IIT मद्रास ने तोप के गोलों में लगाया रैमजेट इंजन, रेंज बढ़ाकर दोगुना कर दिया

आईआईटी मद्रास ने 155 mm तोपखाने की गोलों में रैमजेट इंजन लगाकर रेंज 50% तक बढ़ा दी है. ATAGS की रेंज 40 से 70 किमी, वज्र 36 से 62 किमी, धनुष 30 से 55 किमी हो गई. मौजूदा तोपों में बदलाव से नई तोप या मिसाइल की जरूरत नहीं. प्रोजेक्ट 2020 से भारतीय सेना के साथ चल रहा है.

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भारतीय सेना के तीन तोपों के गोलों में लगाया रैमजेट इंजन. (Photo: X/IIT Madras) भारतीय सेना के तीन तोपों के गोलों में लगाया रैमजेट इंजन. (Photo: X/IIT Madras)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 13 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 6:54 PM IST

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. वैज्ञानिकों ने 155 mm की सामान्य तोपखाने के गोलों में रैमजेट इंजन लगाकर उनकी मारक क्षमता को लगभग दोगुना कर दिया है. इस नई तकनीक से मौजूदा तोपों की रेंज बहुत बढ़ जाती है, बिना किसी नई तोप या महंगे मिसाइल सिस्टम की जरूरत के.

रैमजेट क्या है और कैसे काम करता है?

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रैमजेट एक तरह का जेट इंजन है जो हवा की तेज गति से ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है. सामान्य तोप के गोला छूटने के बाद उसकी रफ्तार धीरे-धीरे कम हो जाती है. लेकिन इस नए डिजाइन में गोले के पीछे रैमजेट इंजन लगा दिया गया है. गोला तोप से निकलते ही रैमजेट चालू हो जाता है. गोले को लगातार आगे धकेलता रहता है. इससे गोला ज्यादा दूर तक जाता है. ज्यादा गहराई तक हमला कर सकता है.

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रेंज में कितना सुधार हुआ?

विभिन्न तोपों पर परीक्षण के नतीजे बहुत शानदार रहे हैं...

  • ATAGS: पहले 40 किमी → अब लगभग 70 किमी
  • वज्र (के9 थंडर): पहले 36 किमी → अब लगभग 62 किमी
  • धनुष: पहले 30 किमी → अब लगभग 55 किमी

यह सुधार गोली की मारक क्षमता (lethality) को बिल्कुल कम किए बिना हुआ है.

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परियोजना का नेतृत्व और सहयोग

यह प्रोजेक्ट 2020 में शुरू हुआ था. इसका नेतृत्व प्रोफेसर पी. ए. रामकृष्णा ने किया. टीम में शामिल थे... लेफ्टिनेंट जनरल पी. आर. शंकर (सेवानिवृत्त), प्रोफेसर एच.एस.एन. मूर्ति, प्रोफेसर जी. राजेश, प्रोफेसर एम. रामकृष्णा, प्रोफेसर मुरुगैयन, लेफ्टिनेंट जनरल हरि मोहन अय्यर (सेवानिवृत्त), प्रोफेसर लाजर सी और डॉ. योगेश कुमार वेलारी.

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भारतीय सेना के साथ मिलकर इसकी गहन जांच की गई. देवलाली और पोखरण में तोप और फील्ड ट्रायल हुए. परीक्षण में गोले तोप से साफ निकले, उड़ान स्थिर रही और रैमजेट इंजन ठीक से चालू हुआ.

क्यों है यह खास उपलब्धि?

  • मौजूदा तोपों में ही बदलाव – नई महंगी तोप या मिसाइल की जरूरत नहीं.
  • लागत कम, प्रभाव ज्यादा.
  • दुश्मन पर गहरा और तेज हमला करने की क्षमता.
  • आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) का बेहतरीन उदाहरण.
  • आधुनिक युद्ध में जीवित रहने वाली और भविष्य के लिए तैयार फायरपावर.

यह तकनीक भारतीय सेना को मजबूत बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगी. अब भारतीय तोपखाने की मारक क्षमता दुनिया के सबसे अच्छे स्तर पर पहुंच गई है, बिना बहुत ज्यादा खर्च के. आईआईटी मद्रास और भारतीय सेना के इस सहयोग से रक्षा क्षेत्र में नई उम्मीद जगी है.

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