पहली बार भारत पहुंचे उबर सीईओ, कहा- हम कई मामलों में ओला से आगे

उबर के सीईओ भारत में हैं इस दौरान उन्होंने भारत में कैब सर्विस और आगे के प्लान के बारे में बातचीत की है. उन्होंने ट्रंप की माइग्रेशन पॉलिसी पर भी बात की है.

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Uber के सीईओ दारा खुसरोशाही और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत Uber के सीईओ दारा खुसरोशाही और नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत

मुन्ज़िर अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 22 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 8:52 PM IST

अमेरिकी कैब सर्विस कंपनी उबर के सीईओ दारा खुसरोशाही पहली बार भारत आए हैं. दिल्ली में आयोजित एक इवेंट में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत के साथ उन्होंने मिल कर मीडिया से बातचीत की है. इस दौरान उन्होंने भारत में उबर के प्लान का जिक्र किया और ओला को प्रतिद्वंदी भी बताया, लेकिन साथ ही उन्होंने यह साफ किया कि कई मामलों में वो ओला से काफी आगे हैं और इसका उन्हें फायदा मिलेगा.

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इससे पहले रिपोर्ट्स आ रही थीं कि उबर साउथ एशिया बिजनेस को बेचकर निकलने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इन अफवाहों पर भी अब दारा खुसरोशाही ने विराम लगा दिया है. उन्होंने कहा कि भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश करेंगे और भारतीय मार्केट उनके लिए कोर मार्केट है.

खुसरोशाही ने कहा, 'ओला हमारा प्रतिद्वंदी है, टेक्नॉलॉजी का फायदा है और ग्लोबल डायनेमिक्स हैं जो हमारे लिए फायदेमंद हैं. हम अब पहुंच बढ़ाएंगे और हाइपर लोकल में भी पहुंचेंगे'

ओला के साथ उबर के मर्जर के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कहना जल्दबाजी होगी और हम ओला को टक्कर देते रहेंगे.

इस इवेंट में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन पॉलिसी भी बात की. उन्होंने कहा कि अमेरिका को इमिग्रेंट्स का देश कहा जा सकता है. उन्होंने कहा कि भारत से ही सत्या नडेला और सुंदर पिचाई जैसे लोग गए हैं और वो आज टॉप कंपनियों के बॉस हैं.

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उन्होंने यह भी कहा कि देश को इमिग्रेंट्स का स्वागत करना चाहिए और यह महत्वपूर्ण भी है.

गौरतलब है कि उबर के सीईओ दारा खुसरोशाही ईरान के रहने वाले हैं बस गए थे.

फैमिली के बारे के बारे में बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं अभी भी अपने परिवार का छोटा भाई हूं और हमारे घर में मेरी मां ही बॉस हैं. वहां सीईओ जैसी कोई बात नहीं है. मैं ईरान जाना पसंद करूंगा.’

दारा खुसरोशाही ने यह भी कहा कि फिलहाल उबर को भारत में एक कैब कंपनी की तरह जाना जाता है, लेकिन हम इससे ज्यादा हैं. दूसरे देशों में p2p कार शेयरिंग के तौर पर जाना जाता है. इनमें जीरो एमिशन ऑन डिमांड, पॉल्यूशन कंटोल और ट्रैफिक शामिल हैं.

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