उर्वरक फैक्ट्री की आड़ में तबाही का सामान बना रहा है नॉर्थ कोरिया!

नॉर्थ कोरिया के पास दुनिया का कामयाब न्यूक्लियर प्रोग्राम है. उसके पास बैलिस्टिक मिसाइले हैं. और बहुत सारा न्यूक्लियर आर्सेनल उसने इकट्ठा कर रखा है. उस पर सितम ये है कि नॉर्थ कोरिया के शासक किम जोंग उन पर दुनिया के दबाव का कोई फर्क ही नहीं पड़ता.

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कुछ साल पहले भी किम अचानक कहीं गायब हो गए थे कुछ साल पहले भी किम अचानक कहीं गायब हो गए थे

aajtak.in / परवेज़ सागर

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:31 PM IST

  • कई बार परमाणु बमों का परीक्षण कर चुके हैं किम
  • पहले एक बार अज्ञातवास में चले गए थे मार्शल

उत्तर कोरिया के मार्शल किम जोंग उन अपनी गुमशुदगी पर बने सस्पेंस खत्म करते हुए. 20 दिन बाद दुनिया के सामने तो आ गए हैं. मगर क्या तबाही के नए फॉर्मूले की खोज के लिए मार्शल अंतर्ध्यान हुए थे. क्योंकि उनके लौटते ही कोरियाई बॉर्डर पर तनाव बढ़ गया है और दोनों देशों की सीमा पर फायरिंग की खबरें लगातार आ रही हैं, जो एक बड़े संकट का संकेत दे रही है.

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नॉर्थ कोरिया की तरफ से फायरिंग

उत्तर कोरिया के मार्शल 20 दिनों तक कहां थे. क्या कर रहे थे. ये तो किसी को नहीं पता. मगर दुनिया के सामने उनके आते ही दक्षिण कोरिया से लगते उनके बॉर्डर पर महज़ 24 घंटे के अंदर ही गोलीबारी शुरु हो गई. पिछले 3 सालों से हालात सामान्य बने हुए थे. मगर किम के अंतर्ध्यान से लौटते ही ना जाने ऐसा क्या हुआ कि उत्तर कोरिया की तरफ से सरहद पर गोलियां चलने लगीं. किम के सैनिकों ने सरहद पर बने गार्ड पोस्ट पर फायरिंग की. जिसका जवाब साउथ कोरिया को भी देना पड़ा. हालांकि अभी तक किसी तरह के नुकसान की तो खबर नहीं है. मगर जानकार मान रहे हैं कि साउथ कोरिया को नॉर्थ कोरिया की सेना से अलर्ड मोड पर रहने की ज़रूरत है क्योंकि 3 साल बाद अचानक हुई ये फायरिंग किसी रणनीति का हिस्सा हो सकती है.

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क्या है किम का सीक्रेट मिशन

उत्तर और दक्षिण कोरिया की 115 किलोमीटर लंबी सीमा पर 1953 में ये डीमिलिट्राइज़्ड ज़ोन बनाया गया था. लेकिन अपने नाम से उलट ये सबसे ज्यादा सैनिकों और हथियारों से लैस सीमा है. एक अनुमान के मुताबिक इसके अंदर और नज़दीक करीब 20 लाख माइन्स बिछी हैं. सीमा को कटीले तारों से घेरा गया है. ट्रैंक और लड़ाकू सैनिक सुरक्षा में दोनों ही तरफ तैनात रहते हैं. यहां ये एक कॉरिडोर भी है जहां तनाव के हालात में दोनों देशों के आर्मी अफसर मीटिंग करते हैं. इससे पहले 2017 में जब उत्तर कोरिया के एक सैनिक ने जीप से कूदकर दक्षिण कोरियाई सीमा में जाने की कोशिश की थी. तब भी उत्तर कोरियाई सेना ने अपने साथी पर गोलियां चलाईं थी.

