दिल्ली की भीड़भाड़ भरी सड़कों के बीच एक खामोश साजिश धीरे-धीरे पनप रही थी. किसी को अंदाजा नहीं था कि आम दिखने वाले लोग देश की सुरक्षा के साथ इतना बड़ा खेल खेल रहे हैं. अचानक दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल हरकत में आई और एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे सुरक्षा तंत्र को हिला दिया. यह सिर्फ जासूसी नहीं थी, बल्कि एक बड़े आतंकी हमले की साजिश भी साथ-साथ बुनी जा रही थी. जैसे ही ऑपरेशन शुरू हुआ, कई राज्यों में एक साथ रेड डाली गई. तो पता चला कि दुश्मन फिर से गहरी तैयारी कर रहा था.
जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से संचालित हो रहा था. देश के अलग-अलग हिस्सों से 10 से 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो इस मॉड्यूल का हिस्सा थे. ये लोग आम नागरिकों की तरह रहकर खुफिया गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे. पुलिस के मुताबिक, इनकी भूमिका सिर्फ जानकारी इकट्ठा करना नहीं बल्कि आतंकी हमले की तैयारी भी थी. जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ी, हर परत के साथ इस नेटवर्क की गहराई और खतरनाक मंशा सामने आती गई.
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि गिरफ्तार आरोपियों ने 9 संवेदनशील लोकेशनों पर CCTV कैमरे लगाए थे. ये कैमरे आम निगरानी के लिए नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारियां जुटाने के लिए लगाए गए थे. इन कैमरों से मिलने वाला लाइव फीड सीधे पाकिस्तान में बैठे ISI ऑपरेटिव्स तक पहुंच रही थी. यानी भारत की जमीन पर बैठकर दुश्मन को हर मूवमेंट की जानकारी दी जा रही थी. सेना से जुड़े ठिकानों और डिफेंस प्रतिष्ठानों पर नजर रखने की जिम्मेदारी इन्हीं लोगों को सौंपी गई थी.
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि यह मॉड्यूल सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं था. दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी. आरोपी पाकिस्तान से हथियार मंगाने की तैयारी में थे और कुछ हथियार बरामद भी किए गए हैं. यह साफ हो गया कि उनका मकसद सिर्फ जानकारी जुटाना नहीं बल्कि उसे इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर हमला करना था. पुलिस को शक है कि अगर समय रहते यह नेटवर्क नहीं पकड़ा जाता, तो देश एक बड़ी त्रासदी का गवाह बन सकता था.
जांच में यह भी सामने आया कि इस खतरनाक मॉड्यूल के तार सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं थे, बल्कि पंजाब तक फैले हुए थे. पुलिस ने दिल्ली और पंजाब से कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो इस नेटवर्क को सक्रिय रूप से चला रहे थे. छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से सोलर पावर से चलने वाले CCTV कैमरे बरामद हुए, जिन्हें दूर-दराज और संवेदनशील इलाकों में बिना शक पैदा किए लगाया गया था. इसके अलावा विदेशी और देशी पिस्टल, जिंदा कारतूस और कई संदिग्ध सिम कार्ड भी जब्त किए गए हैं. ये बरामदगी साफ इशारा करती है कि मॉड्यूल पूरी तरह संगठित और तकनीकी रूप से मजबूत था. पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इन हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल कब और कैसे किया जाना था.
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है. लगातार रेड जारी हैं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस मॉड्यूल के तार और किन-किन जगहों तक फैले हुए हैं. इस खुलासे ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दुश्मन हर मोर्चे पर सक्रिय है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां भी पूरी तरह सतर्क हैं. फिलहाल, इस बड़ी साजिश के नाकाम होने से देश ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है.
अरविंद ओझा