Fuel Price Hike Impact: पेट्रोल-डीजल ही नहीं... अब इन चीजों के भी बढ़ जाएंगे दाम, एक्‍सपर्ट्स की वॉर्निंग

पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी से सिर्फ फ्यूल की कीमतें ही नहीं बढ़ती हैं, बल्कि कई चीजों के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है. इसमें तेल-शैंपू से लेकर फल और सब्जियों तक के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है.

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पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी से बढ़ सकते हैं ये दाम. (Photo: PTI) पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी से बढ़ सकते हैं ये दाम. (Photo: PTI)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:20 PM IST

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि यह सिर्फ पेट्रोल और डीजल के दाम तक सीमित है तो आप बिल्‍कुल ही गलत सोच रहे हैं, क्‍योंकि अब ये दाम बढ़ने से बहुत सी चीजें महंगी हो सकती है. 

विशेषज्ञ और एफएमसीजी कंपनियां चेतावनी दे रही हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता और बढ़ते लॉजिस्टिक्स खर्चों के कारण डेली यूज की कई वस्तुओं की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं. जिसका असर घरेलू बजट, किराने के बिल और रोजमर्रा की सेवाओं पर दिखाई दे सकता है. 

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पैकेट फूड प्रोडक्‍ट्स 
तेजी से बिकने वाले कंज्‍यूमर प्रोडक्‍ट्स (FMCG) की बड़ी कंपनियों ने पहले ही लागत के दबाव को लेकर चिंता जताना शुरू कर दिया है. बिस्कुट, स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, खाद्य तेल, पैकेटबंद फूड प्रोडक्‍ट्स और ड्रिंक प्रोडक्‍ट्स जैसे उत्पाद लॉजिस्टिक नेटवर्क पर बहुत अधिक निर्भर करते हैं. ऑपरेशन कॉस्‍ट का 6 से 10 फीसदी हिस्सा लॉजिस्टिक्स में खर्च होता है, इसलिए डीजल की ऊंची कीमतें इनके दाम बढ़ा सकती हैं. 

दूध और मिल्‍क प्रोडक्‍ट्स
दूध की कीमतों में पहले से ही लागत बढ़ोतरी के संकेत दिख रहे हैं. अमूल और मदर डेयरी ने हाल ही में दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जिसकी एक वजह परिवहन और परिचालन खर्चों में बढ़ोतरी बताया गया है. अब दूध के दाम बढ़ने से दूध से बनने वाले प्रोडक्‍ट्स- दही, मक्खन, पनीर, चीज और आइसक्रीम के दाम में भी बढ़ोतरी हो सकती है. 

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सब्जियों, फलों और किराने के बिल
भारत की फूड आपूर्ति चेन काफी हद तक सड़क परिवहन पर निर्भर करती है. सब्ज़ियां, फल, अनाज, दालें, पैकेटबंद फूड प्रोडक्‍ट्स एक से दूसरी जगह ले जाने में लॉजिस्टिक खर्च बढ़ जाता है. ऐसे में डीजल की बढ़ती लागत से माल ढुलाई शुल्क में वृद्धि होती है, जिसे अक्सर आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से ग्राहकों पर डाल दिया जाता है. इकोनॉमिस्‍ट्स का कहना है कि अगर फ्यूल की कीमतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो रसोई के बजट पर महंगाई का दबाव पड़ सकता है. 

एग्रीकल्‍चर कॉस्‍ट में इजाफा 
किसान मुख्य रूप से डीजल से चलने वाले उपकरणों पर निर्भर रहते हैं, जिनमें ट्रैक्टर, सिंचाई पंप, कटाई मशीनरी, परिवहन वाहन आदि शामिल हैं. डीजल की बढ़ती लागत से एग्री ऑपरेशन खर्च बढ़ जाता है. समय के साथ, एग्री में लगने वाली लागत में बढोतरी परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले फूड प्रोडक्‍टस की कीमतें बढ़ सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईंधन की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो ग्रामीण परिवारों पर इसका असर और भी ज्यादा पड़ सकता है. 

ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स सर्विस
फूड डिटेल प्‍लेटफॉर्म, कूरियर कंपनियां और ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां लॉजिस्टिक नेटवर्क पर काम करती हैं. फ्यूल की बढ़ती कीमतों से आखिरी मील की डिलीवर का खर्च बढ़ जाता है. इस बढ़ोतरी में डिलीवरी शुल्क में बढ़ोतरी, छूट की कमी, मिनिमम ऑर्डर प्राइस में बढ़ोतरी और एक्‍स्‍ट्रा सर्विस टैक्‍स शामिल है. 

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घरेलू चीजों के दाम 
साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, सफाई उत्पाद समेत कई व्यक्तिगत देखभाल के सामान महंगे हो सकते हैं. एफएमसीजी कंपनियां अक्सर अचानक कीमतों में बढ़ोतरी करने के बजाय संतुलित मूल्य निर्धारण रणनीतियों का उपयोग करती हैं. ऐसे में फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी से इन चीजों के दाम में भी बढ़ोतरी हो सकती है. 

परिवहन लागत
टैक्सी का किराया, बस यात्रा की लागत, कूरियर सेवाएं, खुदरा आपूर्ति चेन, और कंज्‍यूमर चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं. 

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