निशांत को दांव-पेच सिखाएगी जेडीयू की युवा टीम, नीतीश के ओल्ड गार्ड्स से कई की हो जाएगी छुट्टी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सियासी वारिस के तौर पर निशांत कुमार को चुन लिया गया है. निशांत को राजनीतिक दांव-पेच सिखाने और चुनौती से निपटने के लिए जेडीयू के युवा नेताओं की एक टीम बनाई जा रही है. माना जा रहा है कि नई सरकार में नीतीश के पुराने साथियों की छुट्टी कर नए चेहरों को तवज्जे दी जाएगी?

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जेडीयू में निशांत कुमार की एंट्री (Photo-PTI) जेडीयू में निशांत कुमार की एंट्री (Photo-PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:06 PM IST

बिहार की सियासत में पिछले दो दशकों से सत्ता की कमान संभाल रहे नीतीश कुमार ने अपनी राजनीतिक विरासत की बागडोर अगली पीढ़ी को सौंपने का फैसला किया. राज्यसभा जाने के निर्णय के बाद नीतीश ने अपने बेटे निशांत कुमार को अपना सियासी वारिस चुना. निशांत ने जेडीयू की सदस्यता भी ग्रहण कर ली है और जल्द ही बिहार के डिप्टीसीएम के तौर पर उनकी ताजपोशी भी हो जाएगी. 

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निशांत कुमार शांत और सादगी के जीते रहे हैं, लेकिन क्या वे अपने पिता नीतीश कुमार की उस विरासत को संभाल पाएंगे जो उन्होंने वर्षों की तपस्या से अर्जित की है. निशांत कुमार के ऊपर जेडीयू को संभालने और उसे आगे ले जाने, पार्टी को एकजुट रखने की ज़िम्मेदारा आ गई है.

बिहार की जनता के बीच निशांत कुमार को वही लोकप्रियता हासिल करना है, जो नीतीश ने हासिल की है. ऐसा करके ही निशांत न सिर्फ अपनी पार्टी को और मजबूत कर सकते हैं बल्कि बिहार की सत्ता में भी अपनी प्रभावी मौजूदगी बनाए रख सकते हैं. बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले मानते है कि निशांत कुमार के लिए राह उतनी आसान नहीं है.  इस बात को जेडीयू में लोग समझ रही है, जिसके चलते ही टीम निशांत बनाई जा रही है. 

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निशांत कुमार के लिए बनेगी एक टीम
नीतीश कुमार के उत्तराधारी चुने जाने के बाद निशांत कुमार को कई स्तरों पर लड़ना होगा, जेडीयू के अंदर और बाहर. उनका मुकाबला तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेताओं से होगा जो राजनीति में उनसे काफी आगे हैं. निशांत को बीजेपी के साथ भी तालमेल बैठाकर चलना होगा. ऐसे में निशांत कुमार को राजनीतिक दांव-पेच सिखाने और उन्हें सहयोगी करने के लिए  जेडीयू नेताओं की एक टीम गठित की जा रही है. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक निशांत कुमार की सियासी चुनौतियों का पता परिवार और पार्टी दोनों को है.इसलिए पिछले एक साल से उनकी तैयारी कराई जा रही है. सीएम हाउस से जुड़े लोग बताते हैं कि कुछ खास लोगों को उन्हें राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी दी गई है. 

'टीम निशांत'में जेडीयू के 7 युवा नेता
निशांत कुमार के साथ  युवा विधायकों की एक टीम बनाई जा रही है. इसमें इस्लामपुर के विधायक रूहेल रंजन प्रमुख हैं, जो बीआईटी मेसरा में निशांत के साथ थे. इनके अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के पुत्र शुभानंद मुकेश, जेडीयू नेता दिनेश कुमार सिंह, एलजेडी की सांसद वीणा देवी की बेटी और जेडीयू विधायक कोमल सिंह के अलावा दिग्गज बाहुबली नेता आनंद मोहन के पुत्र और जेडीयू विधायक चेतन आनंद जैसे युवाओं को उनके साथ जोड़ा जा रहा है.

