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बच्चों के भविष्य के लिए कौन-सा निवेश बेहतर, म्यूचुअल फंड या ULIP?

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आजकल उच्च शिक्षा इतनी महंगी हो गई कि हर व्यक्ति अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उसके बचपन से ही बड़ा निवेश शुरू कर देता है. बच्चों के भविष्य के लिए म्यूचुअल फंड या बीमा बाजार में कई तरह के प्रोडक्ट उपलब्ध हैं. बच्चों के बेहतर भविष्य को सिक्योर करने के लिए कौन-सा निवेश साधन बेहतर है? आइए जानते हैं..

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न्यू एज चाइल्ड ULIP प्लान जब आप अपने बच्चे के भविष्य के बारे में प्लान करते  हैं तो उसमें कई तरह की बातें दिमाग में होती हैं. जैसे आगे कभी आर्थिक स्थिति अच्छी न हो, या खुदा न खास्ता आपको कुछ हो गया तो आपके बच्चे की उच्च शिक्षा या उसके बेहतर जीवन पर कोई असर न पड़े. न्यू एज चाइल्ड ULIP प्लान इसी तरह की सुरक्षा प्रदान करते हैं. 

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इसमें फायदा यह होता है कि प्रीमियम माफ करने का विकल्प होता है. यानी बीमा कराने वाला किसी दुर्भाग्यवश नहीं भी रहा तो बाकी सालों के लिए पॉलिसी जारी रहेगी और बच्चे या अन्य परिजनों को प्रीमियम नहीं जमा करना होगा. बाकी प्रीमियम बीमा कंपनी माफ कर देगी और पॉलिसी टर्म पूरा होना पर पूरा मैच्योरिटी अमाउंट बच्चे को मिल जाएगा.

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इस बात का रखें ध्यान इस बात का ध्यान रहे कि म्यूचुअल फंड की तरह यूलिप का निवेश भी शेयर बाजार से लिंक्ड होता है. हालांकि इसमें आपको फंड चुनने का विकल्प दिया जाता है, अगर आप ज्यादा सुरक्षित निवेश चाहते हैं तो इक्विटी यानी शेयर का हिस्सा कम रखने का भी विकल्प चुन सकते हैं. हालांकि बच्चे के भविष्य के लिए ज्यादातर निवेश लॉन्ग टर्म के लक्ष्य वाले होते हैं, इसलिए जानकार कहते हैं कि इक्विटी फंड चुनने में कोई बुराई नहीं है. आपको ज्यादा समझ न आ रहा हो तो आप अपने फंड मैनेजर के भरोसे इसे छोड़ सकते हैं.

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म्यूचुअल फंड बच्चों के भविष्य के लिए निवेश करने का ऑफर देने वाले कई चाइल्ड फोकस्ड म्यूचुअल फंड आते हैं. ये आम म्यूचुअल फंड की तरह ही होते हैं, लेकिन इनमें एक लॉक-इन पीरियड होता है यानी एक निश्चित समय तक आप पैसा नहीं निकाल सकते हैं. यह इसलिए किया जाता है ता​कि निवेशक लंबे समय तक निवेश बनाए रखे.

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उदाहरण के लिए  ICICI प्रुडेंशियल चाइल्ड केयर फंड-गिफ्ट प्लान में पांच साल या बच्चे के परिपक्व होने तक का लॉक-इन पीरियड होता है. इस स्कीम में इक्विटी यानी शेयर बाजार में निवेश का हिस्सा 65 से 100 फीसदी होता है. हालांकि इसमें 35 फीसदी डेट सिक्योरिटीज रखने का विकल्प भी दिया जाता है, जो तुलनात्मक रूप से थोड़े सुरक्षित माने जाते हैं.

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कौन-सा विकल्प बेहतर अब सवाल उठता है कि दोनों में से कौन-सा विकल्प बेहतर है. यदि आपको अपने बच्चे के लिए पांच या छह साल के बाद ही फंड की जरूरत है तो आपके लिए चाइल्ड फोकस्ड म्यूचुअल फंड बेहतर हैं. इसकी वजह यह है कि यूलिप प्लान लंबे अवधि के मैच्योरिटी पीरियड वाले होते हैं. इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रहे कि यूलिप पर जो आप प्रीमियम जमा करते हैं उस पर टैक्स लगता है. हालांकि इस पर मिलने वाला मैच्योरिटी बेनिफिट टैक्स फ्री होती है. इसी तरह म्यूचुअल फंड पर 10 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है.

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अन्य विकल्प यह जरूरी नहीं है कि बच्चे के भविष्य के लिए यूलिप या चाइल्ड फोकस्ड म्यूचुअल फंड में ही निवेश किया जाए. यदि आप शेयर बाजार की जानकारी रखते हैं या किसी फाइनेंशियल प्लानर की सलाह ले सकते हैं तो आप खुद ही कुछ म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं और इसके साथ ही अच्छी राशि का टर्म प्लान ले सकते हैं, जो आपकी अनुपस्थिति में आपके बच्चे की वित्तीय जरूरतों को पूरा करेगा.

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इसी तरह अगर आपकी बेटी है तो आप उसके लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश कर सकते हैं. आप बच्चे के नाम से एक पीपीएफ एकाउंट भी खोल सकते हैं. तो कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यदि कोई यह सोचता है कि उसके न रहने के बाद उसके परिवार को प्रीमियम न देना पड़े तो उसके लिए न्यू एज यूलिप बेहतर है. लेकिन यदि कोई शेयर बाजार में एक्सपोजर से अपने निवेश को बचाना चाहता है तो सुकन्या समृद्धि या पीपीएफ जैसी योजनाओं में भी निवेश कर सकता है.
(www.businesstoday.in के इनपुट पर आधारित)

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