क्या सिर्फ अमीरों का शहर है गुरुग्राम, मिडिल क्लास के लिए नहीं है घर!

एक तरफ जहां यह शहर गोल्फ कोर्स रोड की लग्जरी और कामयाबी का नया स्टेटस सिंबल बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ 'फॉरएवर जाम' और जलभराव जैसी बुनियादी बदहाली इसके 'मिलेनियम सिटी' होने के दावों की पोल खोलती है.

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नोएडा और गाजियाबाद को पीछे छोड़ रहा है गुरुग्राम (Photo-Getty Image) नोएडा और गाजियाबाद को पीछे छोड़ रहा है गुरुग्राम (Photo-Getty Image)

स्मिता चंद

  • नई दिल्ली,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:01 AM IST

एक दौर था जब गुरुग्राम को दिल्ली के एक शांत, खुले और किफायती विकल्प के रूप में देखा जाता था. दिल्ली की भीड़भाड़ से परेशान होकर मिडिल क्लास ने इस उम्मीद में गुरुग्राम का रुख किया था कि यहां उन्हें बजट में आशियाना और बेहतर जिंदगी मिलेगी, लेकिन आज का गुरुग्राम बदल चुका है. गगनचुंबी कांच की इमारतें, गोल्फ कोर्स रोड की चमक, रात की चमचमाती लाइट्स और करोड़ों-अरबों की प्रॉपर्टीज ने इस शहर को बदल दिया है.

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आज जब कोई आम आदमी गुरुग्राम में घर तलाशने निकलता है, तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही आकर खड़ा होता है क्या गुरुग्राम अब सिर्फ अमीरों का शहर बनकर रह गया है, क्या मिडिल क्लास के लिए अब यह कोई जगह बची भी है या नहीं?

एक तरफ जहां यह शहर कामयाबी और स्टेटस सिंबल का नया हब बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव, अंतहीन ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे की बदहाली ने इसके 'मिलेनियम सिटी' होने के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. रियल एस्टेट एक्सपर्ट रितेश अग्रवाल ने आजतक रेडियो के शो प्रॉपर्टी से फायदा में इस बात का गहराई से विश्लेषण किया कि आखिर गुरुग्राम की इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे की इनसाइड स्टोरी क्या है.

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जब हम गुरुग्राम के प्रीमियम होने की बात करते हैं, तो जुबां पर सबसे पहला नाम डीएलएफ के गोल्फ कोर्स रोड पर बने प्रोजेक्ट्स द कैमिलियास (The Camellias), मैग्नोलियास (The Magnolias) और अरालियास (The Aralias) का आता है. आज इन अपार्टमेंट्स की कीमत 100 करोड़ से शुरू होकर 200-250 करोड़ रुपये से भी ऊपर जा चुकी है.

सवाल यह उठता है कि क्या ये इमारतें वाकई इतनी प्रीमियम हैं या फिर यह सिर्फ एक हाइप और डिमांड का खेल है? रियल एस्टेट एक्सपर्ट रितेश अग्रवाल इसे एक अलग नजरिए से देखते हैं. उनके मुताबिक, यह शुद्ध रूप से 'एस्पिरेशन वैल्यू' है. रीयल एस्टेट आज सिर्फ ईंट-गारे का ढांचा नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल बन चुका है. आज अमीर तबके के लिए गुरुग्राम के गोल्फ कोर्स रोड पर प्रॉपर्टी होना शान की बात है. डीएलएफ ने इस परसेप्शन को बनाने के लिए 30 से 40 साल का लंबा संघर्ष किया है, तब जाकर आज यह ग्लोबल लेवल का लैंडमार्क बना है.

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क्या गाजियाबाद और नोएडा से आगे निकला गुरुग्राम?

एनसीआर के बाकी शहरों की तुलना में गुरुग्राम का क्रेज इस कदर बढ़ चुका है कि यह अमीर और अपर-मिडल क्लास के लिए 'सक्सेस' का नया पैमाना बन गया है. कुछ समय पहले तक गाजियाबाद के लोग अक्सर यह स्वीकार करने में हिचकते थे कि वे गाजियाबाद में रह रहे हैं. नोएडा ने पिछले कुछ सालों में बेहतरीन और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स बनाए हैं, लेकिन वो जो 'गुरुग्राम वाली बात' या वो ग्लोबल वाइब है, उसे नोएडा अभी तक पूरी तरह अचीव नहीं कर पाया है.

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आज स्थिति यह है कि अगर आप एक बेहद सफल बिजनेसमैन या कॉर्पोरेट लीडर हैं और आपका गुरुग्राम में (भले ही गोल्फ कोर्स रोड पर न हो, बल्कि उसके आसपास के किसी सेक्टर में भी) 3BHK या 4BHK फ्लैट है, तो समाज उसे आपकी सफलता के बड़े सर्टिफिकेट के रूप में देखता है. यह परसेप्शन गुरुग्राम की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है.

