महाराष्ट्र में 'एनिमी प्रॉपर्टी' खरीदना हुआ सस्ता, स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज माफ

1965 के युद्ध के बाद भारत सरकार ने 'शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968' बनाया था, इसके तहत ये संपत्तियां कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया (CEPI) के पास सुरक्षित रहती हैं, जो गृह मंत्रालय के अधीन आता है. कानून के मुताबिक, शत्रु देश के नागरिक या उनके वारिस इन संपत्तियों को ट्रांसफर, बेच या विरासत में नहीं दे सकते.

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स्टैंप ड्यूटी माफ होने से प्रॉपर्टी की कीमत कम होगी (Photo-ITG)  स्टैंप ड्यूटी माफ होने से प्रॉपर्टी की कीमत कम होगी (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 11:08 AM IST

महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए Enemy Properties की खरीद-बिक्री पर स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को पूरी तरह माफ करने का फैसला लिया है. मंगलवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई.

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य इन संपत्तियों की नीलामी में लोगों की भागीदारी बढ़ाना और अटकी हुई प्रक्रियाओं को तेज करना है. राज्य के राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक इन संपत्तियों की नीलामी में बहुत कम रिस्पांस मिल रहा था. स्टैंप ड्यूटी माफ होने से प्रॉपर्टी की कुल कीमत कम हो जाएगी, जिससे खरीदार इसकी ओर आकर्षित होंगे.

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क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार ने 2017 में इस कानून में बदलाव किया था, जिससे CEPI को केंद्र सरकार की अनुमति से इन संपत्तियों को बेचने या निपटाने का अधिकार मिल गया. आमतौर पर ये बिक्री ई-नीलामी (e-auction) के जरिए की जाती है.

CEPI ने महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया था कि नीलामी प्रक्रिया को सरल और सस्ता बनाया जाए. राज्य सरकार का मानना है कि इस छूट के बाद अब लंबे समय से खाली पड़ी या विवादित रही इन संपत्तियों का निपटारा जल्दी हो सकेगा और सरकार को राजस्व प्राप्त करने में मदद मिलेगी.

क्या होती हैं 'शत्रु संपत्तियां'?

Enemy Properties वे संपत्तियां (जमीन, मकान या शेयर) हैं, जो उन लोगों की हैं जो भारत-चीन (1962) और भारत-पाकिस्तान (1965 और 1971) युद्ध के बाद इन देशों में जाकर बस गए और वहां की नागरिकता ले ली. भारत इन देशों को अपना विरोधी  मानता है.  

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महाराष्ट्र में 'शत्रु संपत्तियों' का एक बड़ा हिस्सा मौजूद है, जिनकी कुल संख्या 428 है, इनमें से सबसे अधिक 239 संपत्तियां अकेले मुंबई में स्थित हैं, जिन्हें भौगोलिक आधार पर विभाजित करें तो 62 संपत्तियां आईलैंड सिटी में और 177 संपत्तियां मुंबई उपनगरों में फैली हुई हैं.

मुंबई के बाहर भी राज्य के अन्य जिलों में इनका विस्तार देखने को मिलता है, जिसमें ठाणे में 86, पालघर में 77, और रत्नागिरी में 11 संपत्तियां दर्ज हैं. इसके अतिरिक्त, नागपुर में 6, पुणे में 4, छत्रपति संभाजीनगर और जालना में 2-2, जबकि सिंधुदुर्ग में 1 ऐसी संपत्ति की पहचान की गई है.

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