ईरान जंग का असर, ₹3,500 प्रति क्विंटल गिरे हल्दी के दाम, चिंता में किसान

ईरान युद्ध के कारण मराठवाड़ा की मशहूर हल्दी का निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतें तेजी से गिर रही हैं. जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है.

Advertisement
हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था (फाइल फोटो) हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था (फाइल फोटो)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • मराठवाड़ा ,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 1:40 PM IST

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में उगाई जाने वाली प्रसिद्ध हल्दी का निर्यात ईरान के युद्ध की वजह से पूरी तरह ठप हो गया है. इससे घरेलू बाजार में हल्दी की कीमतें तेजी से गिर गई हैं. कुछ ही दिनों में हल्दी की कीमत 16,500 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 13,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गई है. यानी एक क्विंटल हल्दी पर किसानों को 3,500 रुपये का नुकसान हो रहा है.

Advertisement

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, शिवसेना नेता और विधान परिषद सदस्य हेमंत पाटील ने मंगलवार को बताया कि मराठवाड़ा की हल्दी मुख्य रूप से खाड़ी देशों (गल्फ) और अफ्रीकी देशों में निर्यात की जाती है. पिछले महीने शुरू हुए अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह बंद हो गया है. निर्यात रुकने से माल घरेलू बाजार में ही सड़ रहा है, जिससे दाम तेजी से गिर रहे हैं.

बता दें कि मराठवाड़ा क्षेत्र पूरे देश के हल्दी निर्यात का लगभग आधा हिस्सा संभालता है. यहां की हल्दी गुणवत्ता में बेहतरीन मानी जाती है. हिंगोली जिले में ही लगभग 2 लाख एकड़ जमीन पर हल्दी की खेती होती है. हिंगोली की वासमत हल्दी को साल 2024 में GI टैग मिला था. यह हल्दी अपनी खास खुशबू, रंग, स्वाद के लिए जानी जाती है. आयुर्वेद, दवा, खाने-पीने और सौंदर्य प्रसाधनों में इसका खूब इस्तेमाल होता है.

Advertisement

टेंशन में किसान
निर्यात बंद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. हल्दी व्यापारी प्रकाश सोनी ने बताया कि अगर युद्ध जल्दी नहीं रुका तो कीमतें और भी गिर सकती हैं.  किसान पहले से ही महंगाई और अन्य समस्याओं से परेशान हैं, अब हल्दी जैसी नकदी फसल पर यह झटका उनके लिए बहुत बड़ा नुकसान साबित हो रहा है.

मराठवाड़ा के किसान उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार जल्दी कोई राहत पैकेज या वैकल्पिक बाजार का इंतजाम करे, ताकि उनकी मेहनत बर्बाद न हो. फिलहाल युद्ध की वजह से न सिर्फ हल्दी बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ रहा है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement