्षण पूरा कर लिया है. 

'वायु अस्त्र-1' को आम भाषा में आत्मघाती या कामिकेज ड्रोन भी कहा जाता है. ये परीक्षण भारतीय सेना की 100 किलोमीटर दूरी की मारक क्षमता वाली जरूरत को पूरा करने के लिए राजस्थान के पोखरण और उत्तराखंड के जोशीमठ (मलारी) में किया गया.

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NIBE के मुताबिक, एंटी-पर्सनल स्ट्राइक ट्रायल के दौरान इस ड्रोन में 10 किलोग्राम का वॉरहेड लगाया गया था. परीक्षण के दौरान इस सिस्टम ने एक ही बार में 100 किलोमीटर दूर मौजूद अपने लक्ष्य पर बेहद सटीक निशाना लगाया. 

'वायु अस्त्र-1' का 'सर्कुलर एरर प्रोबेबल' यानी निशाने की चूक की गुंजाइश एक मीटर से भी कम रही, जो इसकी अचूक मारक क्षमता को दिखाती है. इस परीक्षण के दौरान  'वायु अस्त्र-1' ने मिशन को बीच में रोकने, दोबारा हमला करने और वापस घूमकर हमला करने की अपनी बेहतरीन क्षमताओं का भी शानदार प्रदर्शन किया.

रात के अंधेरे में भी टैंकों को उड़ाने की ताकत

इसके अलावा सेना के टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों को तबाह करने के लिए 'एंटी-आर्मर स्ट्राइक' का भी परीक्षण किया गया. इस दौरान इस आत्मघाती ड्रोन ने इन्फ्रारेड कैमरे की मदद से रात के घने अंधेरे में एक सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया. ड्रोन ने रात में भी दो मीटर से कम की सटीक दूरी के भीतर अपने टारगेट को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया. 

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NIBE ने इस दौरान तकनीक का एक और बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें ड्रोन का नियंत्रण 70 किलोमीटर दूर स्थित एक फॉरवर्ड कंट्रोल स्टेशन को ट्रांसफर कर दिया गया. उत्तराखंड के जोशीमठ में हुए इस परीक्षण के दौरान ड्रोन की सहनशक्ति को परखा गया. इस बर्फीले और पहाड़ी इलाके में  'वायु अस्त्र-1' ने 14,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर 90 मिनट से ज्यादा समय तक लगातार उड़ान भरने का रिकॉर्ड बनाया. 

यह भी पढ़ें: DRDO ने ड्रोन से लॉन्च होने वाली प्रिसीजन गाइडेड मिसाइल वी-3 का सफल टेस्ट किया

मिशन पूरा होने के बाद इस म्यूनिशन को भविष्य के ऑपरेशन्स के लिए सुरक्षित रूप से वापस रिकवर भी कर लिया गया. NIBE ने बताया कि इसी तरह के शुरुआती परीक्षण पहले राजस्थान के पोखरण में भी आयोजित किए जा चुके हैं. इस स्वदेशी तकनीक के आने से भारतीय सेना की ताकत सीमा पर कई गुना बढ़ जाएगी.

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