वेस्ट एशिया में जंग ने ग्लोबल स्तर पर एनर्जी संकट पैदा कर दिया है, जिस कारण महंगाई का खतरा भी बढ़ गया है. इस बीच दुनिया भर के बाजारों में भारी गिरावट आई है. ग्लोबल मार्केट भी तेजी से बिखरा है और शुक्रवार को भारत समेत एशियाई बाजार भी बुरी तरह से गिरे हैं. इसके अलावा, कुछ और ऐसे बड़े संकेत सामने आए हैं, जो बड़े एक्शन की ओर इशारा कर रहे हैं.
शेयर बाजार में भारी गिरावट
गुरुवार को अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट आई थी. डॉउ जोन्स 470 अंक या 1 फीसदी गिरकर 45,981 पर बंद हुआ. S&P में भी 0.43% की गिरावट देखने को मिली. वहीं शुक्रवार को एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा. जापान का निक्केई भी 0.43 फीसदी गिर गया. चीनी मार्केट में भी गिरावट देखी जा रही है और साउथ कोरिया का बाजार कोस्पी भी 0.40 फीसदी टूटा है.
इसके साथ ही भारतीय शेयर बाजार भी तेजी से गिरा है. शुक्रवार को सेंसेक्स 1690 अंक या 2.25% की गिरावट आई और यह 73,583 पर क्लोज हुआ. जबकि निफ्टी में 486 अंक या 2.09 फीसदी की गिरावट रही, जो 22,819 पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों को 9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ.
कच्चे तेल के दाम में उछाल
शेयर बाजार में गिरावट के दौरान ही कच्चे तेल के दाम में भी उछाल देखा जा रहा है. बुधवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे चले गए थे, लेकिन गुरुवार को इसमें तेजी आई और यह 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया. शुक्रवार को भी इसमें तेजी देखी जा रही है. शुक्रवार की शाम ब्रेंट क्रूड ऑयल 2.82% चढ़कर 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है. ट्रेडिंग वॉल्यूम में भी इजाफा हुआ है, जो संकेत देता है कि निवेशक भी इसे लेकर बुलिश हैं, और कीमतें आगे भी बढ़ सकती हैं.
कच्चे तेल के साथ ही नेचुरल गैस के दाम भी बढ़ रहे हैं. इंटरनेशनल मार्केट में नेचुरल गैस के दाम करीब 3 फीसदी की तेजी आई है. ज्यादातर देखा गया है कि जब-जब तेल और गैस के दाम में उछाल आता है, तब ग्लोबल स्तर पर कुछ बड़ी घटना होती है.
डॉलर में भी तेजी
डॉलर इंडेक्स में तेजी जारी है, जो यह संकेत देता है कि डॉलर मजबूत हो रहा है. रुपया डॉलर की तुलना में 95 लेवल के करीब पहुंच गया है. डॉलर में तेजी यह संकेत देती है कि एनर्जी सप्लाई बाधित हुई है, जिस कारण हर कोई डॉलर में जहां से भी संभव हो सके तेल-गैस का आयात कर रहा है. खासकर एनर्जी आयात पर निर्भर देश सबसे ज्यादा एनर्जी पर डॉलर खर्च कर रहे हैं. इसी कारण उनके देश की करेंसी भी तेजी से गिर रही है.
ट्रंप और अमेरिका की रणनीति
ग्लोबल स्तर पर हो रहीं ये चीजें बड़े उथल-पुथल का संकेत दे रही हैं. जबकि ट्रंप ने ईरान के साथ जंग को लेकर बातचीत सही ढंग से चलने की जानकारी दी है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के एनर्जी प्लांट्स और तेल सुविधाओं पर अगले 10 दिन तक हमला नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि बातचीत चल रही है और शांति का मौका है. हालांकि, तमाम सोर्स संकेत दे रहे हैं कि बातचीत के साथ-साथ अमेरिकी सुरक्षा विभाग पेंटागन सैन्य कार्रवाई के विकल्प पर भी आगे बढ़ रहा है. वैसे भी हमेशा वीकेंड पर ट्रंप बड़े फैसले लेते हैं, इसलिए शनिवार और रविवार का दिन अहम रहने वाला है.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक, पेंटागन मिडिल ईस्ट में 10,000 तक अतिरिक्त ग्राउंड ट्रूप्स भेजने की योजना बना रहा है. इससे ट्रंप को ज्यादा मिलिट्री ऑप्शन्स मिल सकें. वहीं 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, तब भी बड़े स्तर पर बातचीत चल रही थी. इस बातचीत के बीच ही ईरान पर हमला हो गया और सुप्रीम लीडर खामेनेई समेत 40 टॉप कमांडर मारे गए थे. ऐसे में देखा जाए तो मौजूदा स्थिति कुछ बड़ी घटना का संकेत दे रही है.
आजतक बिजनेस डेस्क