जंग के बीच कतर ने भारत को होने वाली गैस सप्लाई में की बड़ी कटौती, बताई वजह

कतर ने ईरानी हमले के बाद बड़ा कदम उठाते हुए भारत को होने वाले LNG निर्यात में भारी कटौती कर दी है. भारत नैचुरल गैस के लिए कतर पर निर्भर है. कतर के इस फैसले के बाद भारत की कंपनियों ने इंडस्ट्रीज को होने वाली गैस सप्लाई में कटौती की है.

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एक मार्च को कतर पर ईरानी हमले के बाद निकलता धुआं. (Photo: Reuters) एक मार्च को कतर पर ईरानी हमले के बाद निकलता धुआं. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:27 PM IST

ईरान युद्ध का भारत पर असर दिखना शुरू हो गया है. भारत को नैचुरल गैस की सप्लाई करने वाले कतर ने बड़ा कदम उठाते हुए इंडिया को LNG निर्यात में 40 परसेंट तक की कटौती कर दी है. कतर दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उत्पादन करने वाला देश है. ईरान और इजरायल-अमेरिका जंग शुरू होते ही कतर पर हमले हुए हैं. 

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ईरान ने अमेरिका से बदला लेते हुए कतर में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस पर हमला किया. इसके अलावा ईरान ने कतर में मौजूद दुनिया के सबसे बड़े LNG प्लांट में से एक पर ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला किया. ईरान ने सोमवार को कतर एनर्जी के दो प्लांट रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया. 

ये हमला इतना शक्तिशाली था कि कतर ने प्लांट को ही बंद करने का फैसला किया. इसका दुनिया भर में गैस सप्लाई पर असर पड़ना लाजिमी था. 

भारत कतर से निर्यात होने वाले नैचुरल गैस के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है. 

भारत हर साल लगभग 27 मिलियन टन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इंपोर्ट करता है, जिसमें से लगभग 40 परसेंट कतर सप्लाई करता है. भारत यह गैस पावर जेनरेशन और फर्टिलाइजर प्रोडक्शन से लेकर CNG डिस्ट्रीब्यूशन और पाइप्ड कुकिंग गैस नेटवर्क तक, अलग-अलग सेक्टर में डिमांड को पूरा करने के लिए इंपोर्ट करता है.

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गैस इंपोर्टर पेट्रोनेट LNG लिमिटेड ने गैस मार्केटर्स को बताया है कि कतर ने अपना लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्रोडक्शन रोक दिया है, क्योंकि ईरान ने इजरायल और US के हमलों के बदले में खाड़ी देशों पर हमला करना जारी रखा है. 

यह भी पढ़ें: सबसे बड़ी रिफाइनरी बंद, सबसे बड़ा गैस प्लांट ठप... ईरान ने सऊदी-कतर की 'ताकत' को किया तबाह!

इन हमलों ने होर्मुज स्ट्रेट से तेल और LNG शिपमेंट को भी लगभग रोक दिया है, जिससे दुनिया भर में एनर्जी की कीमतें बढ़ गई हैं और साथ ही युद्ध के जोखिम वाले इंश्योरेंस और शिपिंग की लागत भी तेज़ी से बढ़ गई है.

ईरान होर्मुज स्ट्रेट को कंट्रोल करता है. यह एक ज़रूरी समुद्री चोकपॉइंट है जिससे भारत का लगभग 50 परसेंट कच्चा तेल इंपोर्ट और लगभग 54 परसेंट LNG सप्लाई गुजरती है. यह न सिर्फ़ कतर से बल्कि UAE से भी LNG के लिए ट्रांजिट का रास्ता है. 

सूत्रों ने बताया कि पेट्रोनेट ने अपने गैस लेने वालों, GAIL लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को कतर से सप्लाई रुकने के बारे में बताया है.  बदले में गैस मार्केटर्स ने CNG रिटेलिंग के लिए फ्लो रेट बनाए रखते हुए इंडस्ट्रीज़ को सप्लाई कम कर दी है. 

उन्होंने कहा कि यह कटौती 10 परसेंट से 40 परसेंट तक है. 

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पेट्रोनेट का कतर से हर साल 8.5 मिलियन टन LNG खरीदने का लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट है. इसके अलावा यह स्पॉट मार्केट से भी कतारी LNG खरीदता है. पेट्रोनेट के अलावा IOC जैसी कंपनियों के UAE के साथ LNG इंपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट हैं. 

सूत्रों ने कहा कि GAIL और IOC कमी को पूरा करने के लिए स्पॉट या मौजूदा मार्केट का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन कीमतें बढ़ गई हैं. स्पॉट मार्केट में LNG अब USD 25 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट पर है, जो टर्म कॉन्ट्रैक्ट रेट से लगभग दोगुना है. 

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