बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद जेडीयू को एक के बाद एक सियासी झटके लग रहे हैं. मुख्यमंत्री पद छोड़कर नीतीश कुमार का राज्यसभा में आना और सत्ता के सिंहासन पर बीजेपी के विराजमान होने के बाद से जेडीयू में अलग ही सियासी माहौल है. बाहुबली नेता और पूर्व सांसद आनंद मोहन जेडीयू पर हमलावर हैं और नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है.
पूर्व सांसद आनंद मोहन के सियासी तेवर को देखते हुए जेडीयू ने एमएलसी संजय सिंह को आगे किया. नीतीश पर सवाल उठा रहे आनंद मोहन को लेकर संजय सिंह ने मोर्चा खोल दिया है और जमकर हमले कर रहे हैं.
जेडीयू में आनंद मोहन की राजनीति फिनिस हो गई है. संजय सिंह के रूप में लगता है कि आनंद मोहन का विकल्प जेडीयू ने तलाश लिया है. आनंद मोहन की बयानबाजी का जवाब देने वाले संजय सिंह से मिलने जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार उनके घर तक पहुंच गए हैं.
नीतीश कुमार पर हमलावर आनंद मोहन
बिहार की राजनीति में आनंद मोहन की छवि एक दंबग राजपूत नेता के तौर पर है. सत्तर के दशक में राजनीति में आए और बाहुबली बन गए. आनंद मोहन जेल में बंद थे तो उनकी पत्नी और बेटे ने आरजेडी का दामन थाम लिया था. आरजेडी से विधायक बने, लेकिन आनंद मोहन जेल से बाहर आते ही गेम बदल गया. आनंद मोहन ने परिवार के साथ फिर से नीतीश कुमार से हाथ मिला लिया, लेकिन बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद से उनके सुर बदल गए हैं.
आनंद मोहन एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो ये कहते हुए नजर आ रहे है कि बिहार में करोड़ों रुपये में टिकट बेचे गए और मंत्री पद दिए गए. आनंद मोहन काफी गुस्से के अंदाज में कहते दिख रहे हैं कि निशांत कुमार को इसलिए स्वास्थ्य मंत्रालय दिया गया, क्यूंकि पिता-पुत्र दोनों को डॉक्टर की जरूरत है. आनंद मोहन यहीं नहीं रुके उन्होंने जेडीयू के कुछ नताओं को चंडाल चौकड़ी करार देते हुए पार्टी पर सवाल खड़ा कर दिया है.
आनंद मोहन ने कहा कि यह सिर्फ नीतीश कुमार का सफाया नहीं कर रहे हैं, बल्कि पिछड़ों के राज का सफाया हो रहा है. इससे पहले भी आनंद मोहन ने कहा था कि कुछ जेडीयू नेताओं ने बीजेपी के साथ मिलकर नीतीश कुमार की राजनीतिक हत्या कर दी है. नीतीश को एक साजिश के तहत सीएम पद से हटाया गया है. इस तरह आनंद मोहन ने जेडीयू और नीतीश कुमार पर लगातार सवाल खड़े रहे हैं.
आनंद मोहन के खिलाफ संजय सिंह आक्रामक
नीतीश कुमार पर सवाल उठाने वाले आनंद मोहन को जवाब देने के लिए जेडीयू के एमएलसी संजय सिंह ने मोर्चा संभाल रखा है. उन्होंने कहा कि मैं आनंद मोहन के बयान से स्तब्ध हूं. ऐसा बयान मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति ही दे सकता है. अगर उन्हें इतनी ही चिंता है तो अपने बेटे और पत्नी का इस्तीफा दिलाकर चुनावी मैदान में आ जाएं, सब पता चल जाएगा.'
संजय सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने बीजेपी की रमा देवी से सीट लेकर आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद को देने का काम किया था. रमा देवी शिवहर से बीजेपी की कद्दावर नेता थीं, उनकी सीट जेडीयू ने लेकर लवली आनंद को सांसद बनाया, तब क्या थैली लेकर गए थे.
