Silver Price: क्‍या आप भी खरीदने जा रहे हैं चांदी? एक्‍सपर्ट्स ने दी बड़ी जानकारी

नए जमाने के उद्योग में सिल्‍वर की मांग तेजी से बढ़ रही है. इस बीच, एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की मांग मजबूत होने से इसमें तेजी आने की संभावना दिख रही है. अभी चांदी अपने रिकॉर्ड हाई से 44 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रही है.

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चांदी की कीमतों में आ सकती है तेजी. (Photo: File/ITG) चांदी की कीमतों में आ सकती है तेजी. (Photo: File/ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 6:06 PM IST

जंग रुकने की स्थिति में चांदी की कीमतें तेजी से चढ़ी हैं. शुक्रवार को एमसीएक्‍स पर चांदी के भाव में 6,000 रुपये से ज्‍यादा या 2.63 फीसदी की तेजी आई और यह 2.50 लाख रुपये प्रति किलो के ऊपर चली गई. इस तेजी के बाद एक्‍सपर्ट्स ने बड़ी जानकारी शेयर की है. 

विश्लेषकों का मानना ​​है कि आपूर्ति की कमी, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर AI और डेटा सेंटर्स तक के क्षेत्रों से बढ़ती मांग के कारण चांदी लॉन्‍गटर्म के लिहाज से मजबूत बनी हुई है. फिलहाल ग्‍लोबल स्‍तर पर चांदी की कीमत करीब 64.50-65 डॉलर प्रति औंस है. जनवरी में उच्चतम स्तर से भारी गिरावट के बावजूद, कई जानकारों को मध्यम अवधि में इसमें काफी वृद्धि की उम्मीद है. 

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44 फीसदी नीचे आ चुकी है चांदी 
जनवरी 2026 के अंत में चांदी की कीमत वैश्विक स्तर पर 121.64 डॉलर प्रति औंस और एमसीएक्स पर 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी, जिसके बाद इसमें तेजी से गिरावट आई. इन उच्चतम स्तरों से 44 फीसदी की गिरावट आई है.  

क्‍यों गिरी थी इतनी चांदी? 
इस गिरावट के पीछे कई कारण थे. सीएमई ग्रुप द्वारा लागू की गई उच्च मार्जिन आवश्यकताओं ने लीवरेज्ड ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन खत्म करने के लिए मजबूर किया, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और 2025 में चांदी की 147% की तेजी के बाद मुनाफावसूली ने गिरावट को और तेज कर दिया. हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि बिकवाली काफी हद तक तकनीकी थी और इससे चांदी के लॉन्‍गटर्म में कोई बदलाव नहीं आया है. 

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महंगाई में चांदी का रोल 
भारत के महंगाई दर के आंकड़ों में चांदी का बढ़ता महत्व भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. SBI रिसर्च की इकोरैप रिपोर्ट के अनुसार, मई में चांदी की ज्‍वेलरी का योगदान महंगाई में 56 आधार अंकों का रहा, जिससे यह पर्सनल चीजों में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया. सोने का योगदान 30 आधार अंक और पेट्रोल का योगदान 14 आधार अंक रहा. 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ग्‍लोबल कमोडिटी रुझानों से पता चलता है कि सोने की तुलना में चांदी में महंगाई अधिक रही. चांदी की कीमतों में उछाल के कारण मई में व्यक्तिगत देखभाल कैटेगरी में महंगाई दर में लगभग 80 आधार अंकों की वृद्धि हुई. 

क्‍यों चांदी में आ सकती है तेजी? 
एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि एआई, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन के कारण चांदी में तेजी आ सकती है, क्‍योंकि यह नए जमाने के इंडस्‍ट्री के लिए बेहतर मेटल बन रहा है. सोलर पैनल के लिए यह सबसे महत्‍वपूर्ण असेट है. भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों से आने वाले दशक में मजबूत मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है. 

इलेक्ट्रिक वाहन भी विकास के प्रमुख कारकों में से एक हैं. उद्योग के अनुमानों के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों में पारंपरिक पेट्रोल से चलने वाले वाहनों की तुलना में लगभग दोगुनी चांदी का उपयोग होता है, क्योंकि इनमें विद्युत ऊर्जा की मात्रा अधिक होती है. 

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एआई भी मांग के एक पावरफुल सोर्स के रूप में उभर रही है. चांदी सबसे अधिक विद्युत चालक धातु है और एआई डेटा सेंटर्स में उपयोग होने वाले सर्वर, सेमीकंडक्टर और थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

(नोट- किसी भी मेटल में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)  

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