फर्टिलाइजर फैक्ट्री का उद्घघाटन

मार्शल किम जोंग उन की वापसी के 24 घंटे के अंदर हुई इस फायरिंग के बाद सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या किसी बड़े मिशन की तैयारी के लिए मार्शल अंडर ग्राउंड हुए थे. और क्या किम का ये सीक्रेट मिशन कोई बड़ी तबाही ला सकता है? आपको बता दें कि बीस दिन तक दुनिया को छकाने के बाद मार्शल किम जोंग एक मई को सुनचियान में फर्टिलाइजर फैक्ट्री का उद्घघाटन करते हुए नज़र आए थे. हालांकि इसे फर्टिलाइजर फैक्ट्री कहा जा रहा है. लेकिन अमेरिका और दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसियों की मानें तो इस फैक्ट्री की असलीयत कुछ और है. इस फैक्ट्री में दरअसल खाद के नाम पर तबाही का सामान तैयार हो रहा है. और इसीलिए किम जोंग उन के लिए ये फैक्ट्री बेहद अहम है.

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फर्टिलाइजर फैक्ट्री में यूरेनियम निकालने का काम

20 दिन बाद अचानक किम का सामने आना. बॉर्डर पर गोलियां चलना और इस फैक्ट्री का उद्घाटन करना. उत्तर कोरिया की गतिविधी को शक के दायरे में ला रहा है. न्यूज वीक की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये फैक्ट्री दरअसल यू‍रेनियम निकालने का कारखाना है. जिसमें फॉस्फोरिक एसिड से यूरेनियम निकालने का काम होता है और उसी यूरेनियम का इस्तेमाल मार्शल किम अब परमाणु बम बनाने में करने वाले हैं. जानकारों के मुताबिक परमाणु बम बनाने के लिए यूरेनियम सबसे जरूरी है. मगर चूंकि हर देश में यूरेनियम इतनी मात्रा में नहीं है. इसलिए दुनिया की नज़र इस पर गड़ी होती है कि कौन सा देश कितना यूरेनियम का इस्तेमाल कर रहा है.

फॉस्फोरिक एसिड का दोहन

विशेषज्ञों के मुताबिक कई देश खाद फैक्ट्रियों में फॉस्फोरिक एसिड से चोरी-छुपे यूरेनियम निकालने की कोशिश करते रहे हैं. उसी को देखते हुए अब उत्तर कोरिया भी वही करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि उत्तर कोरिया पहले से ही परमाणु बमों का जखीरा रखे हुए है. मगर बमों की होड़ के चलते वो और ज्यादा बम बनाने की कोशिश में लगा रहता है. जिसके लिए उसे हमेशा यूरेनियम की जरूरत पड़ती है. अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से सीधे तौर पर वह यूरेनियम हासिल कर नहीं सकता. लिहाज़ा यूरेनियम हासिल करने का उसने दूसरा तरीका ढूंढ निकाला है और वो है ये फैक्ट्री.

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उर्वरक के नाम पर मौता का सामान

खाद यानी उर्वरक के साथ यूरेनियम बनाने में सक्षम होने की वजह से ही यह फैक्ट्री किम जोंग उन के लिए बेहद खास है. इतना खास कि बीस दिन का अपना अज्ञातवास खत्म करने के लिए किम ने इसी फैक्ट्री को चुना और इसके उद्धघाटन पर बीस दिन बाद पहली बार सामने आया. इस फैक्ट्री से उत्तर कोरिया जहां उर्वरक हासिल कर सकेगा वहीं इसी फैक्ट्री में तैयार यूरेनियम से वह परमाणु बम भी बना सकेगा.

कई परमाणु बम बना सकता है किम

विशषज्ञों के मुताबिक खाद बनाने के नाम पर इस तरह किम दुनिया को इस फैक्ट्री की असलीयत को लेकर आसानी से बेवफूक बना सकता है. उत्तर कोरिया के पास फिलहाल बीस से भी ज्यादा परमाणु बम हैं. वो जब-तब परमाणु बमों का परीक्षण कर दुनिया को चौंकाता रहता है. कहते हैं कि किम के पास अभी भी यूरेनियम का इतना जखीरा है कि वो आने वाले वक्त में आसानी से कई और परमाणु बम बना सकता है.

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