आनंद मोहन के आरोपों पर सिर्फ संजय सिंह ही नहीं बल्कि बिहार सरकार में मंत्री लेसी सिंह भी उतर गई हैं. उन्होंने कहा कि जेडीयू की साफ-सुथरी छवि रही है. पार्टी में आज तक न तो ऐसी कोई परिपाटी रही है और न ही भविष्य में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐसा होना कभी संभव है.सरकार या संगठन में किस कार्यकर्ता और नेता की क्या उपयोगिता है, यह नेतृत्व तय करता है. आनंद मोहन जो बयान दे रहे हैं, वह तो हमारे नेता की सक्षमता को ही चुनौती दे रहे हैं. बिहार के लोग स्वीकार नहीं करेंगे.
संजय सिंह को मिला नीतीश का आशीर्वाद
आनंद मोहन के खिलाफ आक्रामक तेवर अपनाने वाले एमएलसी संजय सिंह के पटना स्थित आवास पर मंगलवार को जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार अचानक से मिलने के लिए पहुंच गए. संजय सिंह के आवास पर नीतीश कुमार कुछ देर रहे और फिर निकल गए. नीतीश कुमार के घर आने पर एमएलसी संजय सिंह ने कहा कि 'हमारे नेता मिलने के लिए आए थे हमें बहुत अच्छा लगा. हमारे नेता ने हमें पीठ थपथपाकर आशीर्वाद दिया.
कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार ने एमएलसी संजय सिंह के यहां जाकर आनंद मोहन को बड़ा राजनीतिक संदेश दे दिया है. बिहार की राजनीति के जानकारों का मानना है कि नीतीश की संजय सिंह से कोई औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि इसके जरिए जेडीयू हाईकमान ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अपने नेताओं के साथ मजबूती से खड़ी है और राजपूत समाज के नेता ही आनंद मोहन को जवाब देने के लिए तैयार हैं.
आनंद मोहन के बयान के बाद जेडीयू की ओर से दो नेताओं संजय सिंह और लेसी सिंह ने जमकर भड़ास निकाली है. दोनों ही नेता राजपूत समाज से आते हैं। ऐसे में इस घटनाक्रम को जेडीयू के अंदर राजपूत राजनीति के बढ़ते दखल के तौर पर भी देखा जा रहा है.
जेडीयू के राजपूत चेहरा बनकर उभरे संजय सिंह?
बिहार की राजनीति में जेडीयू के एमएलसी संजय सिंह एक बेहद मुखर और प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले संजय सिंह हाल के दिनों में जेडीयू के भीतर राजपूत समाज के आक्रामक चेहरे के रूप में उभरकर सामने आए हैं.
संजय सिंह का जन्म पांच जनवरी 1969 को को भागलपुर के दयालपुर गांव में हुआ है, उनके पिता का नाम गोवर्धन प्रसाद सिंह है.जेडीयू के भीतर संजय सिंह की गिनती उन चुनिंदा नेताओं में होती है जो हमेशा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द और उनके सबसे भरोसेमंद सिपहसालारों में रही है. पार्टी के कार्यक्रमों को जमीन पर उतारने और संगठन को मजबूत करने में उनकी अहम भूमिका रहती है।
बिहार की राजनीति में राजपूत वोट बैंक हमेशा से बेहद महत्वपूर्ण रहा है.संजय सिंह खुद राजपूत बिरादरी से आते हैं, लेकिन आनंद मोहन के सियासी कद के आगे कमजोर पड़ जा रहे थे. आनंद मोहन ने अब सवाल उठाया तो संजय सिंह उनके विकल्प के रूप में आए आ गए.
संजय सिंह ने अपनी आक्रामकता, वफादारी और सीधे अंदाज से यह साबित कर दिया है कि वह जेडीयू में राजपूत समाज की अगुवाई करने का माद्दा रखते हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और विरोधियों को बेबाकी से जवाब देने की शैली ने उन्हें जेडीयू का एक बेहद कद्दावर नेता बना दिया है.
कुबूल अहमद