ममता ने रोक दिया था... लेकिन अब कौन रोकेगा? पश्चिम बंगाल में फटाफट लागू होंगी केंद्र की ये 7 योजनाएं

Election 2026 Updates: पश्चिम बंगाल में कई केंद्रीय योजनाएं राजनीतिक कारणों से सीमित रहीं. अब बीजेपी की सरकार बनाने जा रही है. जिससे केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर और व्यापक लागू होने की संभावना जताई जा रही है.

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 सत्ता बदलाव के बाद खुलेंगे केंद्रीय योजनाओं के दरवाजे. (Photo: ITG) सत्ता बदलाव के बाद खुलेंगे केंद्रीय योजनाओं के दरवाजे. (Photo: ITG)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:01 PM IST

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव की वजह से केंद्र सरकार की कई योजनाएं लागू नहीं हैं, कुछ योजनाएं लागू होने के बाद भी ममता सरकार की ओर से रोक दी गईं. लेकिन अब पश्चिम बंगाल की सत्ता पर बीजेपी काबिज होने जा रही है. ऐसे में केंद्र की वे तमाम योजनाओं अब राज्य में लागू होंगी. 

दरअसल, पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में केंद्र की योजनाओं को लागू नहीं करना भी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा रहा था. बीजेपी का आरोप रहा है कि TMC सरकार ने राजनीतिक कारणों से केंद्र की कई कल्याणकारी योजनाओं को राज्य में लागू होने से रोका या उनमें बाधा उत्पन्न की है. इस बीच चुनाव में बीजेपी ने अपने 'संकल्प पत्र' में यह स्पष्ट किया है कि सत्ता में आते ही वह इन योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर लागू करेगी. 

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आइए जानते हैं कि केंद्र की कौन-कौन सी ऐसी योजनाएं हैं, जिसे अब बीजेपी पश्चिम बंगाल में जन-जन तक पहुंचाएगी. इनमें मुख्य रूप से आयुष्मान भारत (स्वास्थ्य बीमा), पीएम आवास योजना (ग्रामीण/शहरी), पीएम फसल बीमा योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना शामिल हैं.  

बीजेपी के अनुसार इन केंद्रीय योजनाओं का लाभ राज्य की जनता को नहीं मिल पा रहा है, जिसे अब सबसे पहले लागू किया जाएगा. 

1. आयुष्मान भारत योजना: यह स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे बड़ी योजना है, जिसके माध्यम से गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. लेकिन केंद्र और ममता सरकार में तनातनी की वजह से पश्चिम बंगाल ने इस स्वास्थ्य योजना को नहीं अपनाया है, इसकी जगह राज्य सरकार 'स्वास्थ्य साथी' योजना चलाती है. बीजेपी का तर्क है कि आयुष्मान भारत योजना न होने से राज्य के गरीब सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं. इस योजना के तहत गरीब परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिल सकता है.

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2. पीएम मत्स्य संपदा योजना: मछुआरों के कल्याण और उनके रजिस्ट्रेशन में कथित असहयोग के कारण इस योजना का लाभ मछुआरा समुदाय तक नहीं पहुंच पाया है. लेकिन अब राज्य में बीजेपी की सरकार बनने से पश्चिम बंगाल के मछुआरों को इस योजना का लाभ मिलेगा. 

3. पीएम श्री स्कूल: शिक्षा के आधुनिकीकरण के लिए पूरे देश में पीएम श्री स्कूल खोले जा रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार ने केंद्र की इस योजना को अनुमति नहीं थी. अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी इस योजना को अपने हिसाब से लागू करेगी. 

4. पीएम आवास योजना: पश्चिम बंगाल में पीएम आवास योजना (ग्रामीण और शहरी) के तहत भी कई बार फंड रोकने और अनियमितताओं के आरोपों के चलते काम प्रभावित हुआ. सत्ता बदलने से आवास के PM Awas Yojana के जरिए गरीबों को पक्के घर मिलने की रफ्तार तेज हो सकती है. MGNREGA के भुगतान को लेकर भी केंद्र और राज्य के बीच विवाद रहा, जिससे मजदूरों को समय पर पैसा नहीं मिल पा रहा था. लेकिन अब रोजगार के लिहाज से MGNREGA के भुगतान में पारदर्शिता और समय पर भुगतान की उम्मीद है. 

5. पीएम फसल बीमा योजना: पश्चिम बंगाल सरकार ने इस योजना से बाहर रहने का विकल्प चुना था. लेकिन अब पीएम फसल बीमा योजना का लाभ पश्चिम बंगाल के किसानों को भी मिलेगा. 

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6. पीएम विश्वकर्मा योजना: शिल्पकारों के लिए यह योजना भी राज्य में लागू नहीं की गई. अब बीजेपी की प्राथमिकता रहेगी कि इस योजना को जल्द लागू की जाए. इस योजना के माध्यम से कारीगरों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण, लोन और तकनीकी सहायता मिलेगी. 

7. चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना: उत्तर बंगाल में चाय बागान श्रमिकों के लिए ममता सरकार ने केंद्र की 'चाय श्रमिक प्रोत्साहन योजना' को लागू नहीं किया. बीजेपी ने चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आते ही चाय श्रमिकों को इस योजना का लाभ मिलेगा. 

इसके अलावा पीएम किसान सम्मान निधि को लागू करने में काफी विलंब हुआ था. केंद्र सरकार ने यह आरोप भी लगाया है कि टीएमसी सरकार ने प्रधानमंत्री जन धन योजना और स्मार्ट सिटी मिशन को भी राज्य में ठीक से लागू नहीं होने दिया है. पीएम विश्वकर्मा योजना, पीएम कुसुम, पीएम उज्ज्वला 3.0 और खेलो इंडिया जैसी कई केंद्रीय योजनाएं भी इस सूची में शामिल हैं, जिन्हें बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में लागू करने का वादा किया है. 


बता दें, बीजेपी ने राज्य में महिलाओं के लिए 3,000 रुपये मासिक सहायता और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण का भी वादा किया है, जो केंद्रीय योजनाओं के साथ मिलकर सामाजिक सुरक्षा का एक मजबूत ढांचा तैयार करेगा. 

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