समंदर में बढ़ेगी भारत की ताकत! ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की बरसी पर नेवी में शामिल होगी यह पनडुब्बी

भारतीय नौसेना अप्रैल-मई में तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को कमीशन कर सकती है. 7000 टन क्षमता वाली यह SSBN K-4 मिसाइलों से लैस होकर भारत की सेकंड स्ट्राइक और परमाणु निवारण क्षमता मजबूत करेगी.

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इंडियन नेवी को जल्द मिलेगी आईएनएस अरिदमन सबमरीन (Photo: Representational/X/DefenceDecode) इंडियन नेवी को जल्द मिलेगी आईएनएस अरिदमन सबमरीन (Photo: Representational/X/DefenceDecode)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:37 AM IST

भारतीय नौसेना इस साल अप्रैल-मई के करीब अपने तीसरे स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN), आईएनएस अरिदमन को कमीशन करने की तैयारी कर रही है. जिस समय कमीशन करने की तैयारी हो रही है, यह वक्त 'ऑपरेशन सिंदूर' की वर्षगांठ के साथ मेल खाता है. सूत्रों ने आजतक को यह जानकारी दी है.

नौसेना प्रमुख दिनेश के. त्रिपाठी ने दिसंबर में इस पनडुब्बी के 2026 में कमीशन होने की पुष्टि की थी. मौजूदा वक्त में यह पनडुब्बी समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है, जहां सिस्टम वेरिफिकेशन और हथियारों के एकीकरण का काम पूरा होने वाला है. 

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शिप बिल्डिंग सेंटर में निर्मित यह पनडुब्बी भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता और 'सेकंड स्ट्राइक' क्षमता को काफी मजबूती देगी.

पिछली पनडुब्बियों से बड़ी और पावरफुल

गोपनीय एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) कार्यक्रम के तहत बनी आईएनएस अरिदमन (S4) अपने से पहले की सबमरीन की तुलना में ज्यादा सक्षम है. इसका डिस्प्लेसमेंट करीब 7,000 टन है, जो आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात के 6,000 टन के विस्थापन से काफी ज्यादा है. यह पनडुब्बी लंबी दूरी की K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो भारत की मारक क्षमता को बढ़ाती है.

यह भी पढ़ें: समुद्र में तेजी से बढ़ रहा चीन का वर्चस्व... पनडुब्बी बनाने में अमेरिका को छोड़ा पीछे

परमाणु सिद्धांत और रणनीतिक तैयारी

आईएनएस अरिदमन का कमीशन होना भारत के न्यूनतम विश्वसनीय निवारण (Credible Minimum Deterrence) के परमाणु सिद्धांत का एक प्रमुख स्तंभ है. नौसेना प्रमुख के बयानों के मुताबिक, पनडुब्बी ने अहम विकास मील के पत्थर पार कर लिए हैं. अब शुरुआती गर्मियों में इसके कमीशन होने की ज्यादा संभावना है, जो समुद्री सीमाओं पर भारत की रणनीतिक पहुंच और सर्वाइवल सुनिश्चित करेगा.

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