महाराष्ट्र: बीड के सूखाग्रस्त क्षेत्र में 'ग्राम सक्षम' की क्रांति, सिर्फ ₹200 में होगी एक एकड़ खेत की जुताई!

महाराष्ट्र के बीड जिले के धारूर तहसील के 10 सूखाग्रस्त गांवों में 'दिलासा संस्था' और 'एसबीआई फाउंडेशन' ने 'एसबीआई ग्राम सक्षम' अभियान शुरू किया है, जिससे खेती की लागत में 10 गुना तक कमी आई है. इसके तहत किसान खेती के लिए आवश्यक मशीनरी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है.

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Farmer's Plough Field (File Photo- PTI) Farmer's Plough Field (File Photo- PTI)

रोहिदास हातागले

  • बीड,
  • 04 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:26 PM IST

महाराष्ट्र के बीड जैसे सूखाग्रस्त जिले में गरीब और सीमांत किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए 'दिलासा संस्था' और 'एसबीआई फाउंडेशन' ने एक अनुकरणीय पहल की है. धारूर तहसील के 10 गांवों में चलाए जा रहे 'एसबीआई ग्राम सक्षम' अभियान के अंतर्गत खेती की लागत में 10 गुना तक की कमी आई है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है. आज के समय में महंगाई के दौर में डीजल और ट्रैक्टर से एक एकड़ खेत की जुताई (Ploughing) का खर्च लगभग 2000 से 2500 रुपये आता है.  लेकिन, इस अभियान के तहत स्थापित 'किसान सेवा केंद्रों' के माध्यम से यह सिर्फ 200 रुपये के रजिस्ट्रेशन शुल्क में किया जा रहा है.

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साल 2023 से अब तक 1500 से अधिक किसानों ने इसका लाभ उठाया है, जिससे लगभग 2000 एकड़ जमीन की सफलतापूर्वक जुताई की गई है. साल 2015 के भीषण सूखे के बाद धारूर तहसील के सबसे अधिक प्रभावित 10 गांवों—जिनमें हिंगणी, बोडखा, निमला, गावंदरा, तांदलवाड़ी मुख्य हैं, का चयन किया गया था. इन गांवों की सुविधा के लिए 5 किसान सेवा केंद्र बनाए गए हैं. जहां ट्रैक्टर, हल, रोटर और बुवाई के आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं. हिंगणी बु. में 'किसान भवन' की स्थापना किसानों को केवल मशीनी सहायता ही नहीं बल्कि तकनीकी ज्ञान देने के उद्देश्य से वर्ष 2025 में हिंगणी बु. में एक भव्य 'किसान भवन' का निर्माण किया गया है. 

  • इस भवन के माध्यम से पारंपरिक और उन्नत बीजों का संरक्षण किया जा रहा है.
  • वर्मीकम्पोस्ट (गांडूळ खत) निर्माण और रसायन मुक्त खेती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
  • कृषि विशेषज्ञों द्वारा खेती से जुड़ी समस्याओं का मौके पर समाधान समेत कई सुविधाएं दी जा रही हैं.

गांधीजी के 'गांव की ओर लौटें' के विचार को मिली गति महात्मा गांधी के "गांव की ओर लौटें" के विचार को धरातल पर उतारते हुए दिलासा संस्था (यवतमाल) के कुशल नियोजन और एसबीआई फाउंडेशन (मुंबई) के आर्थिक सहयोग ने इन गांवों की तस्वीर बदल दी है. धारूर तहसील के ये गांव अब 'सुजलाम-सुफलाम' होने की राह पर हैं और इस मॉडल की हर तरफ सराहना हो रही है.

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साल की शुरुआत में सूखे जैसी स्थिति और फिर बेमौसम भारी बारिश ने फसलों को बर्बाद कर दिया. कपास और सोयाबीन जैसी नकदी फसलों के दाम बाजार में लागत से भी कम रहे. लेकिन 'दिलासा संस्था' और 'एसबीआई फाउंडेशन' के जरिय किसानों को काफी मदद मिल रही है.

बता दें कि प्रशासनिक रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच 198 किसानों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है. आंकड़ों का विश्लेषण करें तो बीड जिले में औसतन हर 36 घंटे में एक किसान मौत को गले लगा रहा है. विशेष रूप से खरीफ सीजन के दौरान और उसके ठीक बाद आत्महत्याओं की संख्या में तेजी देखी गई. ऐसे में किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से 'दिलासा संस्था' और 'एसबीआई फाउंडेशन' काम कर रही हैं.

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