पिछले तीन महीने से वेतन का इंतजार कर रहे नॉर्थ MCD में कोरोना वॉरियर्स

नॉर्थ एमसीडी में 10 हजार से अधिक कर्मचारियों को पिछले तीन महीनों से उनका वेतन नहीं मिला है. इसमें फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स जैसे डॉक्टर नर्स और शिक्षक शामिल हैं.

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कोरोना योद्धा को नहीं मिल रही सैलरी (फाइल फोटो) कोरोना योद्धा को नहीं मिल रही सैलरी (फाइल फोटो)

अंकित यादव

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2020,
  • अपडेटेड 11:43 AM IST

  • नॉर्थ एमसीडी में 10,000 से अधिक कर्मचारियों को नहीं मिला है वेतन
  • नगर निगम में शिक्षक संघ के अध्यक्ष बोले- शर्मिंदगी महसूस हो रही

दिल्ली में कोरोना संक्रमण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इस कठिन समय में भी कई कर्मचारी लगातार काम कर रहे हैं. ये कोरोना योद्धा अपने वेतन का तीन महीने से इंतजार कर रहे हैं. दरअसल, नॉर्थ एमसीडी में 10,000 से अधिक कर्मचारियों को पिछले 2-3 महीनों से उनका वेतन नहीं मिला है. इसमें फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स जैसे- डॉक्टर, नर्स और शिक्षक शामिल हैं.

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उत्तरी दिल्ली नगर निगम में शिक्षक संघ के अध्यक्ष कुलदीप सिंह का कहना है, 'मुझे यह कहते हुए बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही है कि मेरे जैसे 8000 एमसीडी शिक्षकों को अब अपने घर के खर्चों का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है. एक तरफ हमें कोरोना वॉरियर्स कहा जाता है, दूसरी तरफ हमें अपने घर के दैनिक खर्चों को दोस्तों से उधार पैसे मांगने पड़ते हैं.

हड़ताल पर जाने की दी थी चेतावनी

बता दें कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के शिक्षक संघ ने बुधवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी लेकिन बाद में उन्होंने हड़ताल वापस ले ली. कुलदीप सिंह कहते हैं, हम कोरोना के कठिन समय में अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटना चाहते हैं, लेकिन अब हमारे पास और क्या बचा है, एक तरफ हमें पिछले 3 महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है और दूसरी तरफ हम लगातार कठिनाई में काम कर रहे हैं, क्योंकि हम राशन वितरण में लगे हुए हैं, लेकिन हमें पीपीई किट और मास्क जैसी चीजें नहीं दी गई हैं, क्या एमसीडी शिक्षक के जीवन का कोई मूल्य नहीं है.

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यही नहीं, उत्तरी दिल्ली नगर निगम के दो हजार से अधिक डॉक्टर और नर्स वर्तमान में कोरोना संक्रमण को रोकने में अपना योगदान दे रहे हैं, जिनमें से कई को ड्यूटी क्वारनटीन केंद्र और कई को अस्पतालों में ड्यूटी पर रखा गया है. एमसीडी डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ आरआर गौतम का कहना है कि नॉर्थ एमसीडी के बाड़ा हिंदू राव अस्पताल में पिछले तीन महीने से वेतन नहीं मिला है.

'जीवन सिर्फ सम्मान से नहीं चलता'

गौतम कहते हैं, जीवन में सम्मान महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवन खाली सम्मान के साथ नहीं चलता है. जरूरतें हैं, सभी को कोरोना वॉरियर की तरह एक खिताब दिया गया है. अच्छा होता अगर कोरोना योद्धा को समय पर वेतन मिलता. आगे कहते हैं कि हम बहुत परेशान हैं. कई वर्षों से एरियर नहीं मिला है. हमें नहीं पता कि वेतन कहां से मिलेगा. हम सभी जानते हैं कि हमने काम किया है, हमें समय पर वेतन चाहिए.

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