बिहार के राज्यसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने आखिरकार अपने पत्ते खोल दिए हैं. राज्यसभा चुनाव में AIMIM किंगमेकर की भूमिका में है. AIMIM के पांच विधायकों ने आरजेडी उम्मीदवार अमरेंद्र सिंह को वोट देने का ऐलान दिया है, जिसके चलते महागठबंधन की राह आसान हो गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने ऐसे ही समर्थन कर दिया है या फिर राज्यसभा के बदले कई डील की है?
विधानसभा चुनाव के नतीजों ने बिहार के सियासी समीकरण को बदलकर रख दिया है. विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी को महागठबंधन में शामिल करने से इनकार करने वाले आरजेडी की राज्यसभा चुनाव में जीत का दारोमदार AIMIM विधायकों पर टिक गया है. राज्यसभा चुनाव का ऐलान हुआ तो AIMIM ने अपना प्रत्याशी खड़े करने का दांव चला, लेकिन वोटिंग से एक दिन पहले आरजेडी को समर्थन का ऐलान कर दिया.
बिहार AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तारुल ईमान ने तेजस्वी यादव के साथ रोजा इफ्तार करने के बाद आरजेडी को समर्थन करने का ऐलान कर दिया. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के पांचों विधायक राज्यसभा चुनाव में आरजेडी उम्मीदवार को वोट करेंगे. इस तरह से तेजस्वी ने अपने सियासी समीकरण को जरूर दुरुस्त किया, लेकिन उसके बाद भी राह आसान नहीं है.
राज्यसभा के बदले ओवैसी की आरजेडी से क्या डील?
बिहार राज्यसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने ऐसे ही आरजेडी को समर्थन देने के लिए तैयार नहीं हुई बल्कि उसके बाद एक बड़ा समझौता भी किया है. ओवैसी ने तेजस्वी यादव के सामने 5 विधायकों के वोट बदले एक बड़ी शर्त रखी है. सूत्रों की माने तो राज्यसभा चुनाव में AIMIM ने समर्थन देने के बदले विधान परिषद की एक सीट की डील की है. AIMIM ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि बिहार में विधान परिषद के चुनाव में महागठबंधन हमें मौका दे.
एआईएमआईएम अपने प्रवक्ता आदिल हसन को विधान परिषद में भेजना चाहती है, लेकिन अकेले दम पर यह संभव नहीं है. AIMIM के पास कुल पांच विधायक हैं, जिसके सहारे वो अपना एमएलसी नहीं चुन सकती है. इसी तरह आरजेडी के पास 25 विधायक हैं. महागठबंधन के 35 विधायक के दम पर आरजेडी एक राज्यसभा सीट नहीं जीत सकती है. ऐसे में दोनों ने एक हाथ से दो और एक हाथ से लो, वाले फार्मूले के तहत डील किया है.
बिहार में विधान परिषद के लिए चुनाव
साल 2026 में बिहार विधान परिषद् के लिए कुल 17 सीटों के लिए चुनाव होने हैं. पहले तो यह समझ लीजिए की ये 17 सीट किनके और किस कैटिगरी के खाली होने हैं, उस पर कब चुनाव होंगे. जून में 9 विधान परिषद की सीटें हो रही है, जिन पर मई में चुनाव हो जाएंगे.
जून 2026 में जो सीटें खाली होंगी उसमें दो राजद, तीन जनता दल यूनाइटेड, 1 कांग्रेस, 1 बीजेपी की हैं. इसके अलावा 2 सीटें पहले से खाली हैं. नवंबर 2026 में भी 8 विधान परिषद की सीटें खाली होने वाली है. इसमें बीजेपी 2, सीपीआई 1, कांग्रेस 1, निर्दलीय 2 और जदयू से 1 सीट है. इसमें 4 सीटें स्नातक और 4 सीटें शिक्षक कोटे की हैं.
बिहार में जून में विधान परिषद की जो सीटें खाली हो रही है, वो विधायक कोटे की है. ऐसे में एक विधान परिषद सीट के लिए कम से कम 25 विधायकों का प्राथमिक आधार पर वोट चाहिए. इस तरह एक सीट आरजेडी अपने दम पर जीत सकती है, लेकिन दूसरी सीट विपक्ष के जीतने के लिए अतरिक्त वोट चाहिए. राज्यसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी के समर्थन के बदले विधान परिषद में एक सीट देनी है, लेकिन वह सीट जून में दी जाएगी या फिर नवंबर में यह तय नहीं है.
महागठबंधन का हिस्सा बनेंगी AIMIM
राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए तेजस्वी यादव ने असदुद्दीन ओवैसी का समर्थन हासिल कर लिया है. एक तरह से महागठबंधन का हिस्सा बन गए हैं, लेकिन यह दोस्ती बिहार में सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक ही सीमित रहेगी या फिर भविष्य के लिए भी है. 2025 के विधानसभा चुनाव में AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की पुरी ताकत लगाई थी और हरसंभव कोशिश भी की थी, लेकिन कांग्रेस और आरजेडी दोनों ही तैयार नहीं हुईं.
तेजस्वी के सियासी तेवर के कारण ही अभी तक AIMIM से डील पक्की नहीं हुई थी, लेकिन आरजेडी ने भविष्य की चिंता किए बिना राज्यसभा चुनाव मे ओवैसी की पार्टी को शामिल कर लिया है. ऐसे में ओवैसी के साथ आरजेडी की सियासी केमिस्ट्री कितने दिनों तक चलेगी, यह देखना होगा, लेकिन फिलहाल राज्यसभा के बदले विधान परिषद की एक सीट की डील की बात कही जा रही है.
कुबूल अहमद