अगर आप रियल एस्टेट में निवेश करने के लिए किसी ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं, जहां आने वाले समय में मुनाफा कई गुना बढ़ सके, तो आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Agra-Gwalior Greenfield Expressway) आपके लिए एक जैकपॉट साबित हो सकता है.
88.4 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न केवल उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच की दूरी को मिटा रहा है, बल्कि निवेश के नए 'गोल्डन कॉरिडोर' के रूप में उभर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्य शुरू होते ही इस रूट के आसपास की जमीनों के दाम 20% से 50% तक बढ़ सकते हैं.
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नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा विकसित किया जा रहा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे लगभग ₹4,613 करोड़ की लागत से बन रहा है. जिसके 2027-2028 तक बनने की उम्मीद है. यह आगरा के देवरी गांव (इनर रिंग रोड) से शुरू होकर ग्वालियर के सुसेरा गांव (बाईपास) पर खत्म होगा. वर्तमान में आगरा से ग्वालियर जाने में 3 घंटे लगते हैं, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर मात्र 80-90 मिनट का रह जाएगा.
जमीन के दाम बढ़ने के मुख्य कारण
यह एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, यानी यह बिल्कुल नई जमीन पर बनाया जा रहा है. एक्सप्रेसवे के किनारे लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए सरकार जमीन आवंटित करेगी. जब औद्योगिक गतिविधियां बढ़ती हैं, तो रिहायशी प्लॉट की मांग अपने आप बढ़ जाती है.
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी ताकत इसकी कनेक्टिविटी है, यह उत्तर में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा. दक्षिण में यह अटल प्रगति पथ के जरिए चंबल क्षेत्र को जोड़ेगा. यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं है, बल्कि एक इकोनॉमिक कॉरिडोर है. आगरा और ग्वालियर दोनों ही व्यापारिक केंद्र हैं. एक्सप्रेसवे के किनारे कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट नगर बसने से कमर्शियल प्रॉपर्टी की वैल्यू बढ़ेगी.
आगरा और ग्वालियर के बीच आसान पहुंच से टूरिज्म सेक्टर में होटलों और रेस्टोरेंट्स की मांग बढ़ेगी. एक्सपर्ट के मुताबिक किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के तीन चरण होते हैं, घोषणा, भूमि अधिग्रहण और निर्माण. फिलहाल यह प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण के अंतिम चरण और निर्माण की शुरुआत (जनवरी-फरवरी 2026) पर है. ऐतिहासिक रूप से देखा गया है कि निर्माण शुरू होने के बाद जमीन के रेट सबसे तेज गति से बढ़ते हैं. अगर आप आज सही लोकेशन पर जमीन लेते हैं, तो 2027-28 में प्रोजेक्ट पूरा होने तक आपको बेहतरीन रिटर्न (ROI) मिल सकता है. हालांकि, निवेश से पहले रेरा (RERA) अप्रूवल और जमीन के मालिकाना हक की जांच जरूर कर लें.
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