क्रूड ऑयल पर इस समय दुनिया में हाहाकार (Crude Oil Crisis) मचा हुआ है. ऐसा हो भी क्यों न आखिर अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के युद्ध (US-Israel Iran War) ने हालात बदतर जो कर दिए हैं. जंग के बीच कुवैत-कतर जैसे देशों ने तेल-गैस सप्लाई रोकने का ऐलान किया है, तो वहीं ईरान की होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) से टैंकरों की आवाजाही रोकने से क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान (Cruse Oil Price Surge) पर पहुंच गई हैं. इसका असर भी दिखने लगा है और खासतौर पर पाकिस्तान व बांग्लादेश जैसे देशों की टेंशन बढ़ गई है. पाकिस्तान में तो कराची से लेकर लाहौर तक सड़कों पर हाहाकार मचा है, पेट्रोल पंपों पर भी भीड़ है, तो वहीं देश की सरकार ऊर्जा संरक्षण के लिए कोविड-19 के दौर में लागू किए गए प्रतिबंधों पर विचार करने लगी है.
कतर-कुवैत से होर्मुज स्ट्रेट तक का बड़ा रोल
अमेरिका और इजरायल ने बीते 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू किए और फिर मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू हो गया. US-Israel के साथ ईरान के इस युद्ध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमत पर दिखा है. 2022 के बाद पहली बार Brent Crude Price 100 डॉलर के पार निकला है. सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमत करीब 25% से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई. WTI Crude Price भी 24 फीसदी चढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के पार निकली.
ये हालात अमेरिका-ईरान जंग के दौरान लगातार हो रहे हमलों के चलते, कतर-कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों द्वारा सप्लाई रोकने के ऐलान के बाद पैदा हुए हैं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में तेल के टैंकरों की आवाजाही में रुकावट ने आग में घी का काम कर दिया है. दरअसल, Hormuz Strait सबसे प्रमुख समुद्री मार्ग है, जिससे दुनिया की खपत का 20 फीसदी तेल निकलता है.
Pakistan की सड़कों पर मच गया हाहाकार
क्रूड ऑयल की कीमतों में तगड़े उछाल के चलते तमाम ऐसे देशों में असर दिखने लगा है, जो तेल आयात पर काफी हद तक निर्भर हैं. खासतौर पर पाकिस्तान में बेहद बुरा हाल है. सरकार को आनन-फानन में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तक बढ़ानी पड़ी, Fuel Price में 50 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी करने के बाद अब Pakistan Petrol Price 336 रुपये प्रति लीटर, जबकि हाई स्पीड डीजल का भाव 321 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पर पहुंच चुका है. फ्यूल प्राइस बढ़ने के चलते कराची, लाहौर समेत तमाम शहरों के पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ जुटी नजर आई थी.
कोरोना जैसे उपायों की पड़ी जरूरत
इन कदमों से भी कोई बड़ा सुधार देखने को नहीं मिला और शहबाज शरीफ सरकार अब ऊर्जा संरक्षण के लिए Covid-19 के समय में लागू किए गए प्रतिबंधों पर विचार करने को मजबूर है. रिपोर्ट की मानें, तो Pakistan Govt आयातित पेट्रोलियम उत्पादों और RLNG की डिमांड को कम करने के लिए राष्ट्रव्यापी ऊर्जा संरक्षण रणनीति शुरू करने की तैयारी कर रही है.
पाकिस्तानी मीडिया 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में एक चरणबद्ध योजना को अंतिम रूप दिया गया है, जिसकी समीक्षा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shahbaz Sharif) की अध्यक्षता में होने वाली एक आपातकालीन बैठक में की जाएगी. ये प्लान मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच Hormuz Strait में रुकावट और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच व्यापक ऊर्जा संकट आने की संभावना के चलते बनाया गया है.
अधिकारियों ने कोरोना महामारी के दौरान लागू किए गए कई ऊर्जा-बचत उपायों को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है. रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है सरकार की इस रणनीति को तीन चरणों में लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सार्वजनिक क्षेत्र में ऊर्जा-बचत उपायों से होगी,
पाकिस्तान सरकार का ये है प्लान
PAK का तेल भंडार कहां गया, कब होगा यूज?
सबसे बड़ी बात ये है कि पाकिस्तान में ये बुरे हालात बने हैं, जबकि बीते साल पड़ोसी मुल्क देश के तेल भंडार को लेकर दुनिया में ढोल बजाता हुआ नजर आ रहा था. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी Pakistan के इस तेल रिजर्व पर फिदा थे और एक डील का ऐलान कर दिया था. उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ एक नया समझौता किया है, जिसके तहत दोनों देश पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार के विकास पर मिलकर काम करेंगे. Donald Trump ने तो यहां तक कह दिया था कि 'क्या पता एक दिन पाकिस्तान भारत को तेल बेच रहा हो'.
पाकिस्तानी दावे देश के ऊर्जा मंत्रालय और बंद हो चुकी यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) के बीच 2020 में की ज्वाइंट स्टडी पर आधारित थे.रिपोर्ट्स की मानें, तो पाकिस्तान ने 2025 में अरब सागर (Arabian Sea) में अपने समुद्री क्षेत्र में बड़े तेल और गैस भंडार मिलने का दावा किया था, जो कराची के तट के पास ऑफशोर ब्लॉक में बताया गया था. उस समय कुछ पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में भी दावा किया गया था कि यहां बहुत बड़े तेल और गैस भंडार मिल सकते हैं. हालांकि, इसे प्रमाणित सिद्ध रिजर्व माना नहीं गया. अब दुनिया में क्रूड ऑयल संकट के बीच पाकिस्तान के बदतर हालात भी इन दावों को खोखला साबित करते नजर आ रहे हैं.
दीपक चतुर्वेदी