'टिकट कैंसिल हो गया, अब घर में नहीं मनेगी ईद...', मिडिल ईस्ट की जंग में फंसे भारतीयों का दर्द

ईरान-इजरायल की जंग ने कई देशों को बुरी तरह से प्रभावित किया है. विदेश में रहने वाले लाखों भारतीयों की ईद इस बार हर साल की तरह नहीं है. क्योंकि जंग की वजह से आसमान छूते हवाई किराए ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है.

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लाखों भारतीय भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं (Photo-PTI) लाखों भारतीय भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं (Photo-PTI)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 18 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:31 PM IST

ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध ने इस साल ईद की मिठास को कड़वाहट में बदल दिया है. 28 फरवरी से शुरू हुई इस जंग को अब करीब 20 दिन होने वाले हैं, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीय लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं. एक तरफ जहां युद्ध की अनिश्चितता ने लोगों को सहमा दिया है, वहीं दूसरी ओर एयरलाइंस के आसमान छूते किराए ने घर वापसी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. जंग से पहले के मुकाबले टिकटों की कीमतें अब कई गुना बढ़ चुकी हैं, जिससे आम आदमी के लिए अपने परिवार के साथ त्योहार मनाना अब एक नामुमकिन सा सपना बन गया है.

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले सईद रियाद में नौकरी करते हैं. वो हर साल की तरह इस बार भी अपने परिवार के साथ ईद मनाने के लिए अपने वतन लौट रहे थे, उन्होंने कई महीने पहले अपना टिकट भी बुक करा लिया था, लेकिन जंग के माहौल में उनके घर वापसी का सपना अधूरा रह गया है.

aajtak.in से बात करते हुए वो कहते हैं- 'अपने घरवालों के साथ ईद मनाने आ रहा था, ऐन वक्त पर कोई मुश्किल न हो इसलिए टिकट भी काफी पहले बुक करा लिया था, लेकिन फ्लाइट कैंसिल हो गई. टिकट के रेट इतने बढ़ गए हैं कि मेरे लिए दोबारा टिकट खरीदना नामुमकिन हैं, इसलिए अब मैंने घर जाने का फैसला टाल दिया है और इस साल यहीं ईद मनेगी.'

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क्यों बढ़ रहे हैं टिकटों के दाम?

हवाई टिकटों के इतने महंगे होने के पीछे कई बड़े कारण हैं. एयर स्पेस बंद होने से फ्लाइट्स को लंबे रास्तों से आना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और किराया बढ़ा है, तो कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं, जिससे मांग बढ़ने पर ब्लैक मार्केटिंग और अधिक किराए की स्थिति पैदा हो गई है. इसमें दुबई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में रहने वाले भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. 

युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है, तो कई देशों के ऊपर से उड़ना खतरनाक है, इसलिए फ्लाइट्स को लंबे रास्तों से घूमकर जाना पड़ रहा है. इससे विमान का खर्चा और समय दोनों बढ़ गए हैं. साथ ही, एयरलाइंस को अब भारी बीमा भी चुकाना पड़ रहा है. इन सब दिक्कतों की वजह से उड़ानों की संख्या कम हो गई है और सीटें कम होने के कारण टिकटों के दाम आम आदमी के बजट से बाहर हो गए हैं.

 2.44 लाख लोग भारत वापस लौटे

28 फरवरी से अब तक करीब 2.44 लाख भारतीय सुरक्षित वतन वापसी कर चुके हैं, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है. ईरान के अलग-अलह शहरों में अब भी हजारों भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जो युद्ध के खौफ और अनिश्चितता के बीच बेसब्री से भारत सरकार की ओर देख रहे हैं, बिगड़ते हालातों के कारण कई प्रमुख हवाई मार्ग बंद हो चुके हैं और उड़ानों की कमी के चलते टिकटों की मारामारी बढ़ गई है, जिससे फंसे हुए लोगों की वतन वापसी की राह और भी कठिन और खर्चीली हो गई है. 

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अबू धाबी से नई दिल्ली के किराया  ₹60,000 तक पहुंच गया है, हालांकि, यूएई (UAE) और भारत के बीच उड़ानें अभी भी संचालित हो रही हैं, लेकिन उड़ानों की संख्या में भारी कमी आई है और परिचालन लागत काफी बढ़ गई है. इसका सीधा असर सीटों की कमी, बढ़ती मांग और रिकॉर्ड तोड़ महंगे टिकटों के रूप में सामने आ रहा है. आमतौर तौर पर, अबू धाबी और दिल्ली के बीच एक तरफ का हवाई किराया ₹10,000 से ₹21,500 के बीच रहता था. 

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वहीं दुबई से दिल्ली का किराया भी इस समय 40 से 50 हजार रुपये के करीब पहुंच गया है, जो सामान्य दिनों में 15 हजार रुपये से अधिक नहीं होता था. भारतीयों के लिए दुबई महज एक टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं, बल्कि एक 'दूसरे घर' जैसा है, जहां भारत के सैकड़ों रईसों ने अपने घर ले रखे हैं और जिनका वहां लगातार आना-जाना लगा रहता है.

हालांकि, ईरान-इजरायल युद्ध की तपिश ने इस चकाचौंध वाले शहर को भी अपनी चपेट में ले लिया है. ईरान द्वारा हाल ही में दुबई के करीब किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों ने सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है. इन हमलों और युद्ध के खौफ ने न केवल वहां के टूरिज्म और व्यापार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, बल्कि सुरक्षित माने जाने वाले इस वैश्विक हब की स्थिरता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे वहां रह रहे भारतीयों के बीच भी बेचैनी बढ़ गई है. 

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वहीं भारतीय एयरलाइंस ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों ही उड़ानों पर नया 'फ्यूल सरचार्ज' लागू कर दिया है. जिसका असर किराए पर साफ देखा जा सकता है. यह एक अतिरिक्त शुल्क एयरलाइंस तब लगाती हैं जब कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आता है, ताकि वे बिना बेस किराया बढ़ाए अपने खर्चों को पूरा कर सकें.

ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' जैसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों पर खतरा बढ़ गया है, जहां से दुनिया का लगभग एक-चौथाई तेल गुजरता है. इसके अलावा, युद्धग्रस्त हवाई क्षेत्रों से बचने के लिए विमानों को लंबे रास्तों से उड़ान भरनी पड़ रही है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों बढ़ गई हैं. भारत में विमान ईंधन (ATF) की कीमतें पहले ही 90,000 से 1,10,000 रुपये प्रति किलोलीटर के बीच हैं, और चूंकि किसी भी एयरलाइन के कुल खर्च का लगभग एक-तिहाई हिस्सा ईंधन पर ही होता है, इसलिए कीमतों में मामूली बदलाव का सीधा असर अब घरेलू और खासतौर पर लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के महंगे टिकटों के रूप में यात्रियों पर पड़ रहा है.

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