अब तक ₹2 लाख करोड़... ऐसा क्या डर, जिससे विदेशी निवेशकों का मूड खराब?

FPI भारतीय शेयर बाजार से लगातार निकलते जा रहे हैं. मार्च और अप्रैल महीने में रिकॉर्ड बिकवाली करने के बाद अब मई महीने का डेटा भी चिंता बढ़ाने वाला है.

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विदेशी निवेशकों की निकासी का सिलसिला जारी. (Photo: Reuters) विदेशी निवेशकों की निकासी का सिलसिला जारी. (Photo: Reuters)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 10 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के निकलने (FPI Sell Off) का सिलसिला लगातार जारी है. मई महीने में भी एफपीआई लौटते नजर नहीं आ रहे हैं. इनकी बेरुखी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल सिर्फ फरवरी महीने को छोड़कर अब तक जबर्दस्त बिकवाली देखने को मिली है और निकासी का आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया है. इसमें सबसे बड़ा रोल ग्लोबल टेंशन का रहा है, जिसके चलते निवेशक सतर्क मोड में हैं. 

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अमेरिका-ईरान में फरवरी के आखिरी दिन से शुरू हुए युद्ध से गहराई ग्लोबल टेंशन (Global Tension) ने एफपीआई के बिकवाली की रफ्तार को और भी तेज करने का काम किया है. 

मई में अब तक निकाली इतनी रकम 
पीटीआई की रिपोर्ट में डिपॉजिटरी के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि चालू मई महीने में अब तक भारतीय बाजार से FPI Sell Off का आंकड़ा 14,231 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. इससे पहले अप्रैल महीने में भी विदेशी निवेशकों की तगड़ी बिकवाली देखने को मिली थी और उन्होंने भारतीय इक्विटी मार्केट से 60,847 करोड़ रुपये निकाले थे. 

मई की अब तक की निकासी को जोड़कर देखें, तो 2026 में अब FPI की निकासी का कुल आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है. जबकि इससे पिछले पूरे साल 2025 में ये 1.66 लाख करोड़ रुपये था. 

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फरवरी छोड़, हर महीने बिकवाली
इस साल का महीनेबार आंकड़ा देखें, तो सिर्फ फरवरी 2026 में विदेशी निवेशकों द्वारा खरीदारी की गई थी, जबकि इसके अलावा बाकी सभी महीनों में इनका मूड खराब रहा है. फरवरी में एफपीआई ने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था. 

महीना FPI बिकवाली
जनवरी 35,962 करोड़ रुपये
मार्च 1.17 लाख करोड़ रुपये
अप्रैल 60,847 करोड़ रुपये 
मई (अब तक) 14,231 करोड़ रुपये

निवेशकों के भागने की वजह क्या? 
यहां ये जान लेना जरूरी है, कि आखिर क्यों विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय बाजार से भागते जा रहे हैं. तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह जियो पॉलिटिकल टेंशन है. बढ़ती ग्लोबल अनिश्चितता के चलते उभरते बाजारों के प्रति विदेशी निवेशकों को मोहभंग हो रहा है. अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव ने निकासी की रफ्तार को और भी बढ़ाने का काम किया. इसका उदाहरण है मार्च महीने में रिकॉर्ड FPI बिकवाली. 

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के चीफ मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लोबल टेंशन और क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते महंगाई का जोखिम लगातार बढ़ा है. उसपर ब्याज दरों का दबाव भी बढ़ा है, जिसके चलते उनका सेंटिमेंट खराब हुआ और लगातार बिकवाली देखने को मिली है. 

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