मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार राजनीति में एंट्री करने के साथ ही सियासी चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं. जेडीयू की
सदस्यता लेने के बाद से निशांत एक्टिव हैं और जनसंपर्क अभियान भी शुरू कर दिया है. निशांत ने सबसे पहले अपने रिश्तेदार और नातेदार से मिलने का सिलसिला शुरू किया और गुरुवार को अपने पैतृक गांव पहुंचे, जहां से वो हाथ में राइफल लेकर निशाना साधते नजर आए.
सादगी के साथ रहने वाले निशांत कुमार पर सियासी पारी का आगाज करने के साथ ही उनके ऊपर जेडीयू को संभालने और उसे आगे ले जाने की जिम्मेदारी आ गई है. ऐसे में बिहार की जनता के बीच निशांत कुमार भी वही लोकप्रियता हासिल करने में जुट गए हैं , जो उनके पिता नीतीश ने हासिल की है.
निशांत कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्टाइल को फॉलो करना या फिर कहें कि पिता के नक्शेकदम पर चलना शुरू कर दिया है. इसके मद्देनजर निशांत कुमार ने सियासी सफर शुरू करने के साथ ही अपनी तीनों बुआओं के घर जाकर आशीर्वाद लिया. इसके बाद निशांत गुरुवार को अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे, जहां से उनकी एक तस्वीर सामने आई, जो चर्चा का विषय बनी हुई है.
टारगेट पर निशाना लगाते दिखे निशांत
बिहार में दो दशक से मुख्यमंत्री पद पर काबिज नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने गुरुवार को अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे. इसके दौरान कल्याण बिगहा के इंडोर शूटिंग रेंज का भ्रमण किया, जहां वो हाथ में राइफल लेकर निशानेबाजी का अभ्यास करते नजर आए. राइफल थामे और अपने टारगेट पर निशाना लगाते निशांत कुमार ने तस्वीर को अपने फेसबुक पेज पर भी पोस्ट किया.
शूटिंग रेंज में उपलब्ध खेल सुविधाओं का जायजा लिया. स्थानीय खिलाड़ियों के आग्रह पर निशांत ने खुद भी राइफल थामी और निशानेबाजी का अभ्यास किया. उन्होंने कहा कि निशानेबाजों से मिलना एक अद्भुत अनुभव रहा, यहां शूटिंग रेंज में सुविधाएं किसी वरदान से कम नहीं हैं. निशांत कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने बिहार में खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं.
मंदिर में पूजा अर्चना और बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया
निशांत कुमार अपने पैतृक गांव पहुंचते ही सबसे पहले मंदिर में जाकर पूजा अर्चना की है. इसके बाद वो गांव के बड़े बुजुर्गों से मुलाकात की और आशीर्वाद लिया. राजनीति में अपनी नई पारी को लेकर उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि पिताजी (नीतीश कुमार) ने दशकों तक जमीन पर जो सकारात्मक बदलाव किए हैं, उसका असर आज जनता के स्नेह और समर्थन के रूप में उन्हें मिल रहा है.
उन्होंने कहा कि उनकी ताकत उनके पिता के काम और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद है. पिताजी ने बिहार और बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया है. जेडीयू की नीतियों और पिताजी के किए गए विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाना ही मेरा पहला लक्ष्य है. उन्होंने कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा, 'हमें मिलकर बिहार को आगे बढ़ाना है.
नीतीश कुमार की स्टाइल को कर रहे फॉलो
निशांत कुमार ने अपना राजनीतिक सफर शुरू करने से साथ ही पहले परिवार का आशीर्वाद लेने का काम किया. इस कड़ी में वे अपनी तीनों बुआ उषा देवी, प्रभा देवी और इंदु कुमारी से मिलने उनके आवास पहुंचे, जहां वो अपनी बुआओं से मिले और उनका आशीर्वाद लिया.
निशांत कुमार के इस कदम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सादगी और पारिवारिक मूल्यों की झलक दिखाई दी. राजनीति में कदम रखने से साथ ही परिवार के बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने की परंपरा को उन्होंने आगे बढ़ाया. इसको नीतीश कुमार की शैली और संस्कारों से जोड़कर भी देखा जा रहा है. नीतीश कुमार भी हमेशा कोई भी राजनीतिक कदम उठाने से पहले परिवार का आशीर्वाद लेने का काम करते हैं.
निशांत के सियासी भविष्य पर टिकी निगाहें
राजनीतिक गलियारों में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में निशांत कुमार जेडीयू के कर्ताधर्ता होंगे. ऐसे में बहुत ही सोच समझकर निशांत कुमार कदम उठा रहे हैं. निशांत कुमार के परिवार से आशीर्वाद लेने की खबर के बाद समर्थकों में भी उत्साह देखा जा रहा है. कई लोग इसे उनके नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं तो कई लोग नीतीश के सियासी वारिस मान रहे हैं. जेडीयू के समर्थकों का मानना है कि वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सकते हैं.
निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका को लेकर सभी की नजरें टिकी हुई हैं. निशांत की इन गतिविधियों को जेडीयू की राजनीति के 'बदलते संकेतों' के तौर पर देख रहे हैं. जेडीयू कार्यालय में युवा नेताओं से उनकी बढ़ती मुलाकातें और अब जमीनी स्तर पर सक्रियता, पार्टी में उनकी भविष्य की बड़ी भूमिका की ओर इशारा कर रही हैं. इतना ही नहीं निशांत कुमार के लिए पार्टी में युवा नेताओं की एक टीम भी बनाई जा रही है, जिसे टीम निशांत का नाम दिया गया है.
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