चुनाव प्रचार के बीच पप्पू यादव की तबीयत बिगड़ी, महिला आयोग ने आज ही भेजा था नोटिस

पश्चिम बंगाल के मालदा में चुनाव प्रचार के दौरान पप्पू यादव की तबीयत तेज गर्मी के कारण बिगड़ गई और प्राथमिक उपचार के बाद वे पूर्णिया लौट रहे हैं. इसी बीच बिहार राज्य महिला आयोग ने उनके विवादित बयान पर नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है. पप्पू यादव ने राजनीति में महिलाओं के शोषण और नेताओं के आचरण पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे विवाद खड़ा हो गया है.

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महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा है. Photo ITG महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा है. Photo ITG

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 21 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:57 PM IST

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार अपने चरम पर है. इसी कड़ी में पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव मालदा में जनसभा करने पहुंचे थे. लेकिन तेज गर्मी के चलते उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई. बताया गया कि अत्यधिक गर्मी के कारण उन्हें लू लग गई थी. प्राथमिक उपचार के बाद पप्पू यादव वापस पूर्णिया लौट रहे हैं. इस दौरान उनका एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह बेड पर लेटे नजर आ रहे हैं और आसपास मौजूद लोग उनके सिर पर पानी डालकर राहत देने की कोशिश कर रहे हैं.

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वहीं दूसरी ओर बिहार राज्य महिला आयोग ने महिलाओं पर दिए गए एक बयान को लेकर पप्पू यादव को नोटिस जारी किया है. आयोग ने उनसे तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है और पूछा है कि ऐसा बयान क्यों दिया गया तथा उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त करने पर विचार क्यों न किया जाए.

क्या था पप्पू यादव का बयान?
पप्पू यादव ने हाल ही में राजनीति में महिलाओं की स्थिति और नेताओं के व्यवहार को लेकर बेहद विवादास्पद टिप्पणी की है. उनका कहना है कि देश की राजनीति में महिलाओं के लिए बिना किसी तरह के समझौते के आगे बढ़ना बेहद मुश्किल हो गया है और उनकी सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि समाज में भले ही महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता हो, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है.

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'90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बिस्तरों से शुरू होता है'
पप्पू यादव ने कहा कि कड़वी सच्चाई यह है कि 90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बिस्तरों से शुरू होता है. महिलाएं किसी प्रभावशाली नेता के रूम में गए बिना राजनीति नहीं कर सकतीं. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीति में आने वाली कई महिलाओं की शुरुआत प्रभावशाली लोगों के निजी दायरे से जुड़ी होती है. 

उनका कहना है कि सत्ता के गलियारों में महिलाओं के शोषण की समस्या गहराई से मौजूद है. पप्पू यादव ने दावा किया कि कड़वी सच्चाई यह है कि बड़ी संख्या में महिलाओं का राजनीतिक सफर ऐसे माहौल से शुरू होता है, जहां उन्हें समझौते करने पड़ते हैं और बिना प्रभावशाली लोगों के करीब आए आगे बढ़ना मुश्किल होता है.

पप्पू यादव ने अपने बयान में जनप्रतिनिधियों के आचरण पर भी गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना है कि संसद और विधानसभाओं में बैठे कई नेता महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखते. उन्होंने आरोप लगाया कि कई जनप्रतिनिधि अपने मोबाइल फोन पर अश्लील सामग्री देखते हैं. पप्पू यादव ने यह भी कहा कि अगर सच्चाई सामने लानी है तो नेताओं के मोबाइल फोन की जांच कराई जानी चाहिए.

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