पीएम मोदी मंगलवार को इटली के रोम पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने किया. दोनों नेताओं की कई शानदार तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. एक तस्वीर के बैकग्राउंड में ऐतिहासिक कोलोसियम नजर आ रहा है. रोम के बीचों-बीच खड़ी पत्थर और कंक्रीट की यह विशालकाय इमारत दुनिया के 7 अजूबों में शामिल है.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आज के रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और आर्किटेक्चर के नजरिए से देखा जाए, तो यह प्राचीन इमारत आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए एक 'लिविंग मास्टरक्लास' है. जानते हैं कि आखिर क्या हैं इस ऐतिहासिक इमारत की खूबियां, यह कब और कैसे बनी.
इतिहास के पन्नों को पलटें तो इस भव्य इमारत का निर्माण सन 70-72 ईस्वी (CE) के दौरान रोमन सम्राट वेस्पासियन ने शुरू करवाया था. इसके बाद सन 80 ईस्वी में उनके बेटे टिटस ने इसका उद्घाटन किया. मूल रूप से इसे 'फ्लेवियन एम्फीथिएटर' (Flavian Amphitheatre) कहा जाता था, जहां खूंखार ग्लैडिएटर्स की जंग और खेल हुआ करते थे.
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कोलोसियम का इतिहास है बेहद खास
कोलोसियम बनने से पहले उस जमीन पर रोम के क्रूर तानाशाह राजा नीरो का आलीशान महल और उसकी एक बहुत बड़ी पर्सनल कृत्रिम झील हुआ करती थी. नए सम्राट वेस्पासियन ने सत्ता संभालते ही उस निजी झील का पानी सुखाया और उस बेशकीमती जमीन को आम जनता के मनोरंजन के लिए एक 'पब्लिक एंटरटेनमेंट हब' में बदल दिया. यह इतिहास में 'लैंड रिक्लेमेशन'का सबसे बेहतरीन उदाहरण है.
उस दौर में जितने भी बड़े स्टेडियम या थिएटर बनते थे, उन्हें ढलान और सहारा देने के लिए किसी पहाड़ी को काटकर बनाया जाता था. लेकिन कोलोसियम दुनिया का पहला ऐसा 'फ्री-स्टैंडिंग' ओपन-एयर थिएटर था, जो बिना किसी प्राकृतिक पहाड़ी या चट्टान के सहारे, पूरी तरह से समतल मैदानी जमीन पर कंक्रीट और पत्थरों के दम पर खड़ा किया गया.
रोमन कंक्रीट और 300 टन लोहे का कमाल
आज के बिल्डर्स जिस मजबूती का दावा करते हैं, उसकी तकनीक रोमनों ने 2000 साल पहले खोज ली थी. कोलोसियम को बनाने में मुख्य रूप से चार चीजें लगीं.
ट्रैवर्टीन लाइमस्टोन: बाहरी दीवारों के लिए 1 लाख क्यूबिक मीटर से ज्यादा मजबूत चूना पत्थर इस्तेमाल हुआ.
रोमन कंक्रीट: यह ज्वालामुखी की राख (Pozzolana) और चूने से बना ऐसा जादुई सीमेंट था जो समय के साथ और मजबूत होता गया।
लोहे के क्लैम्प्स: सबसे खास बात यह है कि पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी गारे या सीमेंट का नहीं, बल्कि 300 टन लोहे के क्लैम्प्स का इस्तेमाल किया गया. इसी वजह से यह इमारत इतनी लचीली बनी कि बड़े-बड़े भूकंप झेलकर भी आज तक टस से मस नहीं हुई.
इस चार मंजिला अंडाकार इमारत की लंबाई 189 मीटर और चौड़ाई 156 मीटर है, जिसमें एक साथ 50,000 से 80,000 दर्शक बैठ सकते थे.
80 प्रवेश द्वार में कुल 80 मेहराबदार एंट्री गेट्स थे, इसकी टाउन प्लानिंग और स्पेस मैनेजमेंट इतना सटीक था कि खचाखच भरे होने के बावजूद यह पूरा स्टेडियम महज 15 मिनट के अंदर खाली किया जा सकता था. आज के आधुनिक क्रिकेट और फुटबॉल स्टेडियम इसी 'रोमन आर्किटेक्चरल डिजाइन' को कॉपी करके बनाए जाते हैं.
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कमर्शियल आर्किटेक्चर के लिहाज से इसका बेसमेंट सबसे एडवांस था, जिसे 'हाइपोजियम' (Hypogeum) कहा जाता है. यह दो मंजिला अंडरग्राउंड टनल का नेटवर्क था, जहां ग्लैडिएटर्स और जंगली जानवरों को पिंजरों में रखा जाता था. इसमें उस जमाने की ऐसी मैन्युअल लिफ्ट और पुली सिस्टम लगे थे, जिससे जानवर या योद्धा अचानक जमीन का दरवाजा फाड़कर सीधे मुख्य स्टेज पर प्रकट हो जाते थे. इसके अलावा, दर्शकों को तेज धूप और बारिश से बचाने के लिए ऊपर एक विशालकाय खिंचने वाली छत भी थी.
यह फाउंडेशन इंजीनियरिंग, मटीरियल साइंस, टाउन प्लानिंग और क्राउड मैनेजमेंट का वो बेजोड़ नमूना है, जिसने दुनिया के रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को हमेशा के लिए बदल दिया.
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