कमजोर मॉनसून और कम बारिश का अनुमान, फसलों के नुकसान से बचाव के लिए क्या करें किसान?

IMD ने इस साल सामान्य से कम मॉनसून की बारिश का अनुमान लगाया है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पहले से तैयारी करके और खेती के तरीकों में बदलाव करके फसलों के नुकसान से बच सकते हैं.

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खेती के तरीकों में बदलाव करके फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं किसान (File Photo- PTI) खेती के तरीकों में बदलाव करके फसलों को नुकसान से बचा सकते हैं किसान (File Photo- PTI)

आजतक एग्रीकल्चर डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 07 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:10 PM IST

भारत मौसम विभाग (IMD) ने इस साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान कम बारिश होने का अनुमान जताया है. मौसम विभाग के अनुसार, जून से सितंबर तक होने वाली कुल बारिश लंबे समय के औसत (LPA) की सिर्फ 92 प्रतिशत रहने की संभावना है. यह सामान्य से कम (below normal) है. अल नीनो का असर मुख्य वजह बताया जा रहा है, जो जुलाई के बाद बारिश को और कमजोर कर सकता है.

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देश के करीब 60 प्रतिशत किसान मॉनसून पर निर्भर रहते हैं. खरीफ फसलें जैसे धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दालें और सब्जियां सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं. कम बारिश से पानी की कमी, सूखा और फसलों की कम पैदावार का खतरा होता है, लेकिन सही तैयारी और उपायों से किसान नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पहले से तैयारी करें और खेती के तरीकों में बदलाव करके फसलों को नुकसान से बचाएं.

कम बारिश का असर क्या होगा?

  • खेतों में पर्याप्त पानी न जमा होने से बुवाई में देरी हो सकती है.
  • फसलों में पानी की कमी से विकास रुक सकता है, अनाज के दाने छोटे रह सकते हैं.
  • भूजल स्तर और जलाशय कम भरेंगे, सिंचाई मुश्किल होगी.
  • पशुओं के लिए चारा भी कम हो सकता है.

क्या तैयारी करें किसान?

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  • सूखा सहन करने वाली फसलें और किस्में चुनें.  पारंपरिक पानी वाली फसलों की जगह मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी) बोएं. ये कम पानी में भी अच्छी पैदावार देते हैं.
  • धान की जगह छोटी अवधि वाली सूखा-रोधी किस्में चुनें.
  • दालों (अरहर, मूंग, उड़द) और तिलहन (मूंगफली, सोयाबीन) पर जोर दें.

पानी का सही प्रबंधन करें  

  • ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाएं. ये पारंपरिक तरीके से 30-50% पानी बचाते हैं.
  • खेत में मल्चिंग (पुआल या प्लास्टिक शीट से मिट्टी ढकना) करें. इससे नमी बरकरार रहती है और वाष्पीकरण कम होता है.
  • छोटे तालाब, फार्म पॉन्ड या चेक डैम बनाएं ताकि बारिश का पानी इकट्ठा हो सके.
  • भूजल रिचार्ज के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग करें.

मिट्टी को स्वस्थ और मजबूत बनाएं  
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पोटाश और कैल्शियम का छिड़काव, सूक्ष्म पोषक तत्वों (माइक्रो न्यूट्रिएंट्स) का स्प्रे सब्जी फसलों को गर्मी और सूखे से बचाने में मदद करता है. इससे न सिर्फ पौधे स्वस्थ रहते हैं, बल्कि पैदावार और क्वालिटी दोनों में सुधार होता है. जैविक खाद (गोबर, वर्मीकंपोस्ट, हरी खाद) ज्यादा इस्तेमाल करें. स्वस्थ मिट्टी ज्यादा पानी सोखती है और सूखे में फसल को सहारा देती है. मिट्टी की जांच कराएं और उर्वरक संतुलित मात्रा में डालें.

मिश्रित खेती करें
एक ही फसल न बोकर कई फसलों को मिलाकर बोएं. इससे अगर एक फसल प्रभावित हुई तो दूसरी बच सकती है.
खेत की मेड़ पर पेड़ लगाएं. ये मिट्टी बचाते हैं और अतिरिक्त आय देते हैं. इसके अलावा फसल बीमा (PMFBY) करा लें, यह सूखे में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देता है.

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