इस शहर के 12,000 ऑफिस बन जाएंगे खंडहर! अरबों की संपत्ति होगी 'जीरो'

लंदन के ऑफिस मार्केट के लिए यह अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि बाजार में बने रहने की चुनौती है. कुशल और ग्रीन ऑफिस स्पेस की कमी पहले से ही कंपनियों को लंदन में ऑफिस लेने से रोक रही है. अब मकान मालिकों के पास केवल दो ही विकल्प है या तो भारी निवेश कर इमारत को अपग्रेड करें या उसे बेचकर बाहर निकल जाएं.

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12,000 ऑफिसों पर मंडराया संकट (Pexels) 12,000 ऑफिसों पर मंडराया संकट (Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:00 PM IST

लंदन का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर इस समय एक बड़े कानूनी और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. ब्रिटिश सरकार द्वारा लागू किए जा रहे कड़े 'ऊर्जा दक्षता मानकों' (Energy Efficiency Standards) की वजह से मध्य लंदन की अरबों पाउंड की संपत्तियां 'स्टैंडेड एसेट्स' बनने की कगार पर हैं.

इसका मतलब है कि यदि मकान मालिकों ने समय रहते इन इमारतों में सुधार नहीं किए, तो 2030 के दशक तक इन्हें किराये पर देना या बेचना कानूनी रूप से नामुमकिन हो जाएगा.

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प्रॉपर्टी कंसल्टेंट 'रॉबर्ट इरविंग बर्न्स' (RIB) की रिपोर्ट के अनुसार, लंदन की अधिकांश इमारतें भविष्य के 'न्यूनतम ऊर्जा दक्षता मानकों' (MEES) पर खरी नहीं उतरती हैं. आंकड़ों के मुताबिक, वेस्टमिंस्टर के 78% और सिटी ऑफ लंदन के 71% ऑफिस नए मानकों में फेल हो सकते हैं.

पूरे मध्य लंदन में लगभग 12,000 से अधिक ऑफिसों को तुरंत अपग्रेड करने की आवश्यकता है, लेकिन लेबर की कमी और फंडिंग की दिक्कतों के चलते यह समय सीमा में पूरा करना लगभग असंभव लग रहा है.

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दो हिस्सों में बंटता बाजार 

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार दो स्पष्ट भागों में विभाजित हो जाएगा. आधुनिक और ऊर्जा-कुशल इमारतों की मांग सबसे ज्यादा होगी और वे महंगे किराये पर चढ़ेंगी, जो इमारतें मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगी, उनकी वैल्यू तेजी से गिरेगी और वे लंबे समय तक खाली पड़ी रहेंगी. वर्तमान में केवल 4% ऑफिसों के पास ही सबसे अच्छी 'A' रेटिंग है.

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निवेशकों के लिए आपदा में अवसर

जहां छोटे और पारंपरिक मकान मालिक इन सख्त नियमों और मरम्मत के भारी खर्च से डरकर अपनी संपत्तियां बेच रहे हैं, वहीं बड़े वैश्विक निवेशक इसे एक मौके के तौर पर देख रहे हैं, ब्लैकस्टोन और ब्रुकफील्ड जैसी दिग्गज कंपनियां पुरानी इमारतों को कम कीमत पर खरीद रही हैं. इनका लक्ष्य इन इमारतों को 'ग्रीन रिफर्बिशमेंट' के जरिए अपग्रेड करना और फिर उन्हें प्रीमियम दरों पर वापस बाजार में उतारना है.

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