Modi Govt Plan-B: होर्मुज बंद, नो टेंशन, सरकार का प्लान-बी एक्टिव... जानिए क्या है 'स्पेशल-41'

Middle East War ने तेल-गैस संकट में इजाफा किया है और इससे दुनिया के तमाम देशों में एनर्जी क्राइसिस से हाल बेहाल हो गया है, लेकिन भारत अब सिर्फ खाड़ी देशों पर ऊर्जा के लिए निर्भर नहीं है, बल्कि 41 देशों से खरीदारी कर रहा है.

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तेल-गैस संकट से दुनिया के तमाम देशों में मचा है हाहाकार. (File Photo: ITG) तेल-गैस संकट से दुनिया के तमाम देशों में मचा है हाहाकार. (File Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 26 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:55 AM IST

मिडिल ईस्ट युद्ध ने दुनिया की चिंता बढ़ाई है और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल-गैस का संकट खड़ा हो गया है. पाकिस्तान हो, बांग्लादेश हो या फिर अन्य देश, जो इसके आयात पर निर्भर हैं वो परेशान हैं. कई देशों को तो कोरोना महामारी के समय से जैसे नियम लागू करने पड़े हैं. इसका बड़ा उदाहरण पाकिस्तान और साउथ कोरिया हैं. बात भारत की करें, तो बीते कुछ दिनों में यहां भी खासतौर पर एलपीजी की किल्लत देखने को मिली है, लेकिन इसके गहराने से पहले ही मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) एक्टिव हो चुका है. 

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सरकार ने भी साफ किया है कि संकट तो है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत ने अपने ऊर्जा आयात में विविधिकरण किया है और तेल-गैस के लिए सिर्फ खाड़ी देशों के भरोसे नहीं है. यानी अब भारत में अलग-अलग कई देशों से तेल आ रहा है और लिस्ट में रूस से लेकर अंगोला तक का नाम शामिल है.  

दुनिया में मची हाय-तौबा, लेकिन भारत...
भले ही अमेरिका होर्मुज को लेकर तमाम दावे कर रहा है, या फिर रिपोर्ट्स की मुताबिक ईरान भी सीमित जहाजों को आवाजाही की परमिशन देने की बात कह रहा हो, लेकिन Hormuz Crisis से जितनी हाय-तौबा पाकिस्तान जैसे देशों में मची हुई है, भारत में नहीं है. इसकी वजह वहीं PLAN-B है, जिसे संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में समझाया है. 

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पीएम मोदी ने लोकसभा और राज्यसभा में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग बात करते हुए कहा था कि इस युद्ध से हालत चिंताजनक, क्योंकि कच्चे तेल, गैस की जरूरत का ज्यादातर हिस्सा यहीं से आता है और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बंद होना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. PM Modi के मुताबिक, भारत ने लगातार अपने आयात को डाइवर्सिफाई किया है और पहले जहां देश में सिर्फ 27 देशों से एनर्जी आयात किया जाता था, वो अब बढ़कर 41 देशों तक पहुंच चुका है. इससे संकट के समय में भी एनर्जी सप्लाई सुचारू रखने में मदद मिली है. ब्लूमबर्ग के मुताबिक, हाल में ही होर्मुज में व्यवधान के बीच भारत ने रूस से 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा है.

कहां-कहां से आ रहा भारत में तेल-गैस
भारत खाड़ी देशों से तो तेल-गैस का आयात करता ही है और कुल इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है. लेकिन, भारत अन्य कई देशों से भी एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है, जो यह संकेत देता है कि अब देश सिर्फ स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज या खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है. 

रिपोर्ट्स की मानें, तो युद्ध के चलते महंगे मिडिल ईस्‍ट तेल की उपलब्धता कम होने के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने वेस्‍ट अफ्रीकी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के तेल की ओर रुख किया है. हाल ही में भारतीय कंपनियों ने जहां अंगोला से तेल खरीदा है. बता दें कि लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाले बाब अल-मंडेब समुद्री मार्ग के जरिए अंगोला-नाइजीरिया जैसे देशों से तेल भारत में पहुंच रहा है, तो वहीं कांगो, गैबॉन और सूडान जैसे देशों से भी तेल आ रहा है.  रूस से तेल आयात किया जा रहा है, जो डेनिश स्ट्रेट से रास्ते भारत पहुंचता है. 

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PAK-साउथ कोरिया में बुरा हाल
भारत का आयात विविधिकरण वाला प्लान-बी काफी हद तक देश में राहत पहुंचा रहा है, जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान की बात करें, तो शहबाज शरीफ सरकार ने तेल-गैस संकट के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तगड़ा इजाफा किया है, स्कूलों की पढ़ाई फिर से ऑनलाइन मोड में आ गई है. इसके अलावा सरकारी गाड़ियों में 60% कटौती, सांसदों और मंत्रियों की सैलरी कट, सरकारी विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20% की कटौती, बैठकों को वर्चुअल बैठकों जैसे उपाय ऊर्जा सुरक्षा के लिए उठाए हैं. 

इसके अलावा साउथ कोरिया में भी बुरा हाल है और तेल-गैस संकट के बीच वहां की सरकार ने नहाने-धोने पर भी पाबंदियां लगाई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में लोगों से कम नहाने, सप्ताह के अंत में वॉशिंग मशीन का यूज कर कपड़े धोने की अपील की गई है, तो मोबाइल फोन या इलेक्ट्रिक चार्ज को सिर्फ दिन में चार्ज करने के लिए कहा गया है. 

संकट में भी भारत की तैयारी पक्की
भारत की बात करें, प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आंकड़े पेश करते हुए बताया था कि भारत के पास 53 लाख टन से ज्यादा का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है और हमने वैकल्पिक ईंधन के विकल्पों की ओर कदम बढ़ाए हैं, जो भारत का भविष्य सुरक्षित करेंगे.

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भारत ने कच्चा तेल, LNG-LPG के आयात को 27 से बढ़ाकर जहां 41 देशों तक फैलाया है, तो स्ट्रेटिजिक पेट्रोलियम रिजर्व को 53 लाख टन से बढ़ाकर 65 लाख टन तक पहुंचाने का कदम बढ़ाए हैं, रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाया है. घरेलू गैस उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ ही देश में लगातार पाइप वाली नेचुरल गैस (PNG) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. 

LPG का आयात भी कई देशों से 
देश में घरेलू एलपीजी उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ ही कई देशों से भारत में LNG-LPG की अतिरिक्त खेपें आई हैं. LPG Crisis के बीच बीते दिनों एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि अल्जीरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नॉर्वे और अन्य देशों से एलएनजी और एलपीजी के अतिरिक्त भंडार वाले कार्गो आ रहे हैं. सरकार का प्लान बी माना जाने वाला ये विविधीकरण वर्तमान में उपजे संकट में कारगर साबित होता दिख रहा है. 

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