यूपी के चंदौली और आस-पास इलाकों में 24 घंटे के अंदर एक-एक कर एक जैसे तीन कत्ल होते हैं. दो कत्ल चलती ट्रेन में होते हैं और एक अस्पताल के बिस्तर पर. तीनों ही मामलों में एक बात समान थी कि कातिल ने तीनों को बिल्कुल करीब से सिर में गोली मारी थी. लेकिन तीनों ही मामलों में मरने वालों की कातिल से कोई दुश्मनी नहीं थी. ऐसे में ये सवाल उठ रहा था कि आखिर कातिल ने ये कत्ल क्यों किए? ये कहानी है एक ऐसे साइको सीरियल किलर की, जिसने 24 घंटे के लिए खुद को आम लोगों से अलग समझ लिया था.
वो जिधर भी जाता, किसी ना किसी की लाश बिछ जाती. 24 घंटे में वो तीन अलग-अलग जगहों पर गया और तीनों ही जगह पर उसने एक-एक कर तीन लोगों की जिंदगी छीन ली. इनमें दो रेलवे मुसाफिर थे, जबकि तीसरी एक अस्पताल में भर्ती मरीज. लेकिन इन तीनों ख़ौफ़नाक कत्ल के मामले में तीन बातें ऐसी थीं, जो बिल्कुल कॉमन थी. पहली तो ये कि उसका शिकार बनने वाले तीनों के तीनों लोग बिल्कुल बेकसूर थे. दूसरी ये कि मरने वालों का अपने क़ातिल से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था. और तीसरी ये कि कातिल ने तीनों को बिल्कुल करीब से उनकी कनपट्टी में पिस्टल सटा कर गोली मारी थी.
बनारस से लेकर चंदौली और चंदौली से लेकर दीन दयाल उपाध्याय नगर के बाशिंदे पूरे 24 घंटे तक इस खौफनाक साइको किलर के घात से लहूलुहान होते रहे. डरते-कांपते रहे. लेकिन जब साइको किलर का चेहरा बेनक़ाब हुआ और पुलिस ने उसकी बातें सुनीं, तो उसने कुछ ऐसा कहा जिसे सुन कर वर्दीवालों ने भी माथा पकड़ लिया. आखिर तुम लोगों की जान क्यों ले रहे थे? इस सीधे से सवाल पर उसका जवाब था-
'मैं मन का राजा हूं और जो मेरे मन में आता है, मैं वही करता हूं. मैं दो-तीन को मार कर यहां आया हूं.'
ऐसा जवाब कोई साइको किलर ही दे सकता था. लिहाज़ा उसके शिकंजे में आने के साथ ही पुलिस ने उसका आगा-पीछा पता करना शुरू कर दिया और इसी कोशिश में जो सच सामने आया वो चौंकाने वाला था. आखिर कौन था ये साइको किलर? क्यों ले रहा था वो एक-एक बेगुनाहों की जान? और सबसे अजीब ये तीन-तीन क़त्ल करने के बाद वो खुद को राजा क्यों बता रहा था? तो आज वारदात में हाल के दिनों के इस सबसे अजीब साइको किलर की पूरी जनमकुंडली आपको डिटेल में बताएंगे. तो आइए इस सिलसिले की शुरुआत बिल्कुल शुरू से करते हैं, जब इस साइको किलर ने बिल्कुल पहला वार किया था.
रविवार, 10 मई 2026, सुबह 7 बजे, चंदौली
गाजीपुर का रहने वाला 34 साल का मंगरू काम के सिलसिले में कर्नाटक गया था. इस दिन वो कर्नाटक से वापस लौट रहा था. वो पहले एक सुपरफास्ट ट्रेन से डीडीयू जंक्शन पहुंचा और वहां से सुबह साढ़े 6 बजे की पैसेंजर ट्रेन से घर के लिए रवाना हुआ. लेकिन डीडीयू-ताड़ीघाट पैसेंजर अभी थोड़ी ही दूर बढ़ी थी कि मंगरू के सिर पर किसी ने प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मार दी. कातिल यहीं नहीं रुका, उसने गोली मारने के बाद सीधे उसकी लाश को घसीट कर ट्रेन से नीचे रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया. उधर, जब तक गोली की आवाज सुन कर दूसरे मुसाफिर उधर पहुंचते, मंगरू को निशाना बनाने वाला शख्स फरार हो चुका था.
सोमवार, 11 मई 2026, रात 2 बजे, बनारस
19 घंटे बीतते-बीतते ठीक बनारस में भी ऐसी ही एक और वारदात हुई. इस बार भी गोली चलती ट्रेन में चली. बिहार के रहने वाले 42 साल के दिनेश साव अपने परिवार के साथ कोलकाता जम्मू तवी एक्सप्रेस से सीदापुर के नैमिषारण्य धाम जा रहे थे, लेकिन रात करीब 2 बजे जैसे ही वो टॉयलेट से बाहर निकले दरवाजे पर मौत उनका इंतजार कर रही थी. कातिल ने उन्हें ठीक मंगरू की तरह ही बिल्कुल सटा कर सिर में गोली मार दी. और इससे पहले कि ट्रेन के दूसरे मुसाफिर रिएक्ट कर पाते, साहू को निशाना बनाने वाला शख्स ट्रेन की धीमी रफ्तार का फायदा उठा कर ट्रेन से उतर कर अंधेरे में गुम हो चुका था.
