तेल की जगह बिजली... बड़ी फैक्ट्रियों में पैदा संकट पर सरकार ने चल दिया ब्रह्मास्त्र

Iran war impact: ईरान युद्ध का असर भारत में भी दिखने लगा है. जहां तेल के लिए देश भर के कई इलाकों में लोग लंबी लाइन लगा रहे हैं. इसका असर बड़ी कंपनियों पर भी पड़ रहा है. भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को सलाह दी है. सरकार चाहती है कि तेल की हर बूंद का इस्तेमाल ठीक से हो. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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सरकार ने ऑटो कंपनियों को तेल की जगह बिजली इस्तेमाल करने की सहाल दी है. (Photo: Pixabay) सरकार ने ऑटो कंपनियों को तेल की जगह बिजली इस्तेमाल करने की सहाल दी है. (Photo: Pixabay)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

ईरान युद्ध की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस का संकट खड़ा हो गया है. इसका असर इंडस्ट्रीज पर भी पड़ने लगा है. ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और उसके पार्ट सप्लायर भी इससे अछूते नहीं है. अगर ये युद्ध लंबा खिंचता है तो कंपनियों के सामने सप्लाई को मेंटेन करने का एक भारी संकट खड़ा हो सकता है. इसे देखते हुए सरकार ने कंपनियों को सलाह दी है.

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भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों और पार्ट सप्लायर्स से प्रोडक्शन शेड्यूल को टाइट करने को कहा है. इसकी वजह ईंधन की बचत करना है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों से तेल और गैस के आयात में दिक्कत की वजह से कमी आशंका है. इसी वजह से सरकार ने ये कदम उठाया है.

साथ ही भारी उद्योग मंत्रालय ने कंपनियों से फैक्ट्री ऑपरेशन को तेल से हटाकर बिजली पर शिफ्ट करने का आग्रह किया है. इसके अलावा मैटेरियल की बढ़ती कीमतों और कमी को देखते हुए रिसाइकल्ड एलुमिनियम या दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए 25 मार्च को एडवाइजरी जारी की गई थी.

युद्ध का असर

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस आयातकों में से एक है. ये एडवाइजरी इस बात का संकेत है कि सरकार को इस संघर्ष और एनर्जी फ्लो, सप्लाई चेन और कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर चिंतित है. भारी उद्योग मंत्रालय से रायटर्स ने इस मामले में सवाल पूछा था, जिसका जवाब नहीं मिला है. 

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सरकार इंडस्ट्री के मुकाबले घरेलू गैस इस्तेमाल को प्राथमिकता दे रही है. इसकी वजह से इंडस्ट्रीज को उनकी औसत जरूरत की सिर्फ 80 फीसदी ही गैस मिल रही है. भारत की प्रमुख कार निर्माता कंपनियों को पार्ट सप्लाई करने वाली कुछ कंपनियां पहले ही गैस की कमी की शिकायत कर रहे हैं. खासकर उस मौके पर जब देश में वाहनों की ब्रिकी तेजी से बढ़ रही है. 

तेल की जगह बिजली का यूज 

मंत्रालय की ओर से जारी नोट में कहा गया है, 'जहां भी टेक्निकल रूप से संभव हो, वहां तेल आधारित फ्यूल की जगह बिजली का इस्तेमाल करने पर विचार किया जा सकता है. इसके अलावा प्रोडक्शन शेड्यूल को इस तरह से ऑप्टमाइज करें कि बेकार या स्टैंडबाय मोड में ईंधन खपत कम हो.'

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सरकार ने कंपनियों से ये भी कहा है कि जहां संभव हो वहां रिसाइकल्ड एलुमिनियम का इस्तेमाल करें. इसके अलावा पैकेजिंग और गैर जरूरी कामों के लिए अल्टरनेटिव का यूज करने के लिए कहा गया है. इससे डिमांड प्रेशर को कम करने में मदद मिलेगा.

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