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जेडीयू विधायकों के अलावा भी निशांत कुमार के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भांजे मनीष (जो जेडीयू की सोशल मीडिया का काम देखते हैं) और उनकी बड़ी बहन के नाती अनुराज (जो पायलट हैं) भी उनका सहयोग करेंगे. अनुराज इन दिनों निशांत के सबसे करीबी माने जाते हैं.  जेडीयू ने अपने इन नेताओं को निशांत कुमार के साथ लगाने की रणनीति बनाई है. इसे ही टीम निशांत बताया जा रहा है.   

नीतीश के 'ओल्ड गार्ड' भी बदलेगी
बिहार में नीतीश कुमार ने जब से सत्ता संभाली है, तब से उनके साथ पार्टी नेताओं की एक टीम काम कर रही है. नीतीश उन्हें पार्टी संगठन में जगह देने से लेकर अपनी कैबिनेट तक में शामिल करते रहे हैं. जेडीयू के कई ऐसे नेता हैं, जो नीतीश कुमार की हर सरकार में मंत्री रहे हैं. अब जब नीतीश कुमार पटना से दिल्ली को कूच कर रहे तो उनके पुराने साथी भी कैबिनेट का हिस्सा नहीं रहना चाहते हैं. जेडीयू के दिग्गज नेता और मंत्री बिजेंद्र यादव ने साफ शब्दों में कह दिया है. 

नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा चुने जाने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं. ऐसे में नई सरकार का गठन होगा, जिसमें जेडीयू कोटे से 15 मंत्री बनाए जाने की बात कही जा रही है. ऐसे में जेडीयू से बनाए जाने वाले कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पर युवा नेताओं को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. 

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निशांत डिप्टीसीएम तो युवा नेता बनेंगे मंत्री
निशांत कुमार के डिप्टीसीएम बनाए जाने की चर्चा चल रही है. बीजेपी से किसी नेता को नीतीश कुमार की जगह मुख्यमंत्री बनाया जाएगा और जेडीयू से डिप्टीसीएम निशांत कुमार बन सकते हैं. निशांत को अगर सरकार में यह ओहदा दिया जाता है तो उनकी टीम में जेडीयू के युवा चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. ऐसे में नीतीश के 'किचन कैबिनेट' के भरोसेमंद मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदल सकती हैं. 

साल 2005 से नीतीश कुमार के साथ मंत्री बन रहे बृजेद्र यादव जैसे वरिष्ठ नेता,जो नीतीश के बहुत करीब हैं. अब नई सरकार में मंत्री बनने से हिचक रहे हैं. बिजेंद्र यादव को बिहार मंत्रिमंडल में JDU के सबसे शक्तिशाली मंत्रियों में से एक हैं और नीतीश कुमार के भरोसेमंद माने जाते हैं. सीएम नीतीश बड़े फैसले लेने से पहले अक्सर उनसे सलाह लेते हैं. 

बिजेंद्र यादव नई सरकार में मंत्रिमंडल से हट सकते हैं और उन्होंने नीतीश कुमार को यह संदेश दिया है कि यदि वे राज्य नेतृत्व का हिस्सा नहीं रहते हैं, तो वे भी मंत्री पद से हटना पसंद करेंगे. ऐसे में उनकी जगह पर किसी युवा चेहरे को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. जेडीयू के हर बड़े फैसले में बिजेंद्र यादव और विजय चौधरी की अहम भूमिका रहती है. ऐसे में अशोक चौधरी भी है, जब से कांग्रेस छोड़कर जेडीयू में आए हैं, नीतीश के भरोसेमंद बने हुए हैं. 

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जेडीयू कोटे से 15 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है, जिसमें कुछ वरिष्ठ और कुछ युवाओं नेताओं की टीम होगी. हालांकि, अभी ये तय नहीं है कि नई सरकार में जेडीयू से कौन-कौन नेता मंत्री बनाए जाएंगे. ऐसे में देखना है कि निशांत टीम को क्या मंत्रिमंडल में भी जगह उनके साथ मिलेगी या फिर सलाहकार के रोल में ही होंगे?   
 

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