वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर कई घोषणाएं की हैं. सरकार ने देश के विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए अपने निवेश बजट में भारी बढ़ोतरी की है. साल 2014-15 में जहां बुनियादी ढांचे पर सिर्फ 2 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाते थे, उसे बढ़ाते हुए अब वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है.
बड़े प्रोजेक्ट्स के निर्माण के दौरान होने वाले जोखिमों को लेकर अक्सर बैंक और निजी निवेशक डरे रहते हैं. इस डर को खत्म करने और उनका भरोसा जीतने के लिए वित्त मंत्री ने एक 'इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड' बनाने का प्रस्ताव दिया है. यह फंड कर्ज देने वाले बैंकों को एक तरह की गारंटी देगा, जिससे वे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बिना किसी हिचकिचाहट के पैसा दे सकेंगे. इससे देश भर में अटके हुए या नए प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी.
रियल एस्टेट सेक्टर के एक्सपर्ट्स का मानना है कि 'रिस्क गारंटी' के जरिए निवेशकों का डर खत्म करना और 'एसेट रीसाइक्लिंग' के माध्यम से नई पूंजी जुटाना एक ऐसा कॉम्बिनेशन है, जो दिल्ली-NCR के व्यस्त व्यापारिक केंद्रों से लेकर गोवा के पर्यटन आधारित 'सेकंड होम' मार्केट तक, हर जगह मांग और निवेश की नई लहर लेकर आएगा.
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बजट पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
GHD ग्रुप के CMD, भारत ठकरान ने कहते हैं- 'सरकार द्वारा बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर बड़े खर्च का वादा और 'रिस्क गारंटी फंड' की शुरुआत एक बहुत बड़ा कदम है. इससे कर्ज देने वाले बैंकों और संस्थानों का भरोसा बढ़ेगा, जिससे देशभर में निर्माण कार्य की रफ्तार तेज होगी. खासकर गोवा के लिए ये घोषणाएं बेहद अहम हैं. जब सड़कें, रेल और अन्य सुविधाएं बेहतर होंगी, तो गोवा में 'सेकंड होम' खरीदने वालों और होटल जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ेगी. आज लोग ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं जहां आधुनिक सुविधाएं और अच्छी लाइफस्टाइल मिले. इंफ्रास्ट्रक्चर में यह सुधार एक 'बूस्टर' की तरह काम करेगा, जिससे गोवा का रियल एस्टेट मार्केट निवेशकों और घर खरीदारों, दोनों की पहली पसंद बना रहेगा.'
वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर गौरव के सिंह कहते हैं- ' बजट 2026 में 'रिस्क गारंटी फंड' और पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी सरकार की लंबी अवधि की मजबूत सोच को दर्शाती है, जिससे प्रोजेक्ट्स के जोखिम कम होंगे और बैंकों का भरोसा बढ़ेगा. इससे निर्माण कार्य की गति तेज होगी और डेवलपर्स के लिए काम करना अधिक फायदेमंद व सुगम हो जाएगा.'
गौरव के सिंह का मानना है कि दिल्ली-NCR जैसे क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी और फ्रेट कॉरिडोर के बनने से घर, ऑफिस और वेयरहाउसिंग की मांग में जबरदस्त उछाल आएगा. REITs के जरिए पुरानी संपत्तियों को पैसे में बदलकर नए निवेश करना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक 'बूस्टर' की तरह काम करेगा. कुल मिलाकर, इन नीतिगत बदलावों से बाजार में स्थिरता आएगी और देशी-विदेशी निवेशकों का भरोसा भारत के रियल एस्टेट मार्केट पर और गहरा होगा.
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रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगी नई दिशा
पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल कहते हैं- 'बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर को एक नई दिशा दे रहा है, जहां अब फोकस केवल विस्तार पर नहीं बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था को हाई-स्पीड और कुशल बनाने पर है. दिल्ली-वाराणसी जैसे 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा से शहरों की दूरियां मिटेंगी और विकास के नए रास्ते खुलेंगे.'
इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड' और 'डेडिकेटेड REITs' के आने से बाजार में पैसों की कमी दूर होगी और निवेशकों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी. इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक मशीनों का भारत में ही बनना एक 'गेम-चेंजर' साबित होगा, जिससे विदेशों पर निर्भरता कम होगी और प्रोजेक्ट्स समय से पहले पूरे हो सकेंगे.
टियर 2 और टियर 3 शहरों पर फोकस
शालीमार कार्प के डायरेक्टर खालिद मसूद कहते हैं- 'इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड' के आने से प्रोजेक्ट्स के दौरान होने वाले जोखिम कम होंगे, जिससे बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से पैसा मिलना बहुत आसान हो जाएगा. वहीं, सरकारी संपत्तियों को REIT मॉडल में लाने से कामकाज में पारदर्शिता आएगी और बाजार में पूंजी का सही इस्तेमाल हो सकेगा. बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास पर जो विशेष जोर दिया गया है, वह पूरे देश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ रियल एस्टेट सेक्टर के लिए लंबी अवधि के नए अवसर पैदा करेगा.'
ओरायन वन 32 के डायरेक्टर दुश्यंत सिंह का कहना है- ' बुनियादी ढांचे और शहरी कनेक्टिविटी पर भारी निवेश से उभरते हुए कॉरिडोर और टियर-2 शहरों में घरों की मांग और निवेश तेजी से बढ़ेगा, घर खरीदारों और डेवलपर्स के लिए लागत के दबाव को कम करने और आसान फाइनेंसिंग के उपाय सेक्टर को बड़ी राहत प्रदान करेंगे.यह बजट निवेशकों का भरोसा बढ़ाकर रियल एस्टेट को अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनाए रखने की दीर्घकालिक सोच को दर्शाता है'.
गंगा रियल्टी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीरज के. मिश्रा कहते हैं- 'बजट में टियर-2 और टियर-3 शहरों पर फोकस और REIT आधारित एसेट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना बाजार में कैश-फ्लो और निवेश बढ़ाने का एक शानदार तरीका है. इससे देश में अफोर्डेबल हाउसिंग का सपना सच होगा और रियल एस्टेट सेक्टर एक टिकाऊ ग्रोथ की ओर बढ़ेगा.'
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MORES के CEO मोहित मित्तल कहते हैं- "यह बजट सरकारी संपत्तियों और रियल एस्टेट एसेट्स से अधिकतम वैल्यू निकालने की सरकार की कोशिशों को नई मजबूती देता है. सरकारी कंपनियों (CPSEs) की खाली पड़ी संपत्तियों को REITs के जरिए बाजार में लाना एक बहुत ही व्यावहारिक कदम है. इससे न केवल रियल एस्टेट मार्केट में अधिक पारदर्शिता आएगी, बल्कि बड़े संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) भी भारत की ओर आकर्षित होंगे.'
रामा ग्रुप के डायरेक्टर प्रखर अग्रवाल कहते हैं- "वित्त मंत्री द्वारा टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास को प्राथमिकता देना रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक बेहतरीन कदम है. सड़कों, रेलवे और आधुनिक शहरी सुविधाओं में निवेश से इन उभरते शहरों में व्यवस्थित हाउसिंग और मिक्स्ड-यूज़ प्रोजेक्ट्स के लिए नए रास्ते खुलेंगे.'
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स्मिता चंद