अगर हम थोड़ी देर के लिए डीएलएफ, साइबर सिटी और गोल्फ कोर्स रोड को इस समीकरण से माइनस भी कर दें, तो भी गुरुग्राम में ऐसा बहुत कुछ है जो दिल्ली के हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को अपनी तरफ खींचता है. गुरुग्राम की आबादी का लगभग 50 से 60 प्रतिशत खरीदार दिल्ली से आता है.

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मुंबई से तुलना और मिडिल क्लास का 'मजबूरन एग्जिट'

आज गुरुग्राम के प्रॉपर्टी प्राइसेज की तुलना देश की सबसे महंगी रियल एस्टेट मार्केट मुंबई से की जाने लगी है. हालांकि मुंबई के कुछ बेहद पॉश इलाके (जैसे दक्षिण मुंबई या बांद्रा) अभी भी गुरुग्राम की पहुंच से बहुत दूर हैं, लेकिन अगर हम प्रति स्क्वायर फीट की ग्रोथ देखें, तो गुरुग्राम तेजी से मुंबई के समानांतर खड़ा हो रहा है.

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रितेस बताते हैं- 'इस अंधाधुंध बढ़ती कीमतों का सबसे बुरा असर मिडिल क्लास पर पड़ा है. गुरुग्राम के कोर सेक्टर्स और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड जैसी जगहों से मिडिल क्लास पूरी तरह 'आउट' हो चुका है. जहां कभी 60-70 लाख में अच्छे फ्लैट मिल जाते थे, आज वहां शुरुआती कीमत ही 2 से 3 करोड़ रुपये हो चुकी है.'
 
मिडिल क्लास अब मजबूरन गुरुग्राम के कोर एरिया को छोड़कर न्यू गुरुग्राम, सोहना रोड या फिर दिल्ली-जयपुर हाईवे की तरफ शिफ्ट हो रहा है. कई लोग अब गुरुग्राम का मोह छोड़कर नोएडा और ग्रेटर नोएडा का रुख कर रहे हैं, जहां आज भी चौड़ी सड़कें, बेहतर ड्रेनेज प्लानिंग और बजट के अनुकूल घर उपलब्ध हैं.

बुनियादी तौर पर देखा जाए तो गुरुग्राम एक विरोधाभासों का शहर है. यहां एक तरफ 200 करोड़ के ऐसे अपार्टमेंट्स हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि हम न्यूयॉर्क या दुबई में खड़े हैं, और दूसरी तरफ जरा सी बारिश में तैरती गाड़ियां और घंटों लंबा ट्रैफिक जाम है जो किसी पिछड़े हुए कस्बे की याद दिलाता है.

लेकिन इन तमाम  कमियों के बावजूद, गुरुग्राम में कंपनियों का इनफ्लो और कमर्शियल एक्टिविटीज इतनी मजबूत हैं कि इसकी मांग कभी कम नहीं होती. साइबर हब, वर्ल्ड-क्लास ईटिंग प्लेसेस और कॉर्पोरेट कल्चर ने इसे एक ऐसा कल्ट बना दिया है, जिसे चाहकर भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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ट्रैफिक जाम से बेहाल 

गुरुग्राम की चर्चा हो और यहां के ट्रैफिक जाम का जिक्र न हो, ऐसा मुमकिन नहीं है. शहर में एंट्री करते ही एक ऐसा मोड़ या चौराहा आता है, जहां साल के 365 दिन हमेशा जाम लगा रहता है. शहर में ऐसे कई 'बॉटलनेक्स' हैं जो गुरुग्राम की सबसे बड़ी कमजोरी को उजागर करते हैं. इस समस्या पर बात करते हुए एक्सपर्ट रितेश अग्रवाल कहते हैं- "गुरुग्राम में जिस रफ़्तार से लोग आए, जिस स्पीड से कंपनियों का इनफ्लो हुआ और वर्किंग पॉप्युलेशन बढ़ी, उस अनुपात में सरकार ने शहर को इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं दिया. आज भी गुरुग्राम के कई अंदरूनी सेक्टर्स में 24 मीटर की अंदरूनी सड़कें पेंडिंग हैं. कई जगहों पर अंडरपासेस का काम सालों से अटका हुआ है.'

सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि हरियाणा सरकार के लिए गुरुग्राम सबसे ज्यादा कमाई करके देने वाला जिला बना हुआ है. सरकार यहां से रेवेन्यू तो भारी-भरकम वसूलती है, लेकिन उस पैसे को वापस गुरुग्राम के ड्रेनेज सिस्टम या सड़कों को सुधारने में खर्च नहीं किया जाता. यही वजह है कि मानसून आते ही यह हाई-टेक शहर घुटनों तक पानी में डूब जाता है.

गुरुग्राम अब निश्चित रूप से 'अमीरों का गढ़' बन चुका है, लेकिन अगर सरकार ने समय रहते इसके ड्रेनेज, सड़कों और ट्रैफिक बॉटलनेक्स को ठीक नहीं किया, तो कंक्रीट के इस आलीशान जंगल की चमक को धुंधला होने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगेगा, मिडिल क्लास के लिए यहां जगह भले ही सिकुड़ गई हो, लेकिन इस शहर की एस्पिरेशनल वैल्यू का जादू आज भी सिर चढ़कर बोल रहा है.

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