बैक टू बैक चलती ट्रेन में एक जैसी दो वारदातों से रेलवे पुलिस के साथ-साथ अब शासन-प्रशासन के हाथ-पांव फूल चुके थे. अब तक पुलिस की कई टीमें एक साथ इस सिरफिरे कातिल का पीछा कर रही थी, लेकिन उस कातिल के बारे में किसी को कुछ पता होता, तब ना पुलिस उसे पकड़ती. यहां तो दो-दो कत्ल को अंजाम देने के बाद वो कुछ ऐसे गायब हो चुका था, जैसे वो इंसान ना होकर कोई और ही शय हो.
सोमवार, 11 मई 2026, सुबह 8 बजे, चंदौली
अभी पुलिस सिरफिरे कातिल तक पहुंच पाती, तब तक बनारस से करीब 2 किलोमीटर दूर सुबह सवेरे चंदौली के एक प्राइवेट अस्पताल में एक ऐसी वारदात हुई, जिसने हर किसी को दहला दिया. जहां एक शख्स पहले अस्पताल में पहुंचा. खुद को बीमार बता कर अपना बीपी और पल्स चेक करवाया और फिर वार्ड में पहुंच कर पहले पागलों जैसी हरकतें करने लगा और फिर बिस्तर लेटी एक मरीज लक्ष्मीना देवी को बिल्कुल प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी और अस्पताल से निकल भागा. 55 साल की लक्ष्मीना बिहार की रहने वाली थी और टांग टूट जाने की वजह से पिछले महीने भर से इसी जीवक अस्पताल में अपना इलाज करवा रही थी. लेकिन इससे पहले कि ठीक होकर वो अपने कदमों पर दोबारा चल पाती, एक अनजान सिरफिरे ने उन्हें बिल्कुल बेवजह अपनी गोली का शिकार बना डाला.
अब अस्पताल में शूटआउट और कत्ल होते ही सिर्फ अस्पताल ही नहीं बल्कि पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई. खतरा भांप कर गोली चलाने वाला सिरफिरा अस्पताल से निकल कर भागने लगा, लेकिन यहां किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और एक ऑटो ड्राइवर ने पीछा कर ना सिर्फ उसे दबोच लिया, बल्कि उससे उसकी पिस्टल भी छीन ली. और कुछ इस तरह पहली बार यूपी पुलिस को इस साइको किलर का चेहरा देखना नसीब हुआ. वैसे ये सवाल अब भी अपनी जगह पर था कि क्या अस्पताल में गोली चलाने वाला ये शख्स ही ट्रेन में मुसाफिरों को निशाना बनाने वाला कातिल है? या फिर कत्ल की उन वारदातों में किसी और का हाथ है?
हालांकि, अब तक इन तीनों ही कत्ल में तीन कॉमन बातें सामने आ चुकी थीं. इनमें एक थी कि मरने वाले तीनों लोग बेकसूर थे, तीनों का कातिल से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं था और तीनों को क़ातिलों ने बिल्कुल एक तरह से प्वाइंट ब्लैंक रेंज से शूट किया. पुलिस ने इन्हीं बातों को ध्यान में रख कर जब पकड़े गए शख्स से पूछताछ की, तो उसने जो कुछ कहा, उससे काफी हद कर पुलिस को यकीन हो गया कि पिछले 24 घंटे में एक-एक कर हुए तीनों कत्ल के केस अब सुलझने के कगार पर हैं, क्योंकि चंदौली में पकड़ा गया ये शख्स ही असल में वो सीरियल साइको किलर है, जिसने चंद घंटों में तीन-तीन बेगुनाहों की जान ली है.
जाहिर है वो अपनी जुबान से अपना सच कबूल रहा था, लेकिन उसकी कही गई बातों को वैरिफाई करना अभी बाकी थी. लिहाजा, चंदौली पुलिस ने उससे हिरासत में लंबी पूछताछ की और एक-एक कर तीनों ही वारदातों का सच जानना चाहा. उसने तीनों ही वारदातों को ना सिर्फ हु ब हू वही ब्यौरा दिया, जो हुआ था, बल्कि ये भी बताया कि अक्सर शराब पी लेने के बाद वो अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाता था और लोगों से उलझ पड़ता था. लेकिन पिछले करीब 24 घंटों में वो लोगों को अपनी गोलियों का निशाना बना रहा था और ऐसा करने में उसे मजा आ रहा था. तफ्तीश में इस साइको किलर की पहचान पंजाब के रहने वाले 45 साल के गुरप्रीत के तौर पर हुई, जो पंजाब का रहने वाला था और सेना से रिटायर था. हालांकि शराबखोरी की लत उसे अब घर से दूर कर चुकी थी.
ये तो रही उस साइको किलर की पहचान और उसके दिमागी फितूर की कहानी. मगर इस खूनी कहानी का क्लाइमेक्स अभी बाकी था. चंदौली पुलिस सोमवार की देर रात को ही उसे लेकर क्राइम सीन रिक्रिएट करने दरियापुर रेलवे लाइन के पास गई थी. लेकिन वहां वही हो गया जो अक्सर यूपी पुलिस के साथ होता है. वहां उस साइको किलर ने भी पुलिस का अस्लहा छीन कर पुलिस टीम पर गोली चलाने की कोशिश की और आखिरकार वो खुद पुलिस की गोलियों का शिकार बन कर मारा गया.
सुप्रतिम बनर्जी / उदय गुप्ता