बिहार राज्यसभा चुनाव को लेकर शह-मात का खेल शुरू हो चुका है. एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, जिसके लिए अपने हाथ पैर मारने शुरू कर दिए हैं. कुशवाहा ने सोमवार देर शाम दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर राज्यसभा जाने की मांग रखी. ऐसे में बीजेपी ने कुशवाहा के सामने ऐसा प्रस्ताव रखा, जो उनके संसद जाने का रास्ता तो खोल रहा है, लेकिन इसके लिए उन्हें अपनी पार्टी की बली देनी होगी?
राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से सोमवार को दिल्ली में मुलाकात की. इस दौरान बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के सामने कुशवाहा ने फिर से राज्यसभा जाने की इच्छा जाहिर की है.
सूत्रों की माने बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजे जाने के लिए फार्मूला दिया है. इसके तहत कुशवाहा को राज्यसभा जाने के लिए अपनी पार्टी आरएलएम का बीजेपी में विलय करना होगा. ऐसे में सवाल यही है कि क्या कुशवाहा अपनी पार्टी का एक बार फिर बली देंगे?
कुशवाहा की पार्टी को बीजेपी में विलय का प्रस्ताव
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर 16 मार्च को चुनाव है. बीजेपी तीन राज्यसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का मन बना रही जबकि दो सीटों पर जेडीयू चुनाव लड़ेगी. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के चार विधायक 2021 के चुनाव में जीतकर आए हैं, जिनके दम पर उनका राज्यसभा पहुंचना आसान नहीं है.
कुशवाहा एक बार फिर से बीजेपी के सहारे राज्यसभा पहुंचने की कवायद में है, जिसके लिए देर सोमवार को दिल्ली में बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर राज्यसभा जाने के मुद्दे पर बातचीत की. बीजेपी ने कुशवाहा को राज्यसभा के बदले पार्टी के विलय का प्रस्ताव दिया. इस प्रस्ताव पर कुशवाहा ने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से समय मांगा. अब कुशवाहा अपनी पार्टी नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद प्रस्ताव पर कोई फैसला लेंगे?
राज्यसभा के लिए कुशवाहा क्या देंगे पार्टी की बली?
उपेंद्र कुशवाहा के लिए अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय करने का फैसला जल्द लेना आसान नहीं. कुशवाहा को आशंका है कि अगर पार्टी का विलय करते हैं तो इससे उनकी पार्टी में नाराजगी बढ़ सकती है. जेडीयू में एक बार विलय करके कुशवाहा देख चुके हैं, जिसके चलते इस बार बहुत सोच समझकर कोई फैसला लेना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से समय मांगा ताकि नफा-नुकसान का आकलन करके कोई कदम उठाएं?
सूत्रों के मुताबिक अगर विलय के टाइम फ्रेम को लेकर कर सहमति बनती है यानि कुशवाहा को पार्टी विलय का टाइम दिया जाता है तो फिर वो एक बार फैसला ले सकते हैं. इस तरह उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भेजा जा सकते हैं?
बीजेपी ने क्यों दिया कुशवाहा को विलय का प्रस्ताव
बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को पहले भी राज्यसभा अपने कोटे से 2024 के चुनाव भेजा था, लेकिन उस समय उन्हें पार्टी के विलय का प्रस्ताव नहीं दिया था. इस बार आखिर क्या वजह हो गई है कि बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को विलय का प्रस्ताव दिया है. उपेंद्र कुशवाहा यह ऑफर स्वीकार कर लेते हैं तो उनको बीजेपी राज्यसभा में भेजकर एनडीए का संख्या बल बढ़ा ही लेगी, साथ ही आरएलएम के विलय के साथ बिहार में बीजेपी के विधायकों की संख्या भी 89 से बढ़कर 93 हो जाएगी.
आरएलएम के विलय के बहाने बीजेपी सिर्फ अपनी संख्या नहीं बढ़ाएगी बल्कि बिहार में ओबीसी वोटबैंक को साधने का दांव है. कुशवाहा और उनकी पार्टी का बड़ा जनाधार है. कुशवाहा समुदाय का बिहार अच्छा खासा वोटबैंक है, जो नीतीश कुमार का कोर वोटबैंक बना हुआ है. ऐसे में बीजेपी बिहार में आत्म निर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रही है ताकि आने वाले समय में अपना मुख्यमंत्री बना सके. ऐसे में कुशवाहा की पार्टी के विलय बीजेपी की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
शशि भूषण कुमार