गलवान संघर्ष से कैलाश मानसरोवर यात्रा तक, भारत की कूटनीतिक जीत

गलवान संघर्ष के बाद पांच साल बंद रही कैलाश मानसरोवर यात्रा जून 2026 से फिर शुरू हो रही है. भारत और चीन के बीच सीमा तनाव कम होने के बाद दोनों देशों ने यह फैसला लिया है. यात्रा लिपुलेख और नाथू ला दर्रे से होगी. विशेषज्ञ इसे भारत की कूटनीतिक जीत मान रहे हैं. हालांकि LAC पर कुछ मुद्दे अब भी बाकी हैं.

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इस साल जून में कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हो रही है. (Photo: ITG) इस साल जून में कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हो रही है. (Photo: ITG)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. जून 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच संबंध काफी खराब हो गए थे. लेकिन अब स्थिति बदल रही है. भारत सरकार ने जून से अगस्त 2026 के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने की घोषणा कर दी है. यह यात्रा 5 साल बाद हो पिछले साल हुई थी. अब फिर हो रही है. जिसे कई लोग भारत की कूटनीतिक जीत के रूप में देख रहे हैं.

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कोविड-19 महामारी और गलवान संघर्ष के कारण 2020 से 2025 तक कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद रही. अब यह यात्रा दो रास्तों से होगी - उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला दर्रे से. इस साल कुल 20 बैच होंगे, हर बैच में 50 यात्री जाएंगे. 

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यात्रा के लिए आवेदन वेबसाइट kmy.gov.in पर खुले हैं. यात्री कंप्यूटर द्वारा रैंडम और लिंग-संतुलित तरीके से चुने जाएंगे. यात्रा का फिर से शुरू होना दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और कूटनीतिक प्रगति का संकेत है.

गलवान से लेकर अब तक का सफर

जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. इसके बाद पूर्वी लद्दाख में दोनों तरफ बड़ी संख्या में सैनिक और हथियार तैनात कर दिए गए थे. 

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2024 और 2025 में दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई. अक्टूबर 2024 में डेपसांग मैदान और डेमचोक क्षेत्र में समझौता हुआ, जिसके बाद इन इलाकों में गश्त फिर से शुरू हो गई. 

अगस्त 2025 में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधि (SR) स्तर की 24वीं बैठक हुई. इसमें दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने और बाकी मुद्दों को सुलझाने पर सहमति जताई.

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क्या हुआ समझौता?

बैठक में दोनों देशों ने तय किया कि... 

  • सीमा मामलों पर विशेषज्ञ समूह बनाया जाएगा.
  • सीमा प्रबंधन के लिए वर्किंग ग्रुप बनेगा.
  • पश्चिमी क्षेत्र के अलावा पूर्वी और मध्य क्षेत्र में भी जनरल लेवल मैकेनिज्म बनाया जाएगा.
  • सीमा पर डी-एस्केलेशन (तनाव कम करने) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

इसके बाद दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें बहाल हो गई हैं. पर्यटकों, व्यापारियों तथा मीडिया के लिए वीजा आसान किए गए हैं.

डेपसांग और डेमचोक में गश्त शुरू हो गई है, लेकिन कुछ जगहों पर अब भी समस्या बाकी है. इनमें पांगोंग त्सो झील के उत्तर और दक्षिण किनारे, गोगरा हॉट स्प्रिंग्स के PP-15 और PP-17A तथा गलवान क्षेत्र शामिल हैं. इन इलाकों में अभी भी गश्त पर रोक (मोरेटोरियम) है. ये क्षेत्र दोनों देशों के बीच बफर जोन बने हुए हैं.

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दोनों देशों के बीच कोर कमांडर स्तर की अब तक 23 दौर की बातचीत हो चुकी है. अक्टूबर 2025 में 23वीं बैठक हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने पर संतोष जताया.

भारत की कूटनीतिक सफलता

विशेषज्ञों का मानना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का फिर से शुरू होना भारत की कूटनीतिक जीत है. गलवान संघर्ष के बाद चीन के साथ संबंध खराब होने के बावजूद भारत ने धैर्यपूर्वक बातचीत जारी रखी. अब स्थिति में सुधार हो रहा है- सैनिक पीछे हट रहे हैं. गश्त शुरू हो रही है. यात्रा बहाल हो रही है. लोगों का आवागमन आसान हो रहा है. हालांकि सीमा के सभी मुद्दे पूरी तरह सुलझे नहीं हैं, लेकिन समग्र रूप से सकारात्मक दिशा में प्रगति हो रही है.

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गलवान विवाद से शुरू हुई तनाव की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य होने की ओर बढ़ रही है. कैलाश मानसरोवर यात्रा का पुनः आरंभ भारत और चीन के बीच बढ़ते कूटनीतिक विश्वास का प्रतीक है.  दोनों देशों के बीच अभी भी कुछ संवेदनशील मुद्दे बाकी हैं, जिन्हें भविष्य की बातचीत से सुलझाया जाना है. फिलहाल शांति और स्थिरता बनाए रखने पर दोनों पक्ष सहमत दिख रहे हैं.

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