बिहार में नीतीश के बेटे निशांत को भी मिलेगा मंत्री पद, कल JDU कोटे से ये 12 नेता लेंगे शपथ

बिहार में गुरुवार को सम्राट चौधरी सरकार का बड़ा कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है, जिसमें करीब 27 से 28 मंत्री शपथ ले सकते हैं. पटना के गांधी मैदान में होने वाला यह समारोह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है. जदयू कोटे से निशांत कुमार समेत कई नेताओं के मंत्री बनने की चर्चा है. भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों के बीच संतुलन साधने की कोशिश दिख रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत कई बड़े नेता कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं.

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बिहार में गुरुवार को कैबिनेट विस्तार होना है. (Photo- ITG) बिहार में गुरुवार को कैबिनेट विस्तार होना है. (Photo- ITG)

रोहित कुमार सिंह

  • पटना,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 5:16 PM IST

बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन बेहद अहम होने जा रहा है. राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार प्रस्तावित है. सूत्रों के अनुसार, इस भव्य समारोह में करीब 27 से 28 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जिससे राज्य की सियासत में एक नए चरण की शुरुआत मानी जा रही है. इस आयोजन को सिर्फ प्रशासनिक विस्तार नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है. इस शपथ ग्रहण की सबसे खास बात ये रहेगी कि इसमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार भी शपथ लेंगे. 

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शपथ ग्रहण 12 बजे के बाद हो सकता है शुरू
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री सुबह करीब 11:30 बजे पटना पहुंचेंगे, जबकि शपथ ग्रहण समारोह दोपहर 12:10 बजे शुरू होने की संभावना है. गृह मंत्री अमित शाह एक दिन पहले ही पटना पहुंचकर मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप दे सकते हैं.

यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि 15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब कार्यक्रम अपेक्षाकृत सादा और सीमित दायरे में आयोजित किया गया था. उस समय शीर्ष नेता विधानसभा चुनावों में व्यस्त थे, जिसके चलते समारोह को लो प्रोफाइल रखा गया. लेकिन इस बार की तैयारियां भव्य हैं, जो यह संकेत देती हैं कि सरकार अब पूरी ताकत के साथ जनता के सामने अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर गठबंधन के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश साफ तौर पर दिखाई दे रही है. 

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किस पार्टी के कोटे से कितने मंत्री होंगे?
सूत्रों के अनुसार, भाजपा को लगभग 12 मंत्री पद मिल सकते हैं, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) को करीब 12 सीटें दिए जाने की संभावना है. इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा तथा राष्ट्रीय लोक जनता दल को एक-एक मंत्री पद मिल सकता है. इस फार्मूले के जरिए एनडीए के सभी घटक दलों को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की रणनीति अपनाई जा रही है.

निशांत कुमार लेंगे शपथ
संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं. भाजपा की ओर से विजय कुमार सिन्हा, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल, श्रेयसी सिंह, राम कृपाल यादव और संजय सिंह जैसे नाम चर्चा में हैं. वहीं जदयू कोटे से श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेसी सिंह, मदन सहनी, जमा खां, सुनील कुमार, शीला मंडल, रत्नेश सदा, बुलो मंडल, भगवान सिंह कुशवाहा, दामोदर रावत, निशांत कुमार शपथ लेंगे.

सहयोगी दलों की ओर से भी कई नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें चिराग पासवान की पार्टी और जीतन राम मांझी के खेमे के नेता शामिल हैं. चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर से संजय सिंह और संजय पासवान मंत्री पद की शपथ लेंगे. एलजेपीआर ने अपने दोनों मंत्रियों के नाम सीएम सम्राट चौधरी को भेज दिए हैं. पिछली नीतीश कैबिनेट में भी संजय सिंह और संजय पासवान एलजेपीआर से मंत्री थे.

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गांधी मैदान में तैयारियां जारी
गांधी मैदान में तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं. विशाल मंच का निर्माण, सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना इस कार्यक्रम को और भी खास बना रही है. प्रशासनिक स्तर पर भी सभी जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि समारोह सुचारू रूप से संपन्न हो सके.

PM मोदी, अमित शाह के साथ ये नेता भी रह सकते हैं मौजूद
इस समारोह की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी रहने की संभावना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई वरिष्ठ नेता पटना पहुंच सकते हैं. 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैबिनेट विस्तार न केवल सरकार के भीतर शक्ति संतुलन तय करेगा, बल्कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा भी निर्धारित करेगा. हाल के चुनावी नतीजों और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह आयोजन एनडीए के लिए अपनी मजबूती दिखाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है.

कुल मिलाकर, पटना का गांधी मैदान एक बार फिर बड़े राजनीतिक आयोजन का गवाह बनने जा रहा है, जहां सत्ता, रणनीति और संदेश तीनों का संगम देखने को मिलेगा.

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