उत्तर भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों में हर मेष संक्रांति पर सतुआ संक्रांति या फिर सतुआन संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. पंचांग के अनुसार यह पर्व इस साल 14 अप्रैल 2026 यानी आज मंगलवार को मनाया जा रहा है. सूर्यदेव के मेष राशि में जाते ही खरमास समाप्त हो जाता है और सभी मांगलिक कार्य जैसे शादी, सगाई और गृहप्रवेश वगैरह की शरुआत हो जाती है. सूर्य के मेष राषि में प्रवेश करते ही दिन भी बड़े होने लगते हैं.
ऋतु के बदलने के साथ ही हमारी परंपरा में एक नया त्योहार भी जुड़ जाता है, जिसे जूड़ शीतल कहते हैं. इस दिन से वातावरण और पर्यावरण के साथ-साथ अपने शरीर में भी शीतलीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाती है. क्योंकि मेष संक्रांति वसंत ऋतु के समाप्त हो जाने की सूचना है और गर्मी के आने का संकेत है. इसलिए जूड़ शीतल के दिन सत्तू के भोज की परंपरा है.
प्राकृतिक ठंडक देता है सत्तू
सत्तू प्राकृतिक ठंडक देता है. इसीलिए सतुआन या सतुआनी भोजपुरी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण काल-बोधक (यानी समय परिवर्तन की सूचना) पर्व है. हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य भूमध्य रेखा (विषुवत रेखा) को पार करके उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है, तब यह पर्व मनाया जाता है. इस खगोलीय घटना को मेष संक्रांति कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है. इसी के साथ खरमास की समाप्ति भी मानी जाती है.
यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बिहार और नेपाल में मनाया जाता है, खासकर ग्रामीण इलाकों में. इस दिन सत्तू खाने की परंपरा होती है. साथ ही सत्तू, घड़े में भरा पानी, गुड़, लोटा, छाता आदि वस्तुओं का दान भी किया जाता है.
मेष संक्रांति क्या है?
आकाश में सूर्य के आभासी पथ को 12 बराबर हिस्सों में बांटा गया है, जिन्हें राशियां कहा जाता है. इनमें मेष राशि पहली राशि है. जिस दिन सूर्य हिंदू कैलेंडर के अनुसार मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है, उस दिन को मेष संक्रांति कहा जाता है. वैज्ञानिक दृष्टि से सूर्य लगभग 21 मार्च के आसपास मेष राशि में प्रवेश करता है, जब दिन और रात बराबर होते हैं (विषुव). लेकिन भारतीय पद्धति के अनुसार यह तिथि 13 या 14 अप्रैल को पड़ती है.
देशभर में अलग-अलग नाम
मेष संक्रांति का यह पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है—
यूपी और बिहार में सतुआन
पंजाब में बैसाखी
असम में बोहाग बिहू
तमिलनाडु में पुथांडु
पश्चिम बंगाल में पोहिला बैसाख
इस तरह सतुआन न केवल एक क्षेत्रीय पर्व है, बल्कि यह पूरे भारत में नए साल और नई शुरुआत के रूप में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है. सतुआन गर्मी की भयानकता की घोषणा है. यह एक अपील है कि दोपहर में जब सूर्य सिर पर चढ़ आया है और बाहर गर्म लू चलने लगी है तो शरीर को आंतरिक ठंडक सिर्फ सत्तू ही दे सकता है.
ये लू से बचाता है. गर्मी से बढ़ रहे ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और भूख बढ़ाने का काम करता है. सत्तू, आम की कैरियां, नींबू और काला नमक गर्मी के लिए वरदान हैं. जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तो उसकी तपिश बढ़ जाती है. इस तपिश के आगे सत्तू कवच बन जाता है.
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