डॉलर से दूरी क्यों जरूरी? रूस का हश्र सबने देखा... इसलिए PM मोदी की अपील- सोना मत खरीदें!

PM Modi Economic Strategy: पीएम मोदी की अपील के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की आर्थिक स्थिरता है. वो चाहते हैं कि जितना पैसा घर में आ रहा है, उससे ज्यादा बाहर न जाए. सोना और विदेश यात्रा ऐसे खर्च हैं, जिन्हें टाला जा सकता है. लेकिन कच्चा तेल खरीदना फिलहाल देश की मजबूरी है.

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सोना नहीं खरीदने के पीछे पीएम मोदी का जानिए असली प्लान. (Photo: AI Generated) सोना नहीं खरीदने के पीछे पीएम मोदी का जानिए असली प्लान. (Photo: AI Generated)

अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:48 AM IST

चौक-चौराहे से लेकर सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा हो रही है कि आखिर प्रधानमंत्री ने सोना खरीदने से क्यों मना किया? दरअसल, रविवार को पीएम मोदी ने देश के लोगों से कई अपील की, सोमवार को भी उन्होंने फिर यही बात दोहराई. जिसके बाद अब पीएम मोदी के बयान के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं. क्या वो किसी बड़े संकट के संकेत दे रहे हैं?

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पीएम मोदी ने असल में देश की जनता से अगले एक साल तक सोने से दूरी बनाने की अपील की है. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल और खाने के तेल की खपत पर भी अंकुश लगाने की सलाह दी है. साथ ही अगर विदेश घूमने की शौकीन हैं, तो फिलहाल कुछ दिनों के लिए उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दें. अब पीएम मोदी के इस बयान के निचोड़ निकाल जा रहे हैं, वैश्विक परिदृश्य में इस अपील के आर्थिक और राजनीतिक मायने अलग-अलग हैं. क्योंकि पीएम मोदी ने अपने बयान में मुख्यतौर पर सोना, कच्चा तेल और खाद्य तेल के जिक्र किए हैं. जो कि हर दिन भारी मात्रा में आयात किए जाते हैं.

पीएम मोदी की 140 करोड़ लोगों से अपील 

ये बात किसी छुपी नहीं है कि भारत आर्थिक तरक्की की राह पर दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ रहा है, और ये पूरी दुनिया जानती भी है, लेकिन वैश्विक हालात फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था के अनुकूल नहीं है. खासकर पश्चिम-एशिया में तनाव का तापमान हर रोज ऊपर-नीचे हो रहा है. जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को चोट पहुंच रही है. 

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हॉर्मुज जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है, वहां भी तनाव चरम पर है. नतीजा यह कि कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई, जो कि युद्ध से पहले 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. इसे खरीदने के लिए हमें अपनी करेंसी 'रुपया' नहीं, बल्कि अमेरिकी डॉलर देना पड़ता है.

वहीं जब-जब कच्चा तेल महंगा होता है, भारतीय अर्थव्यवस्था डगमगाती है. क्योंकि महंगे दाम पर तेल खरीदने के लिए अतिरिक्त डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. पीएम मोदी जानते हैं कि तेल हमारी मजबूरी है, ट्रक चलेंगे तभी अनाज पहुंचेगा, फैक्ट्रियां चलेंगी तभी सामान बनेगा. इसलिए उन्होंने 'स्वैच्छिक' चीजों पर कटौती करने की अपील की है. अगर आप सोना नहीं खरीदेंगे, खाद्य तेल कम इस्तेमाल करेंगे या विदेश नहीं घूमेंगे, तो जो डॉलर वहां खर्च होने थे, सरकार उन्हें तेल खरीदने में इस्तेमाल कर पाएगी. यह सीधे तौर पर देश के विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़ा फैसला है. 

रुपये में जान फूंकने की कोशिश
जब हम बहुत ज्यादा आयात करते हैं, तो बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये की वैल्यू गिरती है. फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले फिसलकर 95 के पार चला गया है. अगर इसी तरह से रुपया गिरता रहा, तो कुछ ही दिनों में सेंचुरी लग जाएगी. डॉलर की कीमत 100 रुपये के करीब पहुंचना यानी देश को महंगाई अपनी गिरफ्त में ले लेगी. पीएम की अपील का मकसद डॉलर की मांग को कम करना है, ताकि रुपये को और गिरने से बचाया जा सके.

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दरअसल, पीएम मोदी की अपील के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा है. सरकार का मकसद 'करेंट अकाउंट डेफिसिट' को काबू में रखना है. आसान शब्दों में कहें तो जितना पैसा घर में आ रहा है, उससे ज्यादा बाहर न जाए. सोना और विदेश यात्रा ऐसे खर्च हैं, जिन्हें टाला जा सकता है. क्योंकि सोने का भारी आयात देश के व्यापार घाटे को बढ़ाता है.

भारत ने वित्त-वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 721.03 टन सोना आयात किया था. इसका कुल आयात मूल्य लगभग 6,11,830 करोड़ रुपये रहा. इस हिसाब से देखें तो भारत रोजाना औसतन 1.97 टन (करीब 2,000 किलो) सोना आयात करता है, यानी हर घंटे करीब 82 किलो सोना आयात करता है. यही नहीं, हमारे देश में शादियों के सीजन और त्योहारों के दौरान सोने की मांग औसतन हर रोज 4 से 5 टन तक पहुंच जाता है. पीएम मोदी इसलिए लोगों से एक साल तक सोने से दूरी बनाए रखने की अपील की है, ताकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे.

डॉलर के दूरी बनाने का ये असली मकसद

अब आते हैं, उस बड़े सवाल पर क्या भारत डॉलर से दूरी बना रहा है? इसका जवाब 'हां' या 'ना' में नहीं दिया जा सकता. भारत डॉलर को खत्म नहीं करना चाहता, लेकिन डॉलर पर निर्भरता को कम जरूर करना चाहता है. डॉलर की ताकत को लेकर दुनिया आज दो हिस्सों में बंटी दिख रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से रूस के डॉलर रिजर्व फ्रीज किए गए, उसने भारत समेत कई देशों को सतर्क कर दिया है. पीएम मोदी का संदेश साफ है कि हमें अपनी अर्थव्यवस्था को इतना मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है कि वैश्विक बाजार में डॉलर के उतार-चढ़ाव से गरीब और मध्यम वर्ग की थाली पर असर न पड़े. जब हम डॉलर का इस्तेमाल कम करेंगे, तो वैश्विक झटकों का असर हम पर कम होगा.

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पीएम ने वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) और कारपूलिंग की बात क्यों की? यह सिर्फ ट्रैफिक कम करने के लिए नहीं है. अगर 20% ऑफिस जाने वाले लोग घर से काम करें, तो पेट्रोल-डीजल की खपत में भारी गिरावट आएगी. खपत कम होगी, तो डिमांड भी घटेगी. यानी यह 'डिजिटल इंडिया' का वह फेज है, जहां इंटरनेट का इस्तेमाल देश की विदेशी मुद्रा बचाने के हथियार के रूप में किया जा रहा है.
 

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