अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध (US-Iran War) भले ही सीजफायर के चलते थमा हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पाई है और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर टेंशन चरम पर बनी हुई है. इस बीच देखने को मिला है कि दोनों देशों के तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के रूप में पेश किया है, हालांकि, समझौता कराने की उसकी कोशिशें हर बार ही फेल हुई हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने अब कहा है कि अमेरिका से सिर्फ एक शर्त पूरी कर दे तो ईरान के साथ शांति समझौता कराया जा सकता है. Pakistan के मुताबिक, अगर यूएस का प्रोजेक्ट फ्रीडम रुकता है, तो वो दोनों देशों में बात बनवा सकता है. इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने बताया है कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को बचाने के लिए शुरू किए गए मिशन Project Freedom को पाकिस्तान के अनुरोध पर रोकने का फैसला भी कर लिया है.
'प्रोजेक्ट फ्रीडम' रुकने के पीछे PAK
एनबीसी न्यूज के साथ एक इंटरव्यू के दौरान मार्को रूबियो ने इस बारे में बताया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के प्रोजेक्ट फ्रीडम को अस्थायी तौर पर रोकने का कारण पाकिस्तान रहा है. पाकिस्तानी पक्ष ने कहा कि अगर आप लोग इस मिशन को रोक देते हैं, तो हमें लगता है कि एक शांति समझौते पर पहुंचा जा सकता है. इसलिए हमले इसे रोकने पर सहमति जताई है, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान के साथ इस समस्या का कूटनीतिक समाधान ही चाहते हैं.
बता दें कि ट्रंप भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ व्यापक शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति के कारण प्रोजेक्ट फ्रीडम रोका जाएगा, जबकि Hormuz Strait पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी.
क्या फिर फेल होगा पाकिस्तान?
बीते कुछ महीनों में देखें, तो अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराने में मध्यस्थ के तौर पर लगातार पाकिस्तान आगे रहा है. लेकिन हर बार ही वो फेल नजर आया है. फिर बात चाहे इस्लामाबाद में करीब 22 घंटे चली बातचीत के बेनतीजा निकलने की हो या फिर प्रोजेक्ट फ्रीम रुकवाने की. दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि Project Freedom रुका हुआ है और फिर भी टेंशन कम होती नजर नहीं आ रही है. पहले ईरान के प्रस्ताव को ट्रंप ने ये कहकर ठुकरा दिया कि ये उन्हें मंजूर नहीं है, तो ईरान ने भी अमेरिका के प्रस्ताव को आत्मसमर्पण की तरह बताते हुए खारिज कर दिया.
ट्रंप की धमकी का सिलसिला फिर शुरू
ताजा हालातों की बात करें, तो डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का सिलसिला जारी है. हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट कर ईरान का बड़ी धमकी दे डाली है. उन्होंने लिखा, 'ईरान के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है, तेहरान को एक बेहतर प्रस्ताव के साथ आगे आना ही होगा, नहीं तो उसे और भी कड़े हमलों का सामना करना पड़ेगा.' इन धमकियों और ईरानी हमलों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आग लगी नजर आ रही है. सोमवार को ये फिर से तेज उछाल के साथ करीब 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, और दुनिया नई जंग की आहट के साथ महंगाई के जोखिम से सहमी है.
मार्को रूबियो की मानें, तो राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी ईरान के साथ कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहे हैं और हम प्रयास जारी रखेंगे. हालांकि, समस्या यह है कि ईरानी आंतरिक रूप से विभाजित हैं, जिसके कारण ईरान की ओर से जवाबी प्रस्ताव पाना मुश्किल हो रहा है.
रूबियो बोले- ये डेडलाइन बताना मुश्किल
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के कूटनीतिक समाधान तक पहुंचने में कितना समय लगेगा, इस बारे में कोई निश्चित डेडलाइन बताना मुश्किल है, लेकिन अमेरिका समाधान तक पहुंचना चाहता है. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अमेरिका ने भले ही प्रोडेक्स फ्रीडम रोक दिया है, लेकिन ईरानियों ने जहाजों पर हमला जारी रखा है.
रूबियो के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट एक इंटरनेशनल समुद्री रूट है और सिर्फ ईरान का नहीं है. होर्मुज को फिर से खोलने के दो तरीके नजर आ रहे हैं, कि या तो ईरान ऐसा करने का फैसला करें, या पूरी दुनिया उनके कारनामों के लिए जुर्माना लगाने का फैसला करे.
आजतक बिजनेस डेस्क