नोटबंदी के बाद घर खरीदना हुआ मुश्‍किल, कैश जुटाने में आ रही दिक्कतें

तलवार के मुताबिक नोटंबदी के बाद लोगों को घर खरीदने के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वह कैसे कैश को एकत्र करे. यदि आज भी उसे घर खरीदने में अपने पेमेंट का बड़ा हिस्सा कैश में देना है तो उसे कैश एकत्र करने का रास्ता देखना होगा.

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राजीव तलवार राजीव तलवार

वंदना भारती

  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 8:31 PM IST

नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर आजतक कॉन्क्लेव के विशेष सत्र में भारतीय इंडस्ट्री के खास दिग्गजों नें शिरकत की. नोटबंदी के फायदे और नुकसान पर चर्चा करने के लिए इस खास सत्र में रिएल एस्टेट दिग्गज डीएलएफ के सीईओ राजीव तलवार, ई-कॉमर्स साइट शॉपक्लूज के सीईओ संजय सेठी, मोबीक्विक के सीईओ बिपिन प्रीत सिंह और सुकाम पॉवर सिस्टम के एमडी कुंवर सिंह शामिल हुए.  सत्र का संचालन राजीव दुबे के साथ राहुल कंवल ने किया.

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राजीव तलवार के मुताबिक ई-मॉनेटाइजेशन से कोई कंपनी बंद नहीं हुई है. रिएल एस्टेट रेग्युलेशन ऐक्ट अपनी जगह पर है. सुप्रीम कोर्ट खरीदारों के हित के लिए फैसला दे रही है. तलवार के मुताबिक नोटंबदी के बाद लोगों को घर खरीदने के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वह कैसे कैश को एकत्र करे. यदि आज भी उसे घर खरीदने में अपने पेमेंट का बड़ा हिस्सा कैश में देना है तो उसे कैश एकत्र करने का रास्ता देखना होगा. लिहाजा, रियल एस्टेट में अभी भी उन लोगों के लिए कैश में खऱीदारी करना संभव है जो अपने लिए कैश की व्यवस्था करने में कामयाब हो रहे हैं. तलबार के मुताबिक, रियल एस्टेट में कीमतें गिरी हैं लेकिन सर्कल रेट के मुताबिक कीमतें अभी भी बाजार की कीमत से ऊपर है. लिहाजा, रियल एस्टेट को ठीक करने के लिए बेहद जरूरी है कि अब सर्केल रेट में भी लगभग 25-30 फीसदी की कटौती की जाए.

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संजय सेठी ने बताया कि कैश ऑन डेलिवरी में गिरावट दर्ज हुई थी. लेकिन मौजूदा समय में एक बार फिर कैश ऑन डेलिवरी के उसी स्तर पर हम पहुंच चुके हैं. ऐसी स्थिति में जीनव कैसे बदला है. संजय ने बताया कि नोटंबदी के बाद से देश में बहुत कुछ बदला है. लेकिन महज नोटबंदी से क्या बदलाव हुआ पर संजय ने कहा कि इससे कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला है.

बिपिन प्रीत सिंह ने कहा कि नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा फायदा और बदलाव यह देखने को मिला है कि इससे सरकार ने अपने सभी विभागों को डिजिटल पेमेंट के लिए खोल दिया है. वहीं नोटबंदी से पहले सरकारी विभागों में सिर्फ कैश और चेक का बोलबाला था. बिपिन ने बताया कि नोटबंदी से पहले देश में महज जिनती पीओएस मशीने इस्तेमाल होती थी अब उसकी संख्या में 5 गुना इजाफा हो चुका है. इससे साफ है कि देश में ज्यादा दुकानें डिजिटल पेमेंट लेने के लिए तैयार हैं. बिपिन के मुताबिक आज की तारीख में छोटे कारोबारी डिजिटल पेमेंट लेने से मना नहीं कर रहे हैं वहीं नोटबंदी से पहले कैश की पूरी तरह से प्राथमिकता दी जाती थी.

कुंवर सिंह- कुंवर के मुताबिक नोटबंदी के ऐलान के बाद लगभग 2 महीने तक उनका बिजनेस पूरी तरह से ठप्प पड़ गया. वहीं दो महीने बाद जब चीजें थोड़ा-थोड़ा संभलने लगी 1 जुलाई से पूरे देश में जीएसटी लागू कर दिया गया. कुंवर के मुताबिक के सामने पेमेंट की बड़ी चुनौती थी वहीं अब स्थिति थोड़ी सामान्य होने के बाद वह एक बार फिर कैश का रुख कर चुके हैं. कुंवर ने कहा कि डिजिटल पेमेंट में सबसे बड़ी चुनौती है कि वहां 2 फीसदी का ट्रांजैक्शन कट वसूला जाता है. लिहाजा, कोई भी कारोबारी या ग्राहक अपने पैसे से इस कट को देना नहीं चाहेगा. कुंवर के मुताबिक नोटबंदी के बाद टैक्स चोरी की यदि 100 घटनाएं थीं तो आज वह घटकर 70 पर पहुंच गई हैं.

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