रियल एस्टेट के नक्शे पर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अहमियत किसी से छिपी नहीं है, और आगामी केंद्रीय बजट 2026 इस रफ्तार को एक नई दिशा दे सकता है. इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि सेक्टर को अब किसी बड़े प्रयोग की नहीं, बल्कि एक स्थिर इकोसिस्टम की जरूरत है.
2025 में दिखी बाजार की मजबूती ने यह साफ कर दिया है कि लग्जरी के शोर के बीच 'कम्फर्ट और कनेक्टिविटी' ही असली विजेता हैं. यही वजह है कि सेक्टर 150 से लेकर ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक, खरीदारों की सक्रियता बढ़ी है और वे बजट से ऐसे फैसलों की उम्मीद कर रहे हैं जो बाजार के इस भरोसे को और मजबूत करें.
खरीदार जल्दबाजी में फैसले नहीं ले रहे, बल्कि सोच-समझकर अपनी जरूरतों के हिसाब से घर चुन रहे हैं. दिखावे वाले लग्ज़री विकल्पों की जगह अब सुविधाजनक, सुरक्षित और कनेक्टेड प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ी है. खासतौर पर नोएडा एक्सटेंशन, सेक्टर 150, सेक्टर 137, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और यमुना एक्सप्रेसवे बेल्ट में एंड-यूज़र की दिलचस्पी बनी हुई है.
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क्या कहते हैं डेवलपर?
डेवलपर्स का मानना है कि वर्तमान बाजार एक संवेदनशील मोड़ पर है, जहां खरीदारों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है. डेवलपर्स नहीं चाहते कि बजट में कोई ऐसा टैक्स संशोधन या कड़ा नियम आए जो होम-बायर्स के उत्साह पर पानी फेर दे. सेक्टर की सामूहिक राय यही है कि नियमों में स्थिरता ही खरीदारों के आत्मविश्वास को बनाए रखने की असली कुंजी है.
हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते है, 'नोएडा की रियल एस्टेट ग्रोथ अब केवल अटकलों पर नहीं, बल्कि ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक निवेश पर टिकी है. ग्लोबल कॉरपोरेट्स और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरते इस क्षेत्र को अब राजकोषीय सहायता की जरूरत है. घर खरीदारों के लिए टैक्स इंसेंटिव, विशेषकर होम लोन के ब्याज पर कटौती की सीमा बढ़ाना, बाजार में नकदी और मांग दोनों को बढ़ाएगा. इसके अतिरिक्त, मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट और बेहतर बुनियादी ढांचे से जुड़ी नीतियां नोएडा को एक 'मैच्योर अर्बन इकॉनमी' के रूप में ढालने में मदद करेंगी. बजट को चाहिए कि वह इंफ्रास्ट्रक्चर की गति को खरीदारों के भरोसे और बेहतर जीवन स्तर के साथ मजबूती से जोड़े.'
रियल एस्टेट के नजरिए से दिल्ली-एनसीआर का यह हिस्सा अब एक 'स्थिर और संतुलित' बाजार के रूप में उभरा है. पिछले एक साल में कीमतों में आया नियंत्रित उछाल यह दर्शाता है कि बाजार की बुनियाद मजबूत है. डेवलपर्स का पूरा ध्यान अब पुराने वादों को निभाने और अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने पर केंद्रित है, जो खरीदारों के बीच खोए हुए भरोसे को वापस ला रहा है.
एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी और स्टार्टअप्स के विस्तार ने नोएडा-ग्रेटर नोएडा को रहने के लिए पहली पसंद बना दिया है. डेवलपर्स की बजट से केवल इतनी ही उम्मीद है कि नीतियों में निरंतरता बनी रहे, ताकि विकास की यह प्राकृतिक रफ्तार बिना किसी बाधा के जारी रह सके."
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