भारत को अब सोचना पड़ेगा? ट्रंप के बयान से तुरंत ये 5 बड़े असर, 9 लाख करोड़ रुपये उड़े

Trump Economic Impact: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध पिछले एक महीने से चल रहा है. आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, खासकर उन देशों के लिए जो ईंधन के लिए पूरी तरह से मिडिल-ईस्ट पर निर्भर है. भारत के लिए भी आर्थिक तौर पर चिंता का विषय है.

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ट्रंप का बयान भारत के लिए आर्थिक तौर पर नुकसानदेह. (Photo: ITG) ट्रंप का बयान भारत के लिए आर्थिक तौर पर नुकसानदेह. (Photo: ITG)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 02 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:42 AM IST

एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपने भाषणों से दुनिया को कंफ्यूज कर गए. उनके बयानों से ये भी लगा कि वो खुद कंफ्यूज हैं. दरअसल, ईरान से युद्ध को लेकर ट्रंप अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं. एक तरह से उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में अमेरिकी नागरिकों का भरोसा जीतने के लिए, ऐसी बातें कर रहे थे, जिसमें उनकी लाचारी भी झलक रही थी.

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लेकिन तमाम एक्सपर्ट्स मान रहे थे, कि ट्रंप युद्ध को लेकर कोई बड़ा ऐलान करेंगे, या तो युद्ध समाप्ति की घोषणा करेंगे, या फिर युद्ध को अंजाम तक पहुंचाने के लिए हमले तेज करने के फैसले लेंगे. लेकिन ट्रंप ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया. युद्ध शुरू हुए एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है और आर्थिक तौर स्थिति बदतर होती जा रही है. दुनियाभर में धीरे-धीरे तेल और गैस की दिक्कतें बढ़ रही हैं. जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा मंडराने लगा है. 

दरअसल, पिछले दो दिनों में युद्ध को लेकर जो अच्छी खबरें आई थीं. जिससे आर्थिक तौर पर सेंटीमेंट में सुधार देखने को मिल रहे थे, वो ट्रंप के संबोधन से झटके में निगेटिव हो गया. पूरी दुनिया की मार्केट फिर से गिरावट की ओर बढ़ने लगी. जबकि ट्रंप के बयान से पहले चारों तरफ हरियाली दिख रही थी. 

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ट्रंप के बयान से भारत पर ये 5 असर...

1. भारतीय शेयर बाजार में भूचाल: अगर भारत के लिहाज से देखें तो ट्रंप के भाषण के चंद मिनट बाद भारतीय बाजार भर-भराकर टूट गया. बुधवार को जितनी तेजी आई थी, उससे बड़ी गिरावट गुरुवार को देखी जा रही है. झटके में निफ्टी 500 अंकों से ज्यादा गिर गई, सेंसेक्स 1500 अंक फिसल चुका है. ट्रंप के बयान से ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता का माहौल हो गया है. गुरुवार को शुरुआती ट्रेडिंग में ही 9 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं.

2. कच्चे तेल की कीमतों उछाल: मिडिल-ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल रही है. मंगलवार और बुधवार को थोड़ी नरमी देखी गई थी, क्योंकि मिडिल-ईस्ट में हालात सुधरने के संकेत मिल रहे थे, लेकिन ट्रंप के बयान ने सबकुछ पलट दिया है. बुधवार को कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया था. जो अब एक बार फिर 106 डॉलर से ऊपर पहुंच गया है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भारत के लिए खतरे का संकेत है. क्योंकि भारत को महंगे भाव पर कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है. 

3. सोने-चांदी में भी बड़ी गिरावट: सोने-चांदी को संकट का सहारा कहा जाता है, लेकिन मौजूदा हालात में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी जा रही है. ट्रंप के बयान के बाद MCX पर गोल्ड करीब 2 फीसदी टूट गया, जबकि चांदी में तगड़ी 5 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है. इसकी बड़ी वजह ये है कि जब कच्चे तेल का दाव बढ़ेगा, तो फिर दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है, जिससे कीमतों धातुओं के भाव तेजी से गिर रहे हैं. 

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4. भारत रुपया कमजोर: ट्रंप के बयान के बाद रुपये पर भी दबाव बढ़ता जा रहा है, जो कि देश के लिए चिंता का विषय है. पिछले दिनों रुपये में स्थिरता लाने के लिए केंद्रीय बैंक ने कदम उठाए थे. लेकिन अब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता के कारण रुपया आगे चलकर और कमजोर हो सकता है. फिलहाल एक डॉलर 93.50 रुपये के आसपास है. भारत करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है, जिसका भुगतान डॉलर करना पड़ता है, रुपया कमजोर होने से आयात कोस्ट बढ़ जाएगा, जो कि अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है. 

5.निवेश फैसलों में अनिश्चितता: ऐसे माहौल में निवेशक किसी भी देश में पैसे लगाने से बच सकते हैं. कंपनियां नए निवेश को रोक सकती हैं, जिससे कैपेक्स (Capex) धीमा पड़ सकता है. दरअसल, सैकड़ों भारतीय कंपनियां अमेरिका में काम करती हैं. जहां इस युद्ध का असर दिखने वाला है, जॉब में कटौती के संकेत मिलने लगने हैं. सैलरी हाइक पर संकट मंडराने लगा है. खासकर अगर शेयर बाजार के लिहाज से देखें तो ऐसे डर वाले माहौल की वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसे निकाल रहे हैं, केवल मार्च महीने में ही FPI से भारतीय बाजारों से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाले चुके हैं. 

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वहीं ट्रंप ने इस युद्ध को अगले 3 हफ्ते में अंजाम तक पहुंचाने का संकेत दिया है. यानी माहौल अभी और बिगड़ सकता है. भारत जैसे देशों के लिए  संकट गहराने वाला है. जिसका असर अब आर्थिक विकास दर पर भी होगा.
 

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