डोनाल्ड ट्रंप जहां एक ओर दुनियाभर के देशों को टैरिफ की नई धमकियां (Donald Trump Tariff Warnings) देते हुए डराने में लगे हुए हैं, तो वहीं भारत अलग ही खेल खेलते हुए लगातार इसे धुआं-धुआं करते हुए आगे बढ़ रहा है. टैरिफ के बावजूद जहां भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) लगातार तेज रफ्तार से भाग रही है, तो वहीं भारत एक के बाद एक बड़ी ट्रेड डील करता जा रहा है. ओमान, न्यूजीलैंड के बाद अब 27 जनवरी मंगलवार को भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बड़े मुक्त व्यापार समझौते का ऐलान होने जा रहा है, जो ट्रंप के टैरिफ को करारा जबाव होगा.
ट्रंप टैरिफ की भरपाई करेगी EU Deal
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थी और 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी. उन्होंने India-EU FTA को 'मदर ऑफ ऑल डील्स' (Mother Of All Deals) कहकर संबोधित किया है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि इस डील के होने के बाद भारत को और भी बड़े बाजार मिलेंगे और इससे अमेरिकी टैरिफ अटैक से होने वाले नुकसान की भरपाई भी संभव होगी.
डील से व्यापार-निवेश को बढ़ावा
रिपोर्ट्स की मानें, तो वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को भारत-ईयू एफटीए पर बात करते हुए बताया था कि दोनों ने प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के लिए बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है और इसका औपचारिक ऐलान 27 जनवरी मंगलवार को किया जाएगा. अग्रवाल ने इस डील को संतुलित और दूरदर्शी बताते हुए कहा कि इससे यूरोपीय संघ के साथ भारत के आर्थिक एकीकरण को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
कॉमर्स सेक्रेटरी के हवाले से रिपोर्ट्स में बताया गया है कि समझौता अंतिम रूप ले चुका है, इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा. इसके ऐलान के बाद यह India-EU FTA अगले साल किसी समय लागू होगा.
बड़ा है भारत-EU के बीच कारोबार
भारत-EU के बीच बड़ा कारोबारी रिश्ता है और ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट को देखें, तो इससे घरेलू उद्योग को लागत कम करने के साथ ही व्यापार का विस्तार करने में मदद मिल सकती है. जीटीआरआई के फाउंडर अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, एफटीए के तहत टैरिफ में कटौती (Tariff Cut) से मुख्य रूप से इनपुट लागत में कमी आएगी और उत्पादकों व उपभोक्ताओं को फायदा होगा. ट्रेड डाटा पर नजर डालें, तो FY2025 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच वस्तुओं का व्यापार 136.53 अरब डॉलर का रहा. इसमें भारत ने ईयू से 60.7 अरब डॉलर का सामान आयात किया, जबकि 75.9 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया.
इन चीजों का आयात-निर्यात ज्यादा
आयात में सबसे आगे हाई कैटेगरी मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमान, मेडिकल उपकरण और साइंटिफिक उपकरण शामिल रहे. वहीं भारत से निर्यात किए जाने वाले सामानों में सबसे ऊपर रिफाइंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, कपड़े, मशीनरी और कंप्यूटर, लोहा-इस्पात, फार्मा प्रोडक्ट्स और जेम्स एंड ज्वेलरी आगे थे.
मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, India-EU FTA से 90% से ज्यादा सामानों पर टैरिफ कट या इसे हटाया जा सकता है और इससे खासतौर पर कपड़े, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स और आईटी सर्विसेज समेत अन्य सेक्टर्स को बड़ा लाभ होगा.
India-EU Deal के फायदे
ये नुकसान भी संभव
फायदों के साथ ही अगर बात करें, संभावित नुकसान के बारे में तो तकनीक और फाइनेंशियली यूरोपीय कंपनियां ज्यादा मजबूत हैं, तो ऐसे में भारत के छोटे उद्योगों, लोकल उत्पादकों पर दबाव देखने को मिल सकता है. हालांकि, भारत ने अब तक किए गए तमाम समझौतों में एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा है, लेकिन अगर इस डील में यूरोप के डेयरी और एग्री प्रोडक्ट्स का भारत में एंट्री मिलती है, तो ये देश के किसानों की कमाई पर असर डाल सकता है. हालांकि, इसकी उम्मीद बेहद कम ही है.
आजतक बिजनेस डेस्क