डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का टैरिफ अटैक एक बार फिर शुरू हो चुका है और वे दनादन धमकियां देते हुए नजर आ रहे हैं. बीते कुछ दिनों में उन्होंने भारत और चीन समेत तमाम देशों को निशाने पर लिया है. यही नहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने तो सहयोगी नाटो के सदस्य देशों को भी नहीं बख्शा और ग्रीनलैंड कब्जाने के अपने प्लान की खिलाफत करने पर 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी देकर ग्लोबल टेंशन बढ़ा दी है.
लेकिन एक ओर जहां ट्रंप टैरिफ-टैरिफ खेलते नजर आ रहे हैं, दूसरी ओर चीन अपने प्लान-बी (China Plan B) पर काम करता हुआ नजर आ रहा है. जी हां, अमेरिका की टेंशन बढ़ाने के लिए China एक के बाद एक बड़ी डील को अंजाम दे रहा है, जिसमें कनाडा के साथ हालिया समझौता सबसे नया है. अपने इस प्लान बी के तहत चीन द्वारा उठाए गए बड़े कदमों की बात करें, तो इनमें...
China-Canada: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की चीन यात्रा के दौरान 'अमेरिका फर्स्ट' नीति से हटकर कनाडा ने चीन के साथ बड़ी डील की है. इसके तहत कनाडा ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (Chinese EVs) पर टैरिफ को कम करने का फैसला किया है. अब तक कनाडा Chinese EVs पर 100% Tariff वसूल रहा था, जिसमें बड़ी कटौती पर सहमति जताई है. चीन जिन कृषि उत्पादों (खासकर कैनोला बीज) पर टैरिफ 84% घटाकर करीब 15% घटाने पर राजी हुआ है.
China-Iran: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घेरने के लिए उसके व्यापारिक साझेदार देशों पर 25% टैरिफ का बम फोड़ा, जिसे चीन पर सबसे बड़ी चोट माना जा रहा था, क्योंकि सबसे ज्यादा ईरानी तेल चीन ही आयात करता रहा है. ट्रंप के टैरिफ अटैक के बाद चीन ने ईरान के साथ परदे के पीछे अपने प्लान बी के तहत कुछ डील पर कदम आगे बढ़ाए हैं, हालांकि उसने इसे पहले से पहले से चल रहे समझौतों का विस्तार बताया. चीन ने ईरानी तेल आयात कम करने के बजाय शैडो फ्लीट, थर्ड-पार्टी ट्रेडिंग हाउस और युआन में सेटलमेंट के जरिए इसे जारी रखा है.
China-Russia: अमेरिका की आखों में लगातार खटकने वाले रूस के साथ भी चीन ने व्यापारिक संबंधों को बढ़ाया है. China-Russia Energy Deal के तहत दोनों देश रूसी तेल और गैस की लॉन्गटर्म सप्लाई रियायती दरों पर करने और इसका लेन-देन युआन और रूबल में करने पर सहमत हुए हैं, जिससे कि डॉलर पर निर्भरता को कम किया जा सके.
China-India: बीते कुछ दिनों में ट्रंप के टैरिफ अटैक का सबसे बड़ा निशाना भले ही चीन रहा है, लेकिन काफी हद तक इसका भारत पर भी असर दिखाई दिया है. India-US Trade Deal भी इसे लेकर अटकी है. हालांकि, जब-जब अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से भारत को निशाना बनाया गया है, चीन ने खुलकर नहीं बल्कि रणनीतिक और कूटनीतिक तरीके से भारत का समर्थन ही किया है और तमाम मंचों पर चीन ने कहा कि एकतरफा टैरिफ अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के खिलाफ हैं. ये एक तरह से बिना नाम लिए भारत का समर्थन ही रहा. इसके अलाना चीन BRICS बैठक में भी विकासशील अर्व्यवस्थाओं पर टैरिफ प्रेशर का विरोध करते हुए भारत समेत ग्लोबल साउथ के लिए साझा रुख अपनाता नजर आया है.
ट्रंप की टेंशन बढ़ाने वाले आंकड़े
चीन की इकोनॉमी का लेटेस्ट डेटा भी डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन को बढ़ाने वाला है. दरअसल, पिछले साल ये 5% बढ़कर 20.01 ट्रिलियन डॉलर की हो गई. खास बात ये है कि Trump Tariff और तमाम धमकियों के बाद भी मजबूत एक्सपोर्ट की दम पर चीन ने ये कमाल किया है.
नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (NBS) के सोमवार को जारी डेटा के मुताबिक, 2025 में चीन का ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (China GDP) साल दर साल 5 फीसदी बढ़ी है, जिससे उसका सालाना टारगेट पूरा हो गया. तिमाही आंकड़ों की बात करें, तो बीते साल 2025 के आखिरी तीन महीनों में चीन की इकोनॉमी 1.2% बढ़ी.
क्या खास है चीन की रणनीति में?
बात भारत को लेकर टैरिफ धमकी की हो, या फिर हाल ही में यूरोपीय देशों पर ग्रीनलैंड को मुद्दा बनाकर किए गए ट्रंप के टैरिफ अटैक की, जिन देशों की अमेरिकी के साथ टेंशन बढ़ी, चीन उनके सपोर्ट में आता नजर आया है. हालांकि, चीन ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन हमेशा कहा कि एकतरफा टैरिफ अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है.
China Plan-B के तहत ड्रैगन ने सऊदी अरब के साथ ऑयल सप्लाई डील और इसमें युआन के इस्तेमाल पर सहमति जताई है. इसके साथ ही 5G, AI और स्मार्ट सिटी सहयोग की भी बात कही है. इसके अलावा UAE से निवेश और लॉजिस्टिक्स डील, ब्राजील के साथ कृषि और सोयाबीन आयात, खनिज और रेयर अर्थ पर समझौता किया है. इसके अलावा चीन ने फ्रांस की Airbus को बड़ी संख्या में A320/A350 विमानों की खरीद के ऑर्डर दिए हैं. कुल मिलाकर चीन की रणनीति ये है कि किसी भी तरह डॉलर सिस्टम से बाहर निकला जाए, सस्ती ऊर्जा सुरक्षित की जाए, BRI को सुचारू रखा जाए.
दीपक चतुर्वेदी