पेट्रोल-डीजल फिर महंगा हुआ है. महज पांच दिन में तेल कंपनियों ने लगातार दूसरी बार Petrol-Diesel Price Hike का झटका दिया है. इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उबाल ने एक बार फिर से देश की आम जनता की जेब का बोझ बढ़ाया है. हालांकि, ईंधन की कीमतों में इजाफा इस बार कम है और इनकी कीमत करीब 90 पैसे प्रति लीटर बढ़ाई गई है और नई कीमतें मंगलवार से लागू हो गई हैं. फ्यूल प्राइस में एक के बाद एक बढ़ोतरी से 2022 वाला वो दौर लौटता दिख रहा है, जब लगभग 15 दिन रोजाना लगातार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली थी.
ये हैं पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें
सबसे पहले बात करते हैं देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई ताजा बढ़ोतरी के बारे में, तो दिल्ली से मुंबई तक ईंधन की कीमतें मंगलवार से और बढ़ गई हैं. तेल कंपनियों ने पांच दिन में महंगाई का दूसरा झटका देते हुए दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत (Delhi Petrol Price) 87 पैसे की बढ़ोतरी के साथ 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गया है, तो वहीं डीजल प्राइस अब 91 पैसे के इजाफे के साथ 91.58 रुपये प्रति लीटर हो गया है. इससे पहले 15 मई को 3 रुपये प्रति लीटर के इजाफे के साथ पेट्रोल 97.77 रुपये प्रति लीटर किया गया था.
अन्य महानगरों की बात करें, तो मुंबई में पेट्रोल की कीमत 91 पैसे बढ़कर 107.59 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गई है. इसके अलावा कोलकाता में अब पेट्रोल 96 पैसे के इजाफे के साथ 109.70 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 94 पैसे बढ़कर 96.07 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है. चेन्नई में पेट्रोल की कीमत में 82 पैसे की बढ़ोतरी की गई है और 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि यहां पर डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़कर 96.11 रुपये प्रति लीटर हो गई है.
4 साल बाद बढ़ोतरी, अब जारी सिलसिला
बता दें कि साल 2022 के बाद करीब चार साल बाद देश में मिडिल ईस्ट टेंशन और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गहराए तेल संकट के बीच पहली बार बीते सप्ताह पेट्रोल-डीजल प्राइस हाइक का झटका दिया गया था और इनमें 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. हालांकि, तमाम एक्सपर्ट्स ने अनुमान जाहिर किया था कि कच्चे तेल की कीमतों में ताबड़तोड़ इजाफे के चलते ऑयल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ये बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है और आगे भी Petrol-Diesel Price Hike देखने को मिल सकता है. अब हुआ भी ऐसा ही है और सिर्फ पांच दिन में दूसरी बार पेट्रोल-डीजल 90 पैसे प्रति लीटर महंगा कर दिया गया है.
क्या 2022 का दौर फिर से लौट रहा?
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक के बाद एक बढ़ोतरी होने से साल 2022 का दौर फिर से लौटता हुआ दिख रहा है. दरअसल, उस समय रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी थी और तेल कंपनियों को ऐसे ही भारी नुकसान हो रहा था, जैसे फिलहाल देखने को मिल रहा है.
उस समय मार्च-अप्रैल 20222 के बीच सिर्फ 15 दिनों में ही तेल कंपनियों ने थोड़ा-थोड़ा करके 13 बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाकर आम जनता को झटका दिया था. इनमें से 10 दिन रोजाना सिर्फ 80 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से ही कीमतें बढ़ाई गई थीं. बीते 15 मई को की गई 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद भी एक्सपर्ट ये कहते हुए नजर आए थे कि IOCL, BPCL, HPCL जैसे तेल कंपनियां आगे धीमे-धीमे पेट्रोल डीजल की कीमतों में और इजाफा कर सकती हैं, ताकि उन्हें होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके.
मास्टर पोर्टफोलियो सर्विसेज लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर गुरमीत सिंह चावला ने इंडिया टुडे डॉट इन को बताया था कि ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार लंबे समय तक रहने पर अगले तीन से चार महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और भी बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है.
एक झटके में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं
गौरतलब है कि पहले तेल की कीमतों को केंद्र सरकार नियंत्रित करती थी और इनमें संशोधन हर 15 दिन में देखने को मिलता था. लेकिन 2010 और 2014 में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संशोधन ओएमसी (OMCs) को सौंप दिया गया और तब से तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन के लिए स्वतंत्र हैं. हालांकि, प्राइस हाइक का इतिहास देखें, तो तेल कंपनियां कभी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक ही बार में बड़ा इजाफा करने के बजाय, थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी करती हुई ही नजर आती रही हैं.
तेल कंपनियों को कितना घाटा?
बीते दिनों आई पीटीआई की रिपोर्ट पर नजर डालें, तो कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल प्राइस स्थिर रखने से सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना 1600-1700 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था. चॉइस के ऊर्जा विश्लेषक धवल पोपट ने बीते सप्ताह पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये की बढ़ोतरी पर कहा था कि इस इजाफे से सिर्फ आंशिक राहत ही मिलती है.
पोपट ने बताया था कि प्रति लीटर 1 रुपये की बढ़ोतरी से तीनों सरकारी तेल कंपनियों के सालाना EBITDA में लगभग 15,000-16,000 करोड़ रुपये का सुधार हो सकता है. यानी सालाना करीब 45,000-48,000 करोड़ रुपये की कमाई का लाभ मिल सकता है. हालांकि, अगर ग्लोबल नजरिए में कोई बदलाव नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती रहती हैं, तो नुकसान की भरपाई के लिए कुल मिलाकर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जरूरत होगी.
बता दें मंगलवार को गिरावट के बाद भी Crude Oil Price 110 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है. ऐसे में आशंका है कि तेल कंपनियां 2022 में 80 पैसे की तरह ही इस बार नुकसान की भरपाई के लिए 90 पैसे प्राइस हाइक का फॉर्मूला अपनाए रख सकती हैं.
दीपक चतुर्वेदी