अमेरिका ईरान जंग ने सिर्फ तेल आपूर्ति को ही बाधित नहीं किया है, बल्कि दुनिया भर में महंगाई का संकट पैदा कर दिया है. ग्लोबल इकोनॉमी में भी मंदी का खतरा पैदा कर दिया है. साथ ही एशिया से लेकर ग्लोबल स्तर तक के शेयर बाजारों को भारी नुकसान पहुंचाया है. भारतीय शेयर बाजार को भी बड़ी गिरावट का सामना करना पड़ा.
मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी दर्दनाक रहा. विदेशी निवेशकों ने इस महीने के दौरान इतने शेयर बेच डाले कि रिकॉर्ड ही टूट गया. मार्च 2026 से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था. यही कारण रहा है कि मार्च में ही निफ्टी 2500 अंक या 10 फीसदी से ज्यादा गिर गया. Sensex 8300 अंक या 10.5 फीसदी गिर गया. साथ ही डॉलर की तुलना में रुपये में भी भारी गिरावट रही.
विदेशी निवेशकों ने किया बड़ा खेल
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने मार्च 2026 में अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया. इस महीने के दौरान उन्होंने 1.11 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. अभी तक विदेशी निवेशकों ने इतने शेयरों की बिकवाली नहीं की थी. इससे पहले अक्टूबर 2024 में 94,000 करोड़ रुपये के निकासी की थी. विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा मार्च 2026 एक महीने के दौरान सबसे ज्यादा शेयरों की बिकवाली का मंथ रहा है.
जंग ने बिगाड़ा बाजार का मूड
इस बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध था, जिसने वैश्विक निवेशकों के जोखिम से बचने के नजरिए को बनाए रखा. दिलचस्प बात यह है कि मार्च 2026 के हर ट्रेडिंग सेशन में FII ने शेयरों की बिक्री की. दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने पिछले महीने 1.28 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे बड़े पैमाने पर बिकवाली और उच्च अस्थिरता से प्रभावित शेयर बाजार को सहारा मिला.
वित्त वर्ष 26 के अंतिम कारोबारी दिन, DII ने 14,895 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जो डेढ़ साल से अधिक समय में एक ही सत्र में सबसे मजबूत घरेलू खरीदारी है. इसी सेशन के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 11,163 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.
निवेशकों के 51 लाख करोड़ डूबे
पूरे महीने में BSE-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 52 लाख करोड़ रुपये घटकर 411 लाख करोड़ रुपये आ गया. हालांकि, बुधवार को शेयर बाजार में तेजी के कारण निवेशकों को 11 लाख करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ और यह 422 लाख करोड़ रुपये हो गया.
रुपये को भी झटका
जंग के कारण भारत ऑयल और गैस के इम्पोर्ट पर ज्यादा फोकस है, जिस कारण डॉलर में खरीदारी बढ़ी है. ऐसे में रुपये में गिरावट देखने को मिली है. रुपया डॉलर की तुलना में 95 मार्क के करीब बना हुआ है. रुपये में तेज गिरावट की वजह विदेशी निवेशकों की सेलिंग भी माने जा रहे हैं.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)
हिमांशु द्विवेदी