ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से शेयर बाजारों में हड़कंप मचा है. युद्ध पिछले 7 दिनों से चल रहा है, और जैसे-जैसे युद्ध खिंचता जा रहा है, बाजार में भूचाल बढ़ता जा रहा है. भारतीय निवेशकों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. महज 4 कारोबारी सत्र के दौरान निवेशकों की संपत्ति 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा साफ हो गई.
दरअसल, कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 1 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 315.45 अंक गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स करीब 1100 अंक टूटकर 79000 से नीचे बंद हुआ. शुक्रवार के दिन ही करीब 3 लाख करोड़ का मार्केट कैप स्वाहा हो गया.
बैंकिंग शेयरों में भूचाल
सबसे ज्यादा दबाव ICICI बैंक के शेयर ने बनाया, जिसमें 3.39% की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, HDFC बैंक और SBI के शेयरों में भी 2 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. बता दें, बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 27 फरवरी को बाजार बंद होने के बाद 463.25 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया है.
पिछले कुछ दिनों में फिर से विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है. जानकारों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी निवेशक अक्सर सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं, जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत में दबाव बढ़ जाता है. इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया है. शुक्रवार की शाम ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.
पिछले चार दिनों की बिकवाली में सबसे ज्यादा दबाव बड़े शेयरों यानी लार्ज-कैप स्टॉक्स पर देखने को मिला है. इससे सेंसेक्स में ज्यादा गिरावट आई. विश्लेषकों का मानना है कि बाजार में यह गिरावट करीब 2–3 प्रतिशत के करेक्शन के रूप में देखी जा सकती है. लेकिन निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है. क्योंकि ईरान-इजरायल युद्ध की वजह से बाजार करीब 8 फीसदी टूट चुका है.
52-वीक लो पर ये शेयर्स
BSE 500 इंडेक्स में शामिल ACC, अंबुजा सीमेंट, एल्काइल एमिन्स केमिकल्स, साइएंट, बर्जर पेंट्स इंडिया, कोहांस लाइफसाइंसेज, इंद्रप्रस्थ गैस, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस, बिरला कॉर्पोरेशन, जेके लक्ष्मी सीमेंट, जुबिलेंट फार्मावा, प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर और सोनाटा सॉफ्टवेयर के शेयरों ने अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर को छू लिया.
हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी बन सकती है. अगर वैश्विक हालात स्थिर होते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है, तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है. आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कुछ अहम कारकों पर रहेगी. इनमें कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेशकों का रुख और वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन शामिल है.
आजतक बिजनेस